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भुलाया नहीं जा सकता है रामभक्तों का बलिदान: चंपत राय
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अयोध्या। राममंदिर का आंदोलन 500 वर्षों से अधिक का है। अयोध्या में कई बार ऐसे भी आंदोलन मंदिर निर्माण के लिए हुए, जिसमें रामभक्तों ने अपना बलिदान दिया। बहुत ऐसे राम भक्त हैं जो आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन जो भी हमारे बीच हैं, श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट उनका सम्मान करता है। रामभक्तों का बलिदान भुलाया नहीं जा सकता। ये बातें ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने रविवार को कारसेवकपुरम में पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहीं।
चंपत राय ने कहा कि 500 वर्षों का आंदोलन देश में अनवरत चला। स्वतंत्र भारत में इस आंदोलन को गति 1984 के बाद मिली। अयोध्या के श्रीरामजन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण हो, इसके लिए लाखों रामभक्तों ने कारसेवा की।
हजारों भक्तों ने कष्ट सहा, सैकड़ों रामभक्तों ने अपने प्राण मंदिर निर्माण आंदोलन में दिए। कारसेवा में बलिदान दिए परिवार का दर्द हम समझते हैं। कारसेवकों के परिवारजन आमंत्रण चाहते हैं लेकिन कोरोना के कारण किसी को आमंत्रित नहीं किया जा रहा है। जिन्हें आमंत्रित भी किया जा रहा है उनके नाम को लेकर कयास न लगाया जाए।
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हम अनुरोध करते हैं कि आप सभी अपने स्थान से दूरदर्शन व अन्य संचार माध्यमों से इस ऐतिहासिक दृश्य का अवलोकन करते हुए सहभागी बनें। मंदिरों में पूजन-पाठ किया जाए और सायंकाल सभी भवनों व मंदिरों को सजाकर दीप जलाकर प्रकाश करते हुए इस शुभ अवसर का अभिनंदन करें।
दो हजारों स्थानों से पहुंची मिट्टी व जलकलश
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय ने बताया कि हमारे आह्वान पर पूरे देश से लगभग 1500 से भी अधिक स्थानों से पवित्र एवं ऐतिहासिक स्थलों की मिट्टी आई है। दो हजार से भी अधिक स्थानों व देश की सौ से भी अधिक पवित्र नदियों एवं सैकड़ों कुंडों के जल देश के कोने-कोने से रामभक्तों द्वारा लाए गए हैं। जिसमें प्रमुख रूप से गंगा, यमुना, नर्मदा, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी, सिंधु, ब्रह्मपुत्र, झेलम, शतलुज, रावी सहित समस्त पवित्र नदियों एवं देश के सभी प्रसिद्ध पवित्र कुंडों का जल शामिल है।
इसके साथ ही साथ अनेकों ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व के स्थानों की मिट्टी व जल भेजा गया है। जिनमें प्रमुख रूप से हल्दीघाटी की मिट्टी, चित्तौड़ दुर्ग की मिट्टी, स्वर्ण मंदिर के कुंड का जल व मिट्टी, वैष्णों देवी की मिट्टी, बिठूर में ब्रह्मखूंटी व नाना साहब पेशवा के किले की मिट्टी, रायगढ़ किले की मिट्टी, सभी ज्योर्तिंलिंगों के प्रांगण की मिट्टी व पवित्र जल, मानसरोवर की पवित्र रज व जल आदि अयोध्या पहुंच रहे हैं। सभी प्राप्त सामग्री को श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के कार्यालय में सुरक्षित रखा गया है। वैदिक विद्वानों के सुझाव के आधार पर इसका निर्माण में समय-समय पर सदुपयोग किया जाएगा।
170 अतिथि होंगे, निमंत्रण पत्र में होगा सिक्योरिटी सिस्टम
महासचिव ने कहा कि आमंत्रित आगंतुकों को 4 अगस्त को ठहराने के बाद ही सिक्योरिटी सिस्टम कोड का निमंत्रण कार्ड दिया जाएगा। सिक्योरिटी सिस्टम कार्ड में यह सुविधा बनाई गयी है कि जिन आगंतुकों को पास दिया जाएगा, अगर वह किसी कारण से कार्यक्रम स्थल से बाहर निकलते हैं, तो उन्हें दोबारा प्रवेश नहीं दिया जाएगा। प्रवेश निषेध कर दिया जाएगा। आमंत्रित व्यक्तियों के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि 170 व्यक्तियों से अधिक को निमंत्रण नहीं दिया गया है। कोविड-19 के कारण संख्या को कम करने का निर्णय लिया गया है। किसी भी दिशा से 6 फीट की दूरी पर ही आगंतुकों को बैठाए जाने की रूपरेखा खींची जा रही है।
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चंपत राय ने कहा कि 500 वर्षों का आंदोलन देश में अनवरत चला। स्वतंत्र भारत में इस आंदोलन को गति 1984 के बाद मिली। अयोध्या के श्रीरामजन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण हो, इसके लिए लाखों रामभक्तों ने कारसेवा की।
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हजारों भक्तों ने कष्ट सहा, सैकड़ों रामभक्तों ने अपने प्राण मंदिर निर्माण आंदोलन में दिए। कारसेवा में बलिदान दिए परिवार का दर्द हम समझते हैं। कारसेवकों के परिवारजन आमंत्रण चाहते हैं लेकिन कोरोना के कारण किसी को आमंत्रित नहीं किया जा रहा है। जिन्हें आमंत्रित भी किया जा रहा है उनके नाम को लेकर कयास न लगाया जाए।
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हम अनुरोध करते हैं कि आप सभी अपने स्थान से दूरदर्शन व अन्य संचार माध्यमों से इस ऐतिहासिक दृश्य का अवलोकन करते हुए सहभागी बनें। मंदिरों में पूजन-पाठ किया जाए और सायंकाल सभी भवनों व मंदिरों को सजाकर दीप जलाकर प्रकाश करते हुए इस शुभ अवसर का अभिनंदन करें।
दो हजारों स्थानों से पहुंची मिट्टी व जलकलश
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय ने बताया कि हमारे आह्वान पर पूरे देश से लगभग 1500 से भी अधिक स्थानों से पवित्र एवं ऐतिहासिक स्थलों की मिट्टी आई है। दो हजार से भी अधिक स्थानों व देश की सौ से भी अधिक पवित्र नदियों एवं सैकड़ों कुंडों के जल देश के कोने-कोने से रामभक्तों द्वारा लाए गए हैं। जिसमें प्रमुख रूप से गंगा, यमुना, नर्मदा, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी, सिंधु, ब्रह्मपुत्र, झेलम, शतलुज, रावी सहित समस्त पवित्र नदियों एवं देश के सभी प्रसिद्ध पवित्र कुंडों का जल शामिल है।
इसके साथ ही साथ अनेकों ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व के स्थानों की मिट्टी व जल भेजा गया है। जिनमें प्रमुख रूप से हल्दीघाटी की मिट्टी, चित्तौड़ दुर्ग की मिट्टी, स्वर्ण मंदिर के कुंड का जल व मिट्टी, वैष्णों देवी की मिट्टी, बिठूर में ब्रह्मखूंटी व नाना साहब पेशवा के किले की मिट्टी, रायगढ़ किले की मिट्टी, सभी ज्योर्तिंलिंगों के प्रांगण की मिट्टी व पवित्र जल, मानसरोवर की पवित्र रज व जल आदि अयोध्या पहुंच रहे हैं। सभी प्राप्त सामग्री को श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के कार्यालय में सुरक्षित रखा गया है। वैदिक विद्वानों के सुझाव के आधार पर इसका निर्माण में समय-समय पर सदुपयोग किया जाएगा।
170 अतिथि होंगे, निमंत्रण पत्र में होगा सिक्योरिटी सिस्टम
महासचिव ने कहा कि आमंत्रित आगंतुकों को 4 अगस्त को ठहराने के बाद ही सिक्योरिटी सिस्टम कोड का निमंत्रण कार्ड दिया जाएगा। सिक्योरिटी सिस्टम कार्ड में यह सुविधा बनाई गयी है कि जिन आगंतुकों को पास दिया जाएगा, अगर वह किसी कारण से कार्यक्रम स्थल से बाहर निकलते हैं, तो उन्हें दोबारा प्रवेश नहीं दिया जाएगा। प्रवेश निषेध कर दिया जाएगा। आमंत्रित व्यक्तियों के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि 170 व्यक्तियों से अधिक को निमंत्रण नहीं दिया गया है। कोविड-19 के कारण संख्या को कम करने का निर्णय लिया गया है। किसी भी दिशा से 6 फीट की दूरी पर ही आगंतुकों को बैठाए जाने की रूपरेखा खींची जा रही है।