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धर्मदास बोले, राम मंदिर मुद्दे पर विहिप ने क्यों नहीं की धर्म संसद

Fri, 17 Jul 2020 09:27 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 17 Jul 2020 09:27 PM IST
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हस्ताक्षर अभियान का समर्थन करते महंत धर्मदास। - फोटो : FAIZABAD
अयोध्या। हिंदू संगठनों द्वारा अयोध्या में विशालतम राममंदिर निर्माण के लिए चलाए जा रहे हस्ताक्षर अभियान को व्यापक समर्थन मिल रहा है। शुक्रवार को निर्वाणी अनी अखाड़ा के श्रीमहंत धर्मदास ने भी हस्ताक्ष कर अभियान को समर्थन दिया और कहा कि संपूर्ण अधिग्रहीत परिसर पर विश्व का सबसे विशालतम राम मंदिर बनाया जाना चाहिए। मंदिर प्रभु राम की मर्यादा के अनुसार बने। राम मंदिर कोई बार-बार बनने की वस्तु नहीं है जब राम मंदिर एक बार ही बनना है तो क्यों न वह विशालतम, भव्यतम, दिव्यतम हो।
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उन्होंने कहा कि विश्व हिंदू परिषद को जब संतों की आवश्यकता थी तो उन्होंने उनका इस्तेमाल किया और जब संतों के सम्मान की बात आई तो उन्हें ट्रस्ट से दूर कर दिया गया। बात-बात में संतों की धर्म संसद करने वाली विश्व हिंदू परिषद ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद राम मंदिर मुद्दा और ट्रस्ट बनाने के लिए धर्म संसद का आयोजन क्यों नहीं किया।
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महंत धर्मदास कहते हैं कि उनके गुरु महंत अभिराम दास ने अपना संपूर्ण जीवन राम जन्मभूमि मुक्ति को कराने के लिए समर्पित कर दिया था। उनकी भी यह अंतिम इच्छा थी कि मंदिर जब भी बने विश्व का विशालतम और भव्यतम मंदिर का निर्माण हो। उनकी अंतिम इच्छा के लिए मैं जीवन भर लड़ाई लड़ता रहूंगा। बाबरी विध्वंस के आरोपी एवं धर्म सेना राष्ट्रीय प्रमुख संतोष दुबे भी इसे इस मुद्दे के लिए अंतिम क्षणों तक लड़ाई लड़ने की बात करते हैं।
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नृपेंद्र मिश्रा से मुलाकात करेगा प्रतिनिधि मंडल
हिंदू महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता अधिवक्ता मनीष पांडेय कहते हैं कि ट्रस्ट के कुछ सदस्यों के अड़ियल रवैया के कारण विश्व का विशालतम राम मंदिर बनने में कठिनाई उत्पन्न हो रही है, सोमपुरा के पुत्र आशीष सोमपुरा की बातों पर ट्रस्ट गंभीर नहीं है। बताया कि अयोध्या में पधारे राममंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र को चल रहे आंदोलन से न सिर्फ अवगत कराया जाएगा बल्कि हस्ताक्षरित पर पत्रों को उन के माध्यम से प्रधानमंत्री तक पहुंचाने की बात भी की जाएगी। इस संबंध में 5 सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल उनसे मुलाकात कर एक ज्ञापन देगा
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