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परिक्रमा मार्ग से होकर रामजन्मभूमि परिसर पहुंचेंगे तराशे गए पत्थर

Sat, 06 Jun 2020 05:58 AM IST
लखनऊ ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: लखनऊ ब्यूरो Updated Sat, 06 Jun 2020 05:58 AM IST
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The carved stones will reach the Ramjanmabhoomi complex via Parikrama Marg
राममंदिर का मॉडल - फोटो : अमर उजाला

राममंदिर निर्माण के लिए रामजन्मभूमि परिसर में समतलीकरण का काम पूरा हो चुका है। अब नींव खोदकर फाउंडेशन बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। दूसरी तरफ श्रीरामजन्मभूमि न्यास कार्यशाला में तराश कर रखे हुए पत्थरों को अब रामजन्मभूमि परिसर में पहुंचाने की तैयारी भी तेज हो गई है। इसके लिए रास्ते की मैपिंग कर दी गई है।

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करीब 6 किलोमीटर की दूरी तय कर ट्रकों के माध्यम से पत्थरों को रामजन्मभूमि कार्यशाला में पहुंचाया जाएगा। खुले में होने के कारण जिन पत्थरों की चमक धूमिल पड़ गई है उन पत्थरों की सफाई व उन्हें चमकाने का काम अब रामजन्मभूमि परिसर में ही किया जाएगा।
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रामजन्मभूमि परिसर में समतलीकरण के बाद फाउंडेशन बनाए जाने की तैयारी है जिस पर मंदिर का निर्माण किया जाएगा। एलएंडटी के अधिकारियों मैनेजर पंकज श्रीवास्तव, विनोद कुमार, बेंडर सोनू सिंह ने रामजन्मभूमि न्यास कार्यशाला पहुंचकर पत्थरों को देखा और कार्यशाला के सुपरवाइजर के साथ पत्थरों को रामजन्मभूमि परिसर तक पहुंचाने को लेकर चर्चा की।
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कार्यशाला के सुपरवाइजर अन्नू भाई सोमपुरा ने बताया कि न्यास कार्यशाला के पीछे की दीवार परिक्रमा मार्ग की तरफ तोड़कर रास्ता बनाया जाएगा। इसी रास्ते के माध्यम से ट्रकों के जरिए पत्थर कार्यशाला से बाहर निकलकर पंचकोसी परिक्रमा मार्ग होते हुए, विद्याकुंड से टेढ़ीबाजार होते हुए रामजन्मभूमि परिसर तक पहुंचाएं जाएंगे। उन्होंने बताया कि इस रास्ते को ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय द्वारा हरी झंडी दे दी गई है।

प्रयास होगा कि रात में ये पत्थर परिसर तक पहुंचाए जाएं ताकि यातायात प्रभावित न हो। बताया कि बहुत सारे पत्थर खुले आसमान में होने के कारण फीके पड़ गए हैं, उनमें काई जम गयी है। अब इन पत्थरों की सफाई व इन्हें चमकाने का काम रामजन्मभूमि परिसर में ही किया जाएगा। बताया कि शीघ्र ही एलएंडटी कंपनी के पचास मजदूर अयोध्या पहुंचने वाले हैं जो इन पत्थरों की साफ-सफाई का कार्य करेंगे। बताया कि राममंदिर के लिए अब तक सवा लाख स्क्वायर फुट पत्थरों की तराशी हो चुकी है। शेष पत्थरों की तराशी के लिए रामजन्मभूमि परिसर में ही कार्यशाला खोली जाएगी।

प्रस्तावित मॉडल पर दो साल मेंक बन जाएगा मंदिर
अन्नू भाई सोमपुरा का कहना है कि प्रस्तावित राममंदिर मॉडल पर दो साल में मंदिर बनकर तैयार हो जाएगा। यदि तैयारियों पर गौर करें तो निर्धारित स्थल पर प्रथम तल के तराशे गए पत्थरों को शिफ्ट करने में अधिक से अधिक छह माह का समय लगेगा। इसके बाद दो से ढाई वर्ष में मंदिर बनकर तैयार हो जाएगा। पत्थरों को ईंट-गारा की बजाय कॉपर और सफेद सीमेंट से जोड़ा जाएगा। प्रथम तल के पत्थरों की शिफ्टिंग के साथ ही गर्भगृह भी आकार लेगा, जहां रामलला की प्रतिष्ठा होगी।

शीघ्र अयोध्या पहुंचेंगे राममंदिर के आर्किटेक्ट चंद्रकांत सोमपुरा
अन्नूभाई ने बताया कि एक सप्ताह के भीतर राममंदिर के आर्किटेक्ट चंद्रकांत सोमपुरा भी अयोध्या पहुंचने वाले हैं। राममंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने उन्हें अयोध्या आगमन के लिए कहा है। बताया कि प्रस्तावित राममंदिर का मॉडल सबसे पहले वर्ष 1989 में प्रयागराज कुंभ में रखा गया था। इसे चंद्रकांत सोमपुरा ने ही तैयार किया था। कुंभ के बाद इसे कुछ दिनों तक मंदिर के शिलान्यास स्थल पर रखा गया। वर्ष 1990 में जब श्रीरामजन्मभूमि न्यास कार्यशाला बनी तब मंदिर के मॉडल को भी वहां स्थापित कर किया गया। कार्यशाला आने वाले श्रद्धालु मंदिर मॉडल के सामने सिर झुकाना नहीं भूलते।


मजदूरों के लिए रामसेवकपुरम में बनेगा आवास
राममंदिर के निर्माण कार्य को अब गति प्रदान करने की तैयारी तेज हो गयी है। अगले एक सप्ताह के भीतर एलएंडटी कंपनी के करीब पचास मजदूर अयोध्या पहुंच जाएंगे। ऐसे में इन मजूदरों के लिए आवास निर्माण की भी प्रक्रिया तेज हो गयी है। एलएंडटी कंपनी के अधिकारियों ने आवास के लिए कारसेवकपुरम, रामजन्मभूमि न्यास कार्यशाला सहित रामसेवकपुरम स्थित कार्यशाला का निरीक्षण भी कर लिया है। माना जा रहा है कि रामसेवकपुरम में काफी जगह है इसलिए इसी स्थान को मजदूरों के आवास के लिए चिह्नित किया गया है। एक सप्ताह के भीतर मजदूरों के लिए रामसेवकपुरम में अस्थाई आवास का निर्माण भी शुरू कर दिया जाएगा।

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