रामलला के नाम पर दान-चंदा नहीं ले सकते अन्य ट्रस्ट, सरकार ने लगाई रोक
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रामलला के नाम पर मंदिर निर्माण से लेकर किसी भी गतिविधि के लिए अब अधिकृत ट्रस्ट के अलावा कोई अन्य ट्रस्ट/संस्था या व्यक्ति चंदा, दान-अनुदान नहीं ले सकेगा। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र बोर्ड की बैठक के बाद यह एडवाइजरी गृह मंत्रालय ने सभी प्रदेशों को जारी की है।
राममंदिर निर्माण को लेकर 1984 में सबसे पहले श्रीरामजन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति गोरक्षपीठाश्वर महंत अवैद्यनाथ जी की अध्यक्षता में बनी थी। फिर सालभर बाद ही जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी शिवरामाचार्य जी की अध्यक्षता में अक्तूबर 1985 में श्रीरामजन्मभूमि न्यास का गठन हुआ।
स्वामी शिवरामाचार्य जी का 1989 में साकेतवास होने के बाद महंत परमहंस रामचंद्र दास इसके अध्यक्ष बने। इस ट्रस्ट ने करीब 20 करोड़ नकद, अरबों की भूमि-भवन, मंदिर निर्माण की शिलाओं समेत निर्माण सामग्री व कई प्रकल्प स्थापित किए। वर्तमान में इसी ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास को ही गठित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का भी अध्यक्ष मनोनीत किया गया है।
बाबरी ढांचा ढहने के तत्काल बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिंहराव के प्रयास से ज्योतिष पीठाधीश्वर व द्वारिकाशारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की अगुवाई में 1993 में अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि रामालय न्यास का गठन हुआ था।
अयोध्या एक्ट लाकर इसी ट्रस्ट को राममंदिर का काम सौंपने की तैयारी थी। तीसरा ट्रस्ट श्रीरामजन्मभूमि मंदिर निर्माण न्यास है, जिसके सर्वेसर्वा यहां जानकीघाट बड़ा स्थान के महंत जन्मेजय शरण हैं। सभी ट्रस्टों को रामलला का मंदिर बनाने के लिए करोड़ों का चंदा-दान मिला है।
नए ट्रस्ट बनने के बाद भी रामालय ने स्वर्ण-संग्रह-सपर्या अभियान के तहत देश के सात हजार गांवों से एक हजार किलो सोना संग्रह कर भव्य मंदिर बनाने का अभियान 7 फरवरी 2020 से शुरू किया है। इस अभियान के खिलाफ यहां के डीएम अनुज कुमार झा ने भी शासन को रिपोर्ट भेजी थी।
सूत्र बताते हैं कि नई दिल्ली में 19 फरवरी को हुई श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट की पहली बैठक के बाद अध्यक्ष बने महंत नृत्यगोपाल दास व महासचिव चंपत राय ने खुद अन्य ट्रस्टों की ओर से चंदा-दान वसूली पर आपत्ति जताई थी। इसके बाद केंद्र सरकार ने सख्त कदम उठाने का आश्वासन देते एडवाइजरी जारी कर दी है।
एडवाइजरी जारी हो गई है: डॉ अनिल
विराजमान रामलला के मंदिर निर्माण के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र (ट्रस्ट) का गठन हो चुका है। इसलिए रामालय की ओर से स्वर्ण संग्रह अभियान समेत जो भी अन्य ट्रस्ट/संस्था या व्यक्ति रामलला के नाम पर धन आदि का संग्रह कर रहे हैं, उन पर रोक लगाने की मांग की गई थी। इसे लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी प्रदेशों को एडवाइजरी जारी कर दी है। इसकी सूचना ट्रस्ट में गृह मंत्रालय के अफसर ज्ञानेश कुमार ने दी है।
डॉ. अनिल मिश्र, ट्रस्टी व अध्यक्ष के बैंकिंग कामकाज के लिए अधिकृत
राममंदिर के लिए तय हो रहा दान-अनुदान लेने का स्वरूप
- ट्रस्ट के आफिसियों ट्रस्टी व जिलाधिकारी अनुज कुमार झा ने बताया कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट राममंदिर के लिए चंदा, दान-अनुदान लेने का स्वरूप तय कर रहा है। दान दाताओं को आयकर छूट के लिए 12-ए सर्टिफिकेट प्राप्त करने का आवेदन किया गया है। साथ ही पैन कार्ड के लिए भी पंजीकरण हुआ है। पूरी प्रक्रिया संपन्न होते ही अयोध्या में खोले जा रहे बैंक खाते को सार्वजनिक किया जाएगा। दान लेने का स्वरूप पूरी तरह से पारदर्शी व हाईटेक बनाया जा रहा है। इसके लिए एक वेबसाइट बन रही है, जहां दान-अनुदान समेत भक्तों को अयोध्या के महात्म्य, आगमन से लेकर पूजा-पाठ व ठहरने-घूमने की सभी जानकारियां उपलब्ध कराई जाएगी।
सोना जुटाकर ट्रस्ट को ही देंगे: अविमुक्तेश्वरानंद
रामालय ट्रस्ट के सचिव स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अमर उजाला को बताया कि देश के 7 हजार गांवों से एक हजार किलोग्राम सोना दान लेने का लक्ष्य है। यह अभियान वाराणसी से शुरू किया गया है। हम सोना जुटाकर अधिकृत ट्रस्ट हो ही देंगे, दानी एफिडेविट के जरिए सोना दे रहे हैं कि हम रामालय के माध्यम से ही दान करना चाहते हैं। ऐसे में सरकार या कोई ट्रस्ट हमें दान लेने से नहीं रोक सकता। हमारे ट्रस्ट में सनातन धर्म के सभी प्रमुख संत-धर्माचार्य व अखाड़े हैं। स्वामी स्वरूपानंद जी महाराज की खुन्नस के चलते सरकार ने ट्रस्ट में इन संतों को सम्मान नहीं दिया है। हम इसकी लड़ाई पूरे देश में लड़ेंगे। विहिप-संघ व भाजपा की मनमानी से समाज में संकीर्णता आ रही है।