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Ayodhya News: रामकथा व हिंदू संस्कृति पर शोध करेंगे छात्र
Thu, 29 Jun 2023 12:21 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Thu, 29 Jun 2023 12:21 AM IST
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अयोध्या। रामनगरी में युवा पीढ़ी रामकथा व हिंदू संस्कृति पर शोध कर सकेगी। यहां जल्द ही रामायण विश्वविद्यालय का निर्माण शुरू होने जा रहा है। इसके लिए कैबिनेट से मंजूरी मिल चुकी है। इस विश्वविद्यालय की स्थापना महर्षि रामायण विद्यापीठ ट्रस्ट द्वारा की जानी है। इसके लिए सरयू किनारे अयोध्या-गोरखपुर हाईवे से सटी 22 एकड़ जमीन भी चिन्हित की जा चुकी है।
रामनगरी में भारतीय सभ्यता, संस्कृति और अध्यात्म के अध्ययन के लिए रामायण विश्वविद्यालय की स्थापना की जाएगी। इस विश्वविद्यालय में भगवान राम के जीवन, उनसे संबंधित संस्कृति, शास्त्रों इत्यादि तथ्यों पर अध्ययन और शोध किया जाएगा। विशेष तौर पर रामायण शोध से जुड़े विभागों को खोला जाएगा। साथ ही यूनिवर्सिटी में हिंदी और संस्कृत भाषा को प्रमुख स्थान दिया जाएगा। इसमें छात्रों को वेद रामायण, उपनिषद, योग, ध्यान और आयुर्वेद आदि पढ़ाया जाएगा।
महर्षि रामायण विश्वविद्यालय बहुमंजिला होगा जिसमें पहले चरण में एक साथ 500 छात्रों को वेद, रामायण, उपनिषद, योग, ध्यान व आयुर्वेद आदि की शिक्षा दी जाएगी। वेदपाठी छात्रों के लिए आवास व भोजन की भी सुविधा होगी। विश्वविद्यालय में प्राचीन वैदिक शिक्षा पद्धति के साथ मॉडर्न साइंस को भी जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। महर्षि रामायण विद्यापीठ से जुड़े व रामायण विश्वविद्यालय के प्रोजेक्ट मैनेजर मुकेश सक्सेना ने बताया कि जुलाई से विश्वविद्यालय को आकार देने का काम शुरू हो जाएगा। दो साल में विश्वविद्यालय बनकर तैयार हो जाए, ऐसी योजना है। बताया कि विश्वविद्यालय को स्थापित करने के पीछे का उद्देश्य ज्ञान के प्राचीन और पारंपरिक खजाने का संरक्षण और विकास करना है। युवाओं में संस्कृति को भी मजबूत करना है।
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रामनगरी में भारतीय सभ्यता, संस्कृति और अध्यात्म के अध्ययन के लिए रामायण विश्वविद्यालय की स्थापना की जाएगी। इस विश्वविद्यालय में भगवान राम के जीवन, उनसे संबंधित संस्कृति, शास्त्रों इत्यादि तथ्यों पर अध्ययन और शोध किया जाएगा। विशेष तौर पर रामायण शोध से जुड़े विभागों को खोला जाएगा। साथ ही यूनिवर्सिटी में हिंदी और संस्कृत भाषा को प्रमुख स्थान दिया जाएगा। इसमें छात्रों को वेद रामायण, उपनिषद, योग, ध्यान और आयुर्वेद आदि पढ़ाया जाएगा।
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महर्षि रामायण विश्वविद्यालय बहुमंजिला होगा जिसमें पहले चरण में एक साथ 500 छात्रों को वेद, रामायण, उपनिषद, योग, ध्यान व आयुर्वेद आदि की शिक्षा दी जाएगी। वेदपाठी छात्रों के लिए आवास व भोजन की भी सुविधा होगी। विश्वविद्यालय में प्राचीन वैदिक शिक्षा पद्धति के साथ मॉडर्न साइंस को भी जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। महर्षि रामायण विद्यापीठ से जुड़े व रामायण विश्वविद्यालय के प्रोजेक्ट मैनेजर मुकेश सक्सेना ने बताया कि जुलाई से विश्वविद्यालय को आकार देने का काम शुरू हो जाएगा। दो साल में विश्वविद्यालय बनकर तैयार हो जाए, ऐसी योजना है। बताया कि विश्वविद्यालय को स्थापित करने के पीछे का उद्देश्य ज्ञान के प्राचीन और पारंपरिक खजाने का संरक्षण और विकास करना है। युवाओं में संस्कृति को भी मजबूत करना है।
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