{"_id":"5fdcd4088ebc3e3c4e0f9869","slug":"ram-barat-faizabad-news-lko555529553","type":"story","status":"publish","title_hn":"राम विवाह उत्सव में लीन अयोध्या, आज निकलेगी राम बरात","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
राम विवाह उत्सव में लीन अयोध्या, आज निकलेगी राम बरात
विज्ञापन
अयोध्या-रामविवाह उत्सव का उल्लास।
- फोटो : FAIZABAD
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अयोध्या। रामनगरी में राम विवाहोत्सव को लेकर उल्लास देखते ही बन रहा है। मंदिरों में धार्मिक अनुष्ठानों की धूम है तो संत-धर्माचार्य राम बरात की तैयारी में डूबे हुए हैं। कथा, प्रवचन, रामलीला मंचन से विवाह उत्सव पूरे रौ में है।
अगहन शुक्ल पंचमी पर शनिवार को रामनगरी के दर्जनों मंदिरों से पूरे वैभव के साथ रामबरात निकाली जाएगी। इसको लेकर हल्दी-सुपारी लगाकर मठ-मंदिरों को रामबरात का निमंत्रण भेजा जा रहा है। शुक्रवार को मंदिरों में विवाह परंपरा के तहत मंडप स्थापना की रस्म निभाई गईं। मठ-मंदिरों में सिय रघुवीर बिबाहु, जे सप्रेम गावहिं सुनहिं। तिन्ह कहुं सदा उछाहु, मंगलायतन राम जसु... जैसे मंगल गीत गूंज रहे हैं तो भक्तों का उत्साह भी शिखर पर है।
दशरथमहल बड़ास्थान में बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेंद्र प्रसादाचार्य की अध्यक्षता में विवाहोत्सव परवान पर है। यहां शुक्रवार दोपहर जेवनार गायन किया गया। विवाह के मंगल गीतों से दशरथ महल गुंजायमान होता रहा तो भक्त आनंद के सागर में गोता लगाते दिखे। सायंकाल तीन बजे से बाल भरत व्यास के मुखारविंद से रामकथा का प्रवचन सुन भक्त धन्य हुए तो रात्रिकाल रामविवाह आधारित रामलीला का मंचन आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
विज्ञापन
महंत देवेंद्रप्रसादाचार्य कहते हैं कि रामलला के भव्य मंदिर का कार्य शुरू होने के साथ अयोध्या में उत्सव ही उत्सव है, इसलिए उल्लास दोगुना होना स्वाभाविक है। कहते हैं कि रामविवाहोत्सव लोकमंगलकारी है।
बताया कि शनिवार को मंदिर से धनुषधारी भगवान को गर्भगृह से निकालकर भव्य रथ पर आरूढ़कर बरात निकाली जाएगी। जानकी महल में शुक्रवार को तिलकोत्सव किया गया। प्रभु राम सहित चार भाइयों का तिलकोत्सव विधिविधान पूर्वक मनाया गया।
मंदिर में विराजमान गर्भगृह में भगवान के स्वरूपों की तिलक की रस्म निभाई गयी। जानकी महल के ट्रस्टी आदित्य सुल्तानिया, प्रबंधक नरेश पोद्वार, रामकुमार शर्मा ने तिलक की रस्म निभाई। इस दौरान मंगल गीतों पर विभिन्न प्रांतों से आए भक्त मगन होकर नाचते-गाते नजर आए। उत्सव को लेकर जानकी महल की भव्यता देखते ही बन रही है। वहीं अन्य मंदिरों में रामबरात को लेकर तैयारियां अंतिम दौर में है।
लक्ष्मण किला में माड़व स्थापना हुई। रात्रिकाल रामलीला मंचन आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। शनिवार को कनकभवन, रामहर्षणकुंज, रंगमहल, हनुमानबाग आदि मंदिरों से राम बरात निकाली जाएगी।
विअहुति भवन में उल्लास शिखर पर
श्रीराम विवाहोत्सव का उल्लास विअहुति भवन में शिखर पर पहुंच गया है। शुक्रवार को मंदिर में हल्दी उत्सव का आयोजन भव्यता पूर्वक किया गया। वैैवाहिक गीतों के बीच हल्दी की रस्म अदा की गई तो उत्सव में लीन भक्त नाचते-गाते नजर आए। मंदिर के महंत वैकुंठ शरण भी विवाह की उपासना में डूबे दिखे और विवाह पदों का गायन भी किया। पुजारी रामकृपाल शरण ने बताया कि विवाहोत्सव को लेकर मंदिर में विभिन्न अनुष्ठानों की धूम है। यहां विवाह में कोहबर तक ही उत्सव आयोजित होता है। शनिवार को विवाह पंचमी के पर्व पर भव्य रामबरात निकाली जाएगी। बरात में विभिन्न प्रांतों से आए भक्त व साधु-संत शामिल होंगे।
भव्यता का पर्याय होती है रंगमहल की बरात
प्राचीन रंगमहल मंदिर में शुक्रवार को मंडप स्थापना की गई। इस अवसर पर विधिविधान पूर्वक पूजन-अर्चन किया गया। महंत रामशरण दास बताते हैं कि 200 वर्ष पूर्व संस्थापक आचार्य स्वामी सरयू शरण ने इस पौराणिक स्थल का जीर्णोद्घार कराया था। यहां एक अनूठी परंपरा है कि भगवान के विग्रह की अष्टायाम सेवा होती है। विग्रह को गर्भगृह से निकालकर विवाहोत्सव की रस्म निभाई जाती है। यहां की परंपरा में विवाहोत्सव एक गहन उपासना की तरह है। उन्होंने बताया कि शनिवार को हाथी, घोड़े, बैंड-बाजे के साथ रामबरात निकाली जाएगी। जिसमें राजनीतिक, प्रशासनिक व न्यायिक क्षेत्रों से जुडे़ विशिष्ट जन शामिल रहेंगे।
विज्ञापन
अगहन शुक्ल पंचमी पर शनिवार को रामनगरी के दर्जनों मंदिरों से पूरे वैभव के साथ रामबरात निकाली जाएगी। इसको लेकर हल्दी-सुपारी लगाकर मठ-मंदिरों को रामबरात का निमंत्रण भेजा जा रहा है। शुक्रवार को मंदिरों में विवाह परंपरा के तहत मंडप स्थापना की रस्म निभाई गईं। मठ-मंदिरों में सिय रघुवीर बिबाहु, जे सप्रेम गावहिं सुनहिं। तिन्ह कहुं सदा उछाहु, मंगलायतन राम जसु... जैसे मंगल गीत गूंज रहे हैं तो भक्तों का उत्साह भी शिखर पर है।
विज्ञापन
दशरथमहल बड़ास्थान में बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेंद्र प्रसादाचार्य की अध्यक्षता में विवाहोत्सव परवान पर है। यहां शुक्रवार दोपहर जेवनार गायन किया गया। विवाह के मंगल गीतों से दशरथ महल गुंजायमान होता रहा तो भक्त आनंद के सागर में गोता लगाते दिखे। सायंकाल तीन बजे से बाल भरत व्यास के मुखारविंद से रामकथा का प्रवचन सुन भक्त धन्य हुए तो रात्रिकाल रामविवाह आधारित रामलीला का मंचन आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
विज्ञापन
महंत देवेंद्रप्रसादाचार्य कहते हैं कि रामलला के भव्य मंदिर का कार्य शुरू होने के साथ अयोध्या में उत्सव ही उत्सव है, इसलिए उल्लास दोगुना होना स्वाभाविक है। कहते हैं कि रामविवाहोत्सव लोकमंगलकारी है।
बताया कि शनिवार को मंदिर से धनुषधारी भगवान को गर्भगृह से निकालकर भव्य रथ पर आरूढ़कर बरात निकाली जाएगी। जानकी महल में शुक्रवार को तिलकोत्सव किया गया। प्रभु राम सहित चार भाइयों का तिलकोत्सव विधिविधान पूर्वक मनाया गया।
मंदिर में विराजमान गर्भगृह में भगवान के स्वरूपों की तिलक की रस्म निभाई गयी। जानकी महल के ट्रस्टी आदित्य सुल्तानिया, प्रबंधक नरेश पोद्वार, रामकुमार शर्मा ने तिलक की रस्म निभाई। इस दौरान मंगल गीतों पर विभिन्न प्रांतों से आए भक्त मगन होकर नाचते-गाते नजर आए। उत्सव को लेकर जानकी महल की भव्यता देखते ही बन रही है। वहीं अन्य मंदिरों में रामबरात को लेकर तैयारियां अंतिम दौर में है।
लक्ष्मण किला में माड़व स्थापना हुई। रात्रिकाल रामलीला मंचन आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। शनिवार को कनकभवन, रामहर्षणकुंज, रंगमहल, हनुमानबाग आदि मंदिरों से राम बरात निकाली जाएगी।
विअहुति भवन में उल्लास शिखर पर
श्रीराम विवाहोत्सव का उल्लास विअहुति भवन में शिखर पर पहुंच गया है। शुक्रवार को मंदिर में हल्दी उत्सव का आयोजन भव्यता पूर्वक किया गया। वैैवाहिक गीतों के बीच हल्दी की रस्म अदा की गई तो उत्सव में लीन भक्त नाचते-गाते नजर आए। मंदिर के महंत वैकुंठ शरण भी विवाह की उपासना में डूबे दिखे और विवाह पदों का गायन भी किया। पुजारी रामकृपाल शरण ने बताया कि विवाहोत्सव को लेकर मंदिर में विभिन्न अनुष्ठानों की धूम है। यहां विवाह में कोहबर तक ही उत्सव आयोजित होता है। शनिवार को विवाह पंचमी के पर्व पर भव्य रामबरात निकाली जाएगी। बरात में विभिन्न प्रांतों से आए भक्त व साधु-संत शामिल होंगे।
भव्यता का पर्याय होती है रंगमहल की बरात
प्राचीन रंगमहल मंदिर में शुक्रवार को मंडप स्थापना की गई। इस अवसर पर विधिविधान पूर्वक पूजन-अर्चन किया गया। महंत रामशरण दास बताते हैं कि 200 वर्ष पूर्व संस्थापक आचार्य स्वामी सरयू शरण ने इस पौराणिक स्थल का जीर्णोद्घार कराया था। यहां एक अनूठी परंपरा है कि भगवान के विग्रह की अष्टायाम सेवा होती है। विग्रह को गर्भगृह से निकालकर विवाहोत्सव की रस्म निभाई जाती है। यहां की परंपरा में विवाहोत्सव एक गहन उपासना की तरह है। उन्होंने बताया कि शनिवार को हाथी, घोड़े, बैंड-बाजे के साथ रामबरात निकाली जाएगी। जिसमें राजनीतिक, प्रशासनिक व न्यायिक क्षेत्रों से जुडे़ विशिष्ट जन शामिल रहेंगे।