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प्रसूताओं के भोजन मद से लाखों डकारे
अमर उजाला ब्यूरो/फैजाबाद
Updated Fri, 19 Jun 2015 12:37 AM IST
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ठेकेदारों द्वारा खिलाए गए भोजन की पीएचसी/सीएचसी के अधीक्षकों ने पुष्टि भी की है। प्रसूताओं के भोजन में हेराफेरी को ऑडिट टीम ने पकड़ा है। शासन से प्रत्येक प्रसूता को प्रति दिन सौ रुपये की दर से भोजन और नाश्ता के मद में धन अनुमन्य है।
मुख्य चिकित्साधिकारी स्तर से इसे ठेकेदारों को सौंप दिया गया। जिले में खुशी नामक संस्था को खंडास व रुदौली सीएचसी का ठेका मिला। जबकि पूरा बाजार की फर्म जनार्दन सिंह कंस्ट्रक्शन कंपनी को बाकी नौ ब्लॉक स्तरीय चिकित्सालयों समेत जिला महिला अस्पताल में प्रसूताओं को भोजन खिलाने का जिम्मा सौंप दिया गया।
कार्य योजना के तहत प्रसूता को सुबह के समय दूध व बिस्कुट दिया जाता है और दोपहर व शाम को भोजन। भोजन की गुणवत्ता परखने के लिए अस्पताल के अधिकारियों की जिम्मेदारी है। भोजन की नियमित मॉनिटरिंग के लिए जिला स्तरीय अस्पतालों में सीएमएस और पीएचसी/सीएचसी पर अधीक्षक को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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बीते वित्तीय वर्ष में लगभग 39 हजार प्रसूताओं को अस्पताल में भर्ती किया गया है। जिम्मेदार इकाई ने इन प्रसूताओं को भोजन दिया गया है। पीएचसी/सीएचसी के अधीक्षकों की रिपोर्ट में प्रसूताओं को ठेकेदारों ने भोजन खिलाया है।
ऑडिट टीम ने जब चिकित्सकों से पूछा तो पता चला कि जिस दिन प्रसूता बच्चे को जन्म देती है, उस दिन अमूमन भोजन नहीं दिया जाता है। अधिकतर प्रसूताओं को पतली खिचड़ी व तरल भोजन दिया जाता है।
सीजेरियन ऑपरेशन वाली प्रसूताओं को तीन दिन तो बगैर भोजन के रखा जाता है और उसके बाद पतली खिचड़ी व अन्य खाद्य पदार्थ दिए जाते हैं। इसके विपरीत ठेकेदारों ने महिला अस्पताल में सीजेरियन ऑपरेशन वाली प्रसूताओं को पहले दिन से चावल, दाल, रोटी, सब्जी और सुबह का नास्ता दिया है। पीएचसी/सीएचसी पर भी भर्ती महिलाओं को एक जैसा ही भोजन दिया गया है।
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मुख्य चिकित्साधिकारी स्तर से इसे ठेकेदारों को सौंप दिया गया। जिले में खुशी नामक संस्था को खंडास व रुदौली सीएचसी का ठेका मिला। जबकि पूरा बाजार की फर्म जनार्दन सिंह कंस्ट्रक्शन कंपनी को बाकी नौ ब्लॉक स्तरीय चिकित्सालयों समेत जिला महिला अस्पताल में प्रसूताओं को भोजन खिलाने का जिम्मा सौंप दिया गया।
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कार्य योजना के तहत प्रसूता को सुबह के समय दूध व बिस्कुट दिया जाता है और दोपहर व शाम को भोजन। भोजन की गुणवत्ता परखने के लिए अस्पताल के अधिकारियों की जिम्मेदारी है। भोजन की नियमित मॉनिटरिंग के लिए जिला स्तरीय अस्पतालों में सीएमएस और पीएचसी/सीएचसी पर अधीक्षक को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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बीते वित्तीय वर्ष में लगभग 39 हजार प्रसूताओं को अस्पताल में भर्ती किया गया है। जिम्मेदार इकाई ने इन प्रसूताओं को भोजन दिया गया है। पीएचसी/सीएचसी के अधीक्षकों की रिपोर्ट में प्रसूताओं को ठेकेदारों ने भोजन खिलाया है।
ऑडिट टीम ने जब चिकित्सकों से पूछा तो पता चला कि जिस दिन प्रसूता बच्चे को जन्म देती है, उस दिन अमूमन भोजन नहीं दिया जाता है। अधिकतर प्रसूताओं को पतली खिचड़ी व तरल भोजन दिया जाता है।
सीजेरियन ऑपरेशन वाली प्रसूताओं को तीन दिन तो बगैर भोजन के रखा जाता है और उसके बाद पतली खिचड़ी व अन्य खाद्य पदार्थ दिए जाते हैं। इसके विपरीत ठेकेदारों ने महिला अस्पताल में सीजेरियन ऑपरेशन वाली प्रसूताओं को पहले दिन से चावल, दाल, रोटी, सब्जी और सुबह का नास्ता दिया है। पीएचसी/सीएचसी पर भी भर्ती महिलाओं को एक जैसा ही भोजन दिया गया है।