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परमहंस समाधि स्थल को तोड़े जाने की संभावना से संत चिंतित
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समाधि स्थल पर परमहंस को नमन करते संत।
- फोटो : FAIZABAD
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अयोध्या। सरयू तट स्थित रामचंद्र दास परमहंस समाधि स्थल को तोड़े जाने की संभावना को लेकर संत चिंतित हैं। इसको लेकर शुक्रवार को संतों ने समाधि स्थल पर बैठक कर आक्रोश जताया। साथ ही चेतावनी दी कि यदि समाधिस्थल पर बने भवन को अवैध निर्माण के नाम पर तोड़ा गया तो संत आंदोलन को बाध्य होंगे।
बताते चलें कि सिंचाई विभाग ने समाधि स्थल का जीर्णोद्घार कराने वाले आचार्य नारायण मिश्र को पहले ही नोटिस दे रखा है। जिसका मामला न्यायालय में विचाराधीन है। शुक्रवार को बैठक में आचार्य नारायण मिश्र ने बताया कि आए दिन सिंचाई विभाग के अधिकारी आते हैं और समाधिस्थल को अवैध निर्माण बताकर तोड़ने की बात कहते हैं।
जनसहयोग से समाधिस्थल का जीर्णोद्घार कराया गया है। इस समाधि स्थल पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी भी आ चुके हैं तो वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी कई बार समाधिस्थल पर जा चुके हैं। ऐसे में यदि ये समाधि यदि अवैध है तो परमहंस की असली समाधि कहां है।
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महंत पवन दास शास्त्री ने कहा कि राममंदिर आंदोलन के महानायक परमहंस की आज तक एक समाधि भी सरकार नहीं बनवा सकी। जो बनी है उसे भी तोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, यह कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
गुरुद्वारा ब्रह्मकुंड के चरनजीत सिंह ने कहा कि समाधि तोड़ने का अधिकार किसी को नहीं है, यदि ऐसा करने का प्रयास हुआ तो व्यापक स्तर पर विरोध किया जाएगा। आचार्य करपात्री महाराज, महंत सत्येंद्र दास वेदांती, डॉ.देवेशाचार्य, संत वरूण दास, महंत सीतारामदास, संत रामदास, संत रामशरण दास, धर्मेंद्र गुप्ता, संतोष शास्त्री आदि ने भी आक्रोश व्यक्त कर आंदोलन की चेतावनी दी।
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बताते चलें कि सिंचाई विभाग ने समाधि स्थल का जीर्णोद्घार कराने वाले आचार्य नारायण मिश्र को पहले ही नोटिस दे रखा है। जिसका मामला न्यायालय में विचाराधीन है। शुक्रवार को बैठक में आचार्य नारायण मिश्र ने बताया कि आए दिन सिंचाई विभाग के अधिकारी आते हैं और समाधिस्थल को अवैध निर्माण बताकर तोड़ने की बात कहते हैं।
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जनसहयोग से समाधिस्थल का जीर्णोद्घार कराया गया है। इस समाधि स्थल पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी भी आ चुके हैं तो वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी कई बार समाधिस्थल पर जा चुके हैं। ऐसे में यदि ये समाधि यदि अवैध है तो परमहंस की असली समाधि कहां है।
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महंत पवन दास शास्त्री ने कहा कि राममंदिर आंदोलन के महानायक परमहंस की आज तक एक समाधि भी सरकार नहीं बनवा सकी। जो बनी है उसे भी तोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, यह कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
गुरुद्वारा ब्रह्मकुंड के चरनजीत सिंह ने कहा कि समाधि तोड़ने का अधिकार किसी को नहीं है, यदि ऐसा करने का प्रयास हुआ तो व्यापक स्तर पर विरोध किया जाएगा। आचार्य करपात्री महाराज, महंत सत्येंद्र दास वेदांती, डॉ.देवेशाचार्य, संत वरूण दास, महंत सीतारामदास, संत रामदास, संत रामशरण दास, धर्मेंद्र गुप्ता, संतोष शास्त्री आदि ने भी आक्रोश व्यक्त कर आंदोलन की चेतावनी दी।