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समस्याओं से जूझ रहा औद्योगिक क्षेत्र
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 20 Aug 2015 12:23 AM IST
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कारोबारी कहते हैं कि हुनरमंद हाथों को सरकारी मदद तक नहीं मिलती। सड़कों की हालत खराब है, कई जगह ट्रक निकलना भी मुश्किल है। बिजली-पानी की शिकायतें हैं।
ऐसे में उद्योगों का जहां सुविधाओं का रोना है, वहीं बाजार का भी संकट है। हालांकि ग्रोथ रेट 5.5 प्रतिशत वार्षिक बताई जा रही है।
राजकीय औद्योगिक आस्थान गद्दौपुर में खटर-पटर की आवाज के साथ चिमनियों से काला धुआं उड़ता है। सरकार ने उद्यमियों को प्लाट देने तक अपने को सीमित कर लिया।
1967 में स्थापित इस औद्योगिक आस्थान अब 42 इकाईयां चल रही है। कई कारखानों के उत्पाद जिले और प्रदेश से आगे निकल अपने हुनर को डंका बजा रहे हैं। लेकिन इन्हें सरकारी मदद नहीं दी जाती है।
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कारोबार बढ़ाने के लिए कारोबारियों को ही बैंक की शरण में जाना पड़ता है। अधिक ब्याज पर कर्ज लेना और अधिकारियों को नजराना इनकी मजबूरी है।
डीएम आवास से मऊशिवाला होकर रायबरेली जाने वाले मार्ग और रेलवे लाइन के किनारे विशाल भूभाग में फैले इस औद्योगिक क्षेत्र के कारखानों में कहीं उच्च स्तर की प्लाइवुड बन रही है।
तो कही ट्रांसफार्मर, बिजली के पोल, उच्च स्तर की दालें, होजरी के सामान, पीओपी के खिलौने, बैट्री, नमकीन, पशु आहार, पाइप और मशीनरी पार्ट्स का निर्माण हो रहा है। ट्रांसफार्मर, प्लाइवुड और दाल की जड़ें प्रदेश के बाहर निकल चुकी हैं।
व्यापारी नेता सुशील जायसवाल कहते हैं कि एक समस्याओं हो तो बतायें। सड़क की हालत सबसे खराब है। ट्रकों का निकलना मुश्किल है। औद्योगिक क्षेत्र की समस्याओं पर अधिकारी चुप्पी साध लेते हैं। -,
व्यापारी नेता विजय कुमार गुप्त बोले कि बिजली की समस्या बदतर है। इसकी शिकायत भी मिल मालिकों को साथ लेकर कई बार अधिकारियों से की गई, कुछ नहीं हुआ। नया कारखाना डालने के लिए जमीन ही नहीं है।
व्यापारी नेता वेद प्रकाश गुप्त ने कहा कि उद्योग बंधु की बैठक में मामला उठाया। जमीन कागजों में ही रह गई। सच तो यह है कि यहां कारखाना लगाने का माहौल ही नहीं है। सुविधाएं अलग-अलग मेजों पर मिलती हैं
व्यापारी नेता चंद्र प्रकाश ने कहा बिजली के लिये लाइनमैन से लेकर जेई तक का चक्कर लगाना पड़ता है। जो नया उद्योग डालना चाहते हैं, वह इससे पीछे हट रहे हैं। जो लगे हैं वह बंद हो रहे हैं। नई पॉलिसी बने, लोन की किश्तें बंधने के साथ सहूलियत मिले तो बात बने।
जिला उद्योग केंद्र फैजाबाद के उपायुक्त रामप्रताप तिवारी का दावा है कि वहीं गद्दौपुर में कोई न तो कोई बीमार इकाई है और न कोई बंद है। इनकी मुख्य समस्या धन की है। इसे वह बीमार इकाई घोषित कर दूर करवा सकते हैं।
लेकिन यह प्रक्रिया लंबी व जटिल होने से कारोबारी सीधे बैंक से कर्ज लेकर अपना कारोबार उत्तरोत्तर बढ़ाते जा रहे हैं। सारा कार्य ई-फाइलिंग हो जाने से सरकार ने सभी सुविधाएं बंद कर दी हैं।
वह अधिकार शून्य हैं। व्यापारी योजनाओं का लाभ लेना चाहें तो वह कार्यालय आकर अथवा स्वयं ई-फाइलिंग कर सकते हैं।
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ऐसे में उद्योगों का जहां सुविधाओं का रोना है, वहीं बाजार का भी संकट है। हालांकि ग्रोथ रेट 5.5 प्रतिशत वार्षिक बताई जा रही है।
राजकीय औद्योगिक आस्थान गद्दौपुर में खटर-पटर की आवाज के साथ चिमनियों से काला धुआं उड़ता है। सरकार ने उद्यमियों को प्लाट देने तक अपने को सीमित कर लिया।
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1967 में स्थापित इस औद्योगिक आस्थान अब 42 इकाईयां चल रही है। कई कारखानों के उत्पाद जिले और प्रदेश से आगे निकल अपने हुनर को डंका बजा रहे हैं। लेकिन इन्हें सरकारी मदद नहीं दी जाती है।
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कारोबार बढ़ाने के लिए कारोबारियों को ही बैंक की शरण में जाना पड़ता है। अधिक ब्याज पर कर्ज लेना और अधिकारियों को नजराना इनकी मजबूरी है।
डीएम आवास से मऊशिवाला होकर रायबरेली जाने वाले मार्ग और रेलवे लाइन के किनारे विशाल भूभाग में फैले इस औद्योगिक क्षेत्र के कारखानों में कहीं उच्च स्तर की प्लाइवुड बन रही है।
तो कही ट्रांसफार्मर, बिजली के पोल, उच्च स्तर की दालें, होजरी के सामान, पीओपी के खिलौने, बैट्री, नमकीन, पशु आहार, पाइप और मशीनरी पार्ट्स का निर्माण हो रहा है। ट्रांसफार्मर, प्लाइवुड और दाल की जड़ें प्रदेश के बाहर निकल चुकी हैं।
व्यापारी नेता सुशील जायसवाल कहते हैं कि एक समस्याओं हो तो बतायें। सड़क की हालत सबसे खराब है। ट्रकों का निकलना मुश्किल है। औद्योगिक क्षेत्र की समस्याओं पर अधिकारी चुप्पी साध लेते हैं। -,
व्यापारी नेता विजय कुमार गुप्त बोले कि बिजली की समस्या बदतर है। इसकी शिकायत भी मिल मालिकों को साथ लेकर कई बार अधिकारियों से की गई, कुछ नहीं हुआ। नया कारखाना डालने के लिए जमीन ही नहीं है।
व्यापारी नेता वेद प्रकाश गुप्त ने कहा कि उद्योग बंधु की बैठक में मामला उठाया। जमीन कागजों में ही रह गई। सच तो यह है कि यहां कारखाना लगाने का माहौल ही नहीं है। सुविधाएं अलग-अलग मेजों पर मिलती हैं
व्यापारी नेता चंद्र प्रकाश ने कहा बिजली के लिये लाइनमैन से लेकर जेई तक का चक्कर लगाना पड़ता है। जो नया उद्योग डालना चाहते हैं, वह इससे पीछे हट रहे हैं। जो लगे हैं वह बंद हो रहे हैं। नई पॉलिसी बने, लोन की किश्तें बंधने के साथ सहूलियत मिले तो बात बने।
जिला उद्योग केंद्र फैजाबाद के उपायुक्त रामप्रताप तिवारी का दावा है कि वहीं गद्दौपुर में कोई न तो कोई बीमार इकाई है और न कोई बंद है। इनकी मुख्य समस्या धन की है। इसे वह बीमार इकाई घोषित कर दूर करवा सकते हैं।
लेकिन यह प्रक्रिया लंबी व जटिल होने से कारोबारी सीधे बैंक से कर्ज लेकर अपना कारोबार उत्तरोत्तर बढ़ाते जा रहे हैं। सारा कार्य ई-फाइलिंग हो जाने से सरकार ने सभी सुविधाएं बंद कर दी हैं।
वह अधिकार शून्य हैं। व्यापारी योजनाओं का लाभ लेना चाहें तो वह कार्यालय आकर अथवा स्वयं ई-फाइलिंग कर सकते हैं।