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दवाओं की कमी पर बिफरे प्रमुख सचिव स्वास्थ्य
फैजाबाद
Updated Sat, 28 Jan 2017 11:17 PM IST
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फैजाबाद में शनिवार को जिला अस्पताल के ब्लड बैंक स्थित लैब के बारे में प्रमुख सचिव को निरीक्षण के दौरान जानकारी देते प्रमुख अधीक्षक।
- फोटो : अमर उजाला
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प्रमुख सचिव स्वास्थ्य अरुण कुमार सिन्हा ने शनिवार को जिला अस्पताल और महिला अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। वार्ड में मरीजों को दवाएं न मिलने पर उन्होंने अधिकारियों को फटकार लगाई। स्टाक में ही 52 प्रकार की जीवन रक्षक दवाएं नहीं मिली।
डॉक्टरों की कमी पाई गई। महिला अस्पताल में नियमित बेहोशी के डॉक्टर न होने से सीजेरियन ऑपरेशन की दिक्कतें सामने आई। इस बीच अस्पताल प्रशासन ने आरसी रेट की कंपनियों से इन दवाओं की आपूर्ति समय से न करने की बात कही।
प्रमुख सचिव स्वास्थ्य ने सुबह तकरीबन साढ़े दस बजे जिला अस्पताल पहुंचकर वार्डों का निरीक्षण किया। इमरजेंसी, न्यू इमरजेंसी, सर्जरी और पेईंगवार्ड देखा। यहां उन्हें सब ठीक मिला, लेकिन जैसी ही वे जनरल वार्ड में पहुंचे तो मरीजों ने अस्पताल की खामियां बतानी शुरू की।
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भर्ती श्यामादेवी ने बताया कि दवाएं बाहर से मंगाई गई है। इस पर प्रमुख सचिव ने अस्पताल के अधिकारियों को फटकार लगाई। अस्पताल प्रशासन ने मरीजों की बेहतर जांच के लिए एक एलाइजा रीडर और सिटी स्कैन मशीन की डिमांड की। बाद में चिकित्सकों की कमी पर चर्चा हुई। प्रमुख सचिव ने बताया कि प्रदेश में 17 हजार चिकित्सकों की जगह महज दस हजार डाक्टर हैं। इसे दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।
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डॉक्टरों की कमी पाई गई। महिला अस्पताल में नियमित बेहोशी के डॉक्टर न होने से सीजेरियन ऑपरेशन की दिक्कतें सामने आई। इस बीच अस्पताल प्रशासन ने आरसी रेट की कंपनियों से इन दवाओं की आपूर्ति समय से न करने की बात कही।
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प्रमुख सचिव स्वास्थ्य ने सुबह तकरीबन साढ़े दस बजे जिला अस्पताल पहुंचकर वार्डों का निरीक्षण किया। इमरजेंसी, न्यू इमरजेंसी, सर्जरी और पेईंगवार्ड देखा। यहां उन्हें सब ठीक मिला, लेकिन जैसी ही वे जनरल वार्ड में पहुंचे तो मरीजों ने अस्पताल की खामियां बतानी शुरू की।
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भर्ती श्यामादेवी ने बताया कि दवाएं बाहर से मंगाई गई है। इस पर प्रमुख सचिव ने अस्पताल के अधिकारियों को फटकार लगाई। अस्पताल प्रशासन ने मरीजों की बेहतर जांच के लिए एक एलाइजा रीडर और सिटी स्कैन मशीन की डिमांड की। बाद में चिकित्सकों की कमी पर चर्चा हुई। प्रमुख सचिव ने बताया कि प्रदेश में 17 हजार चिकित्सकों की जगह महज दस हजार डाक्टर हैं। इसे दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।