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अयोध्या से हुई हिंदुत्व बनाम पाखंड समझाने की कोशिश
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अयोध्या। यूं ही भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा 10 राज्यों की सरकार लेकर बुधवार को अयोध्या नहीं आए थे, उनकी निगाह पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव में राम मंदिर एजेंडे पर है। यह ऐसी दुखती रग है, जिस पर कांग्रेस, सपा, बसपा सरकारों के चाल-चरित्र और चेहरे पर भाजपा आसानी से सवाल उठा सकती है। इसको धार देकर चुनाव अभियान में विरोधियों के साफ्ट हिंदुत्व को पाखंड बताने-समझाने की पूरी कोशिश होगी।
भाजपा शासित राज्यों के सपत्निक आए मुख्यमंत्री राम के रंग में रंगे थे। आवभगत के लिए तय होटल का माहौल भी राममय था। अवधी नृत्य और संगीत ऐसे दृश्य उपस्थित कर रहे थे मानो अयोध्या वनवास से लौटे राम के स्वागत जैसा ही अतिथि देवो भव.. के मंत्र से अनुप्राणित होकर भाव विह्वल हो। लेकिन सरयू की लहरों ने युगो-युगों से तमाम उतार-चढ़ाव देखे हैं। राम का 14 साल का वनवास झेला है, तो उनकी जन्मभूमि पर मस्जिद बनते और टूटते भी। राममंदिर के लिए पांच सौ साल का कालखंड राम के वनवास के कई गुना ज्यादा सिर्फ पीड़ादायक ही नहीं, बल्कि संघर्षमय और बलिदानी भी रहा है। राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा इन्हीं मनोभावों को व्यक्त करते हुए बोले कि करोड़ों हिंदुओं के मन में एक तमन्ना थी कि राममंदिर बने। सदियों की आकांक्षा पूरी हो रही है, सपना साकार हो रहा है, भव्य राममंदिर का निर्माण कार्य चल रहा है। उन्होंने विरोधियों को यह कहकर जवाब दिया कि सभी पार्टी के कार्यकर्ता राष्ट्रवाद से प्रेरित हैं, भारतीय संस्कृति के प्रति नतमस्तक रहते हैं। हम सब जो राष्ट्र के सेवा में लगे हैं हमेशा भक्ति के रंग में रंगे रहते हैं।
भाजपा ने पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद की पुस्तक ‘सनराइज ओवर अयोध्या’ के विमोचन के मौके पर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला था। यही नहीं हाल ही में राहुल गांधी ने हिंदुत्व बनाम हिंदूवादी का नया दांव खेला और साफ्ट हिंदुत्व की राह पर प्रियंका गांधी की कई सभाओं में मंत्रोच्चार गूंजे। सपा मुखिया अखिलेश यादव भी अपने चुनावी अभियान मे खूब मंदिरों की ओर रुख कर रहे हैं। दोनों तरफ से एक-दूसरे को पाखंडी साबित करने की कोशिश शुरू हो गई है, ऐसे में तय है कि चुनाव में अयोध्या मुद्दा भाजपा संजीवनी की तरह इस्तेमाल करेगी। यहां आस्था के मेगा शो में यही जताने के लिए 10 राज्यों की सरकार रामलला के दरबार आई।
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मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यह कहकर सपा सरकार के जुल्म-ज्यादती की याद भी दिला दी कि कारसेवा करने आए थे.. तब क्या हाल था, लाखों लोग राम के लिए जान देने को आतुर थे, मगर सरकार राम के विरोध में खड़ी थी। चुनाव प्रचार तेज होते ही ‘सॉफ्ट’ हिंदुत्व और ‘हार्ड’ हिंदुत्व के मुद्दे खूब उछलेंगे, तब अयोध्या के उदाहरण ही भाजपा के काम आएंगे। (संवाद)
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भाजपा शासित राज्यों के सपत्निक आए मुख्यमंत्री राम के रंग में रंगे थे। आवभगत के लिए तय होटल का माहौल भी राममय था। अवधी नृत्य और संगीत ऐसे दृश्य उपस्थित कर रहे थे मानो अयोध्या वनवास से लौटे राम के स्वागत जैसा ही अतिथि देवो भव.. के मंत्र से अनुप्राणित होकर भाव विह्वल हो। लेकिन सरयू की लहरों ने युगो-युगों से तमाम उतार-चढ़ाव देखे हैं। राम का 14 साल का वनवास झेला है, तो उनकी जन्मभूमि पर मस्जिद बनते और टूटते भी। राममंदिर के लिए पांच सौ साल का कालखंड राम के वनवास के कई गुना ज्यादा सिर्फ पीड़ादायक ही नहीं, बल्कि संघर्षमय और बलिदानी भी रहा है। राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा इन्हीं मनोभावों को व्यक्त करते हुए बोले कि करोड़ों हिंदुओं के मन में एक तमन्ना थी कि राममंदिर बने। सदियों की आकांक्षा पूरी हो रही है, सपना साकार हो रहा है, भव्य राममंदिर का निर्माण कार्य चल रहा है। उन्होंने विरोधियों को यह कहकर जवाब दिया कि सभी पार्टी के कार्यकर्ता राष्ट्रवाद से प्रेरित हैं, भारतीय संस्कृति के प्रति नतमस्तक रहते हैं। हम सब जो राष्ट्र के सेवा में लगे हैं हमेशा भक्ति के रंग में रंगे रहते हैं।
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भाजपा ने पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद की पुस्तक ‘सनराइज ओवर अयोध्या’ के विमोचन के मौके पर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला था। यही नहीं हाल ही में राहुल गांधी ने हिंदुत्व बनाम हिंदूवादी का नया दांव खेला और साफ्ट हिंदुत्व की राह पर प्रियंका गांधी की कई सभाओं में मंत्रोच्चार गूंजे। सपा मुखिया अखिलेश यादव भी अपने चुनावी अभियान मे खूब मंदिरों की ओर रुख कर रहे हैं। दोनों तरफ से एक-दूसरे को पाखंडी साबित करने की कोशिश शुरू हो गई है, ऐसे में तय है कि चुनाव में अयोध्या मुद्दा भाजपा संजीवनी की तरह इस्तेमाल करेगी। यहां आस्था के मेगा शो में यही जताने के लिए 10 राज्यों की सरकार रामलला के दरबार आई।
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मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यह कहकर सपा सरकार के जुल्म-ज्यादती की याद भी दिला दी कि कारसेवा करने आए थे.. तब क्या हाल था, लाखों लोग राम के लिए जान देने को आतुर थे, मगर सरकार राम के विरोध में खड़ी थी। चुनाव प्रचार तेज होते ही ‘सॉफ्ट’ हिंदुत्व और ‘हार्ड’ हिंदुत्व के मुद्दे खूब उछलेंगे, तब अयोध्या के उदाहरण ही भाजपा के काम आएंगे। (संवाद)