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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ayodhya News ›   Patients were sounding rows, not the staff, facilities

मरीजों की लग रहीं कतारें, सुविधाएं है न स्टाफ

Wed, 02 Sep 2015 10:25 PM IST
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो Updated Wed, 02 Sep 2015 10:25 PM IST
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जबकि मरीजों की भीड़ लग रही है। हाईकोर्ट से आए कमीशन की पड़ताल के अगले दिन बुधवार को मात्र दो मरीज भर्ती हुए।  सीटी स्कैन, एमआरआई समेत तमाम जांच मशीनें ताले में बंद मिलीं।
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अस्पताल में सिर्फ हीमोग्लोबीन की जांच हो पा रही है। जुगाड़ से हुई 21 डॉक्टरों की तैनाती में पांच नदारद मिले। एनएनएम, वार्ड बॉय, फार्मासिस्ट, तकनीशियन आदि पदों पर रेगुलर स्टाफ नहीं है। संविदा पर सीएचसी-पीएचसी से कर्मी व नर्स लगाई गई हैं। 
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मंडलीय अस्पताल का 7 अगस्त को मुख्यमंत्री ने लखमनऊ से लोकार्पण किया था। मगर अभी तक न तो सुविधाएं हैं। न ही मानक के मुताबिक स्टाफ तैनात हो पाए हैं। बुधवार को अस्पताल बदहाल मिला। 245 मरीजों की ओपीडी हुई।
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पूरे काशीनाथ निवासी गंगाराम को गठिया है। गाउट जांच के लिए कोई सुविधा नहीं होने से दवा लेकर चले गए। सराय रासी के विजय बहादुर को इंफेक्शन था। ब्लड की जांच हुए बगैर दवाएं दे दी गईं।

कुसमहां की प्रियंका गुप्ता को पेट में बच्चा है, लेकिन बगैर जांच दवा दे टाल दिया गया। राजेश मौर्य को बुखार है। उन्हें भी बगैर जांच दवा दे दी गई। ऑपरेशन के लिए मात्र दो मरीज आए।

इसमें फाइलेरिया से पीड़ित भरतकुंड निवासी राकेश का हाईड्रोसील का ऑपरेशन डा. वसी हैदर ने किया। बेलगरा के निवासी रामसुंदर के मुंह में छाला पकने से डॉ. वसी हैदर ने डेंटिस्ट डॉ. मंयक पांडेय के साथ छोटा ऑपरेशन किया।

मामला हाईकोर्ट में होने से डॉक्टर खुल कर कुछ नहीं कहते, मगर अस्पताल में जांच सेवाएं ताले में बंद होने स्टाफ की कमी, ऑपरेशन थियेटर आदि की समस्याएं उनको काम करने नहीं दे रही है।

हाल यह है कि अस्पताल आने वाले मरीजों को मूलभूत सुविधाएं नहीं है। अस्पताल में न तो जांच की सुविधा है और न ही रात्रि में गंभीर मरीजों की भर्ती करने की सुविधा है।

अस्पताल का स्टाफ के रुकने की भी कोई व्यवस्था नहीं है। अस्पताल में सात सिस्टर का पद सृजित हैं, लेकिन एक भी सिस्टर की तैनाती नहीं हुई हैं। दो मैट्रन का पद भी खाली है।

स्टाफ नर्स, वार्ड आया/वार्ड बॉय और सफाई कर्मचारी ठेके पर लिए जाएंगे। अभी तक शासन से एक सेवा प्रदात कंपनी को ठेका नहीं दिया गया, ऐसे में सफाई कार्य भी स्थानीय स्तर पर किसी प्रकार से चलाया जा रहा है।  

मंडलीय अस्पताल में कब कौन नदारद हो जाए, इसका हिसाब लेने वाला कोई नहीं है। बुधवार को सर्जन डॉ. विपिन कुमार अनुपस्थित पाए गए वह देवकाली पर रहते हैं। फिर भी अस्पताल नहीं पहुंचे।

इसके अलावा डॉ. एके सिन्हा, डॉ. सूर्य प्रकाश, डॉ. वेद प्रकाश और डॉ. राजेश दुबे अनुपस्थित रहे। पूछने पर पता चला कि डॉ. राजेश जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की ट्रेनिंग ले रहे हैं। और कौन कहां है पता नहीं। अस्पताल में 245 मरीजों का रजिस्ट्रेशन किया गया, जिनका ओपीडी में इलाज किया गया।

अस्पताल में दो दिनों से अल्ट्रासाउंड की जांच हो रही है। श्रीराम चिकित्सालय के डॉ. के कुमार को अल्ट्रासाउंड के लिए मंडलीय चिकित्सालय में तैनात किया गया है।

जबकि श्री राम अस्पताल में अल्ट्रासाउंड खराब बताया जा रहा है। डॉ. कहते हैं कि वहां कोई काम नहीं था, लिहाजा सीएमओ ने यहां तैनात कर दिया है। यहां बुधवार छह अल्ट्रासाउंड हुए हैं।

जनहित याचिका करने वाले कुढाकेशवपुर निवासी मुरलीधर चतुर्वेदी का कहना है कि गुरुवार को हाईकोर्ट में सुनवाई तय हो गई है। कमीशन ने हाईकोर्ट में अपनी रिपोर्ट दे दी है। इसकी वीडियो व फोटोग्रॉफी भी कोर्ट में दी गई है।



सीएमओ डॉ. राधेश्याम यादव ने बताया कि मंडलीय अस्पताल में मानक के मुताबिक डॉक्टरों समेत स्टाफ की तैनाती को लेकर शासन को पूरी रिपोर्ट भेज दी गई है। जितने भी स्टाफ कम होंगे, उन्हें अब शासन स्तर से तैनात किया जाएगा।
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