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किसानों ने रोका पेपर मिल का गंदा पानी
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 21 Jul 2018 12:03 AM IST
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अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करते किसान
- फोटो : अमर उजाला
यश पेपर मिल समेत आसपास के गांवों की जलनिकासी के लिए वर्षों पुराने नाले को लेकर शुक्रवार को विवाद गहरा गया। राजेपुर प्रधान के नेतृत्व में शुक्रवार को ग्रामीणों ने मिल के गंदे पानी से फसल की बर्बादी का आरोप लगाते हुए नाले को बांध दिया। कहा कि यह नाला उनकी भूमिधरी में बहता है। मिल या तो अधिग्रहण की तय दरों पर जमीन खरीदे या हर साल बर्बाद होने वाली फसलों का मुआवजा दे।
किसानों के विरोध की सूचना पर एसडीएम सदर मधुसूदन नागराज हुलगी व सीओ अयोध्या राजू साव समेत राजस्व अधिकारियों ने भारी फोर्स के साथ मौके पर पहुंचकर नाला को खोलवा दिया। विरोध कर रहे ग्रामीणों को बल पूर्वक वहां से हटा दिया। ग्रामीणों का कहना है कि 1980 में यश पेपर मिल के स्थापित होने के बाद से ही मिल के गंदे व दूषित पानी के चलते आसपास के कई गांवों के किसान खेती नहीं कर पा रहे हैं।
गांव राजेपुर के किसान प्रमोद सिंह, राधिका सिंह, गयादीन यादव, खन्नू यादव, गज्जू सिंह, विनोद सिंह, उमेश सिंह, भानु प्रताप सिंह का कहना है कि उनके गांव के करीब 65 किसानों के खेतों में वर्ष भर मिल का गंदा पानी भरा रहता है। जिसके चलते कोई फसल बोई ही नहीं जाती। उनका कहना है कि ये पानी चार गांव सरायरासी, रमपुरवा, तिहुरा, राजेपुर व मूडाडीहा होकर सरयू नदी में जाती है।
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इसके लिए वर्षों पूर्व नालियां बनवाई गई थी जो टूट चुकी हैं। इसके चलते ये दूषित पानी उनके खेतों में भर जाता है। प्रधान प्रतिनिधि राजप्रताप सिंह का कहना है कि समस्या के स्थायी हल के लिए या तो मिल प्रबंधन सरकारी रेट पर उनकी जमीन खरीद ले, नहीं तो उनके साल भर की खेती का उचित मुआवजा दे। पीड़ित किसानों ने चेतावनी दी कि यदि अब सरकार ने समस्या का समाधान नहीं किया तो वो सामूहिक आत्मदाह कर लेंगे।
कहा कि हाल में प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, पर्यावरण मंत्री व जल संसाधन मंत्री, एनजीटी से लेकर जिले व प्रदेश के आला अधिकारियों के पास शिकायत भी की गई लेकिन समस्या का कोई हल नहीं निकल पाया। सीओ अयोध्या राजू साव ने कहा कि पेपर मिल से निकलकर सरयू नदी में जाने पानी के लिए बने नाले को कुछ लोगों ने पाट दिया था, मिल प्रबंधन की शिकायत पर एसडीएम के साथ जाकर उसे खुलवा दिया गया है।
नाला वर्षों पुराना, मिल समेत गांवों का जाता है पानी : प्रबंधन
मिल की स्थापना होने के सालों पूर्व ही नाला बना है। इससे होकर मिल के साथ गांववालों का गंदा पानी नदी में जाता है। मिल से दूषित पानी नहीं छोड़ा जाता है। पानी ट्रीटमेंट होकर नाले से नदी में जाता है। ट्रीटमेंट प्लांट नियमों के तहत लगा है। जिसकी साल में कई बार जांच होती है। आजतक कभी भी प्रदूषित पानी नदी में जाने की बात सामने नहीं आई है। नाले को कुछ लोगों ने मिट्टी डालकर पाट दिया था, ये जिम्मेदारी प्रशासन की है कि नाला से पानी का बहाव होता रहे।- गौतम घोष, सीनियर मैनेजर, यश पेपर मिल
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किसानों के विरोध की सूचना पर एसडीएम सदर मधुसूदन नागराज हुलगी व सीओ अयोध्या राजू साव समेत राजस्व अधिकारियों ने भारी फोर्स के साथ मौके पर पहुंचकर नाला को खोलवा दिया। विरोध कर रहे ग्रामीणों को बल पूर्वक वहां से हटा दिया। ग्रामीणों का कहना है कि 1980 में यश पेपर मिल के स्थापित होने के बाद से ही मिल के गंदे व दूषित पानी के चलते आसपास के कई गांवों के किसान खेती नहीं कर पा रहे हैं।
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गांव राजेपुर के किसान प्रमोद सिंह, राधिका सिंह, गयादीन यादव, खन्नू यादव, गज्जू सिंह, विनोद सिंह, उमेश सिंह, भानु प्रताप सिंह का कहना है कि उनके गांव के करीब 65 किसानों के खेतों में वर्ष भर मिल का गंदा पानी भरा रहता है। जिसके चलते कोई फसल बोई ही नहीं जाती। उनका कहना है कि ये पानी चार गांव सरायरासी, रमपुरवा, तिहुरा, राजेपुर व मूडाडीहा होकर सरयू नदी में जाती है।
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इसके लिए वर्षों पूर्व नालियां बनवाई गई थी जो टूट चुकी हैं। इसके चलते ये दूषित पानी उनके खेतों में भर जाता है। प्रधान प्रतिनिधि राजप्रताप सिंह का कहना है कि समस्या के स्थायी हल के लिए या तो मिल प्रबंधन सरकारी रेट पर उनकी जमीन खरीद ले, नहीं तो उनके साल भर की खेती का उचित मुआवजा दे। पीड़ित किसानों ने चेतावनी दी कि यदि अब सरकार ने समस्या का समाधान नहीं किया तो वो सामूहिक आत्मदाह कर लेंगे।
कहा कि हाल में प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, पर्यावरण मंत्री व जल संसाधन मंत्री, एनजीटी से लेकर जिले व प्रदेश के आला अधिकारियों के पास शिकायत भी की गई लेकिन समस्या का कोई हल नहीं निकल पाया। सीओ अयोध्या राजू साव ने कहा कि पेपर मिल से निकलकर सरयू नदी में जाने पानी के लिए बने नाले को कुछ लोगों ने पाट दिया था, मिल प्रबंधन की शिकायत पर एसडीएम के साथ जाकर उसे खुलवा दिया गया है।
नाला वर्षों पुराना, मिल समेत गांवों का जाता है पानी : प्रबंधन
मिल की स्थापना होने के सालों पूर्व ही नाला बना है। इससे होकर मिल के साथ गांववालों का गंदा पानी नदी में जाता है। मिल से दूषित पानी नहीं छोड़ा जाता है। पानी ट्रीटमेंट होकर नाले से नदी में जाता है। ट्रीटमेंट प्लांट नियमों के तहत लगा है। जिसकी साल में कई बार जांच होती है। आजतक कभी भी प्रदूषित पानी नदी में जाने की बात सामने नहीं आई है। नाले को कुछ लोगों ने मिट्टी डालकर पाट दिया था, ये जिम्मेदारी प्रशासन की है कि नाला से पानी का बहाव होता रहे।- गौतम घोष, सीनियर मैनेजर, यश पेपर मिल