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कंबल बंटे न जले अलाव, रैन बसेरे बदहाल
फैजाबाद
Updated Tue, 06 Dec 2016 11:11 PM IST
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रोडवेज स्थित रैनबसेरे में ठंड और गलन के बीच राख में आंच तलाशते यात्री ।
- फोटो : अमर उजाला
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पहाड़ों पर होती बर्फबारी को गलन भरी पछुआ हवा मैदानों तक पहुंचा रही है। इसकी वजह से आमजन नश्तर चुभोती हवा से बेहाल हैं। जिले का पारा सामान्य से तीन डिग्री नीचे लुढ़क गया है।
जिले की ओर से सभी पांचों तहसीलों में कंबल वितरण और चौराहों तहसीलों में अलाव जलवाने की तैयारी हो रही है तो नगर पालिका की ओर से अलाव जलवाने के लिए टेंडर हुआ है। कंबल वितरण पर पालिका को बोर्ड बैठक बुलाने और इस बारे में फैसला होने का इंतजार है।
लोग जगह-जगह खुद के जुगाड़ से शरीर में गर्मी लाने का उपाय कर रहे हैं। इसके बावजूद ठंड-गलन लोगों के हांड़ कंपा दे रही है। नगर में कुछ स्थानों पर मंगलवार की सुबह व शाम लोग वाहनों के टायर, जला मोबिल, गत्ता, लकड़ी जलाकर लोग अपने को सेंकते नजर आए। दुकानों, गोदामों, रेलवे स्टेशनों पर काम करते मजदूरों, सवारियां बैठाकर एक छोर से दूसरे छोर तक भागदौड़ करते रिक्शावानों के लिए गलनभरी ठंड काफी कष्टकारी है।
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नगर रिक्शा चला रहे मसौधा के रामचंद्र, अमानीगंज के धर्मदास, सोहावल के कप्तान, रुदौली के गंगाराम का कहना था कि उन्हें न तो कंबल तो मिला और प्रमुख चौराहों पर अलाव भी नहीं जल रहे हैं।
कुछ दुकानों के सामने अलाव जरूर जले, लेकिन क्या इससे उनकी ठंड दूर हो रही है? रिक्शा चलाते समय कंबल ओढ़ा जा सकता है, लेकिन अब तक बंटा ही नहीं है। वह कांपते हुए अपने घरों को वापस होते हैं। रिक्शा मालिक के टिनशेड में ठंड में रातें कटना भी मुश्किलों भरा हो जाता है।
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जिले की ओर से सभी पांचों तहसीलों में कंबल वितरण और चौराहों तहसीलों में अलाव जलवाने की तैयारी हो रही है तो नगर पालिका की ओर से अलाव जलवाने के लिए टेंडर हुआ है। कंबल वितरण पर पालिका को बोर्ड बैठक बुलाने और इस बारे में फैसला होने का इंतजार है।
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लोग जगह-जगह खुद के जुगाड़ से शरीर में गर्मी लाने का उपाय कर रहे हैं। इसके बावजूद ठंड-गलन लोगों के हांड़ कंपा दे रही है। नगर में कुछ स्थानों पर मंगलवार की सुबह व शाम लोग वाहनों के टायर, जला मोबिल, गत्ता, लकड़ी जलाकर लोग अपने को सेंकते नजर आए। दुकानों, गोदामों, रेलवे स्टेशनों पर काम करते मजदूरों, सवारियां बैठाकर एक छोर से दूसरे छोर तक भागदौड़ करते रिक्शावानों के लिए गलनभरी ठंड काफी कष्टकारी है।
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नगर रिक्शा चला रहे मसौधा के रामचंद्र, अमानीगंज के धर्मदास, सोहावल के कप्तान, रुदौली के गंगाराम का कहना था कि उन्हें न तो कंबल तो मिला और प्रमुख चौराहों पर अलाव भी नहीं जल रहे हैं।
कुछ दुकानों के सामने अलाव जरूर जले, लेकिन क्या इससे उनकी ठंड दूर हो रही है? रिक्शा चलाते समय कंबल ओढ़ा जा सकता है, लेकिन अब तक बंटा ही नहीं है। वह कांपते हुए अपने घरों को वापस होते हैं। रिक्शा मालिक के टिनशेड में ठंड में रातें कटना भी मुश्किलों भरा हो जाता है।