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भारत को आत्मनिर्भर बनाने में सहायक होगी नई शिक्षा नीति : प्रो. रविशंकर सिंह
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अयोध्या। देश की नई शिक्षा नीति इस बात का प्रमाण है कि पूर्व की जो शिक्षा नीतियां थीं, वे जन आकांक्षाओं का पूरा नहीं कर पाईं हैं। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि नई शिक्षा नीति भारत को आत्मनिर्भर बनाने में सहायक होगी। भारत का युवा अत्यधिक ऊर्जावान व प्रतिभाशाली हैं। इस बात में कोई संदेह नहीं है कि नई शिक्षा नीति इसे शत-प्रतिशत उपयोग करने में सक्षम होगी।
नई शिक्षा नीति में प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक शोध को वरीयता प्रदान की गई है। इसमें अपार संभावनाओं के साथ ही कुछ चुनौतियां भी हैं। ये बातें डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के आईक्यूएसी एवं इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी के संयुक्त संयोजन में ‘नई शिक्षा नीति: एक व्यापक विमर्श’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय वेबिनार में कुलपति प्रो. रविशंकर सिंह ने कहीं।
वेबिनार के मुख्य अतिथि व पूर्व कुलपति राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर के प्रो. जेपी सिंघल ने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति मात्र एक दस्तावेज नहीं है बल्कि भारत की एक दृष्टि है। उन्होंने कहा कि पूर्व की तुलना में आधुनिक समाज में कई परिवर्तन आये परिणामस्वरूप पूर्व की शिक्षा नीतियां आधुनिक समाज के साथ सामंजस्य स्थापित नहीं कर पा रहीं थीं। ऐसे में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति का अस्तित्व में आना स्वाभाविक था। इस शिक्षा नीति भारतीयता की संपूर्ण झलक मिलती है।
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विशिष्ट अतिथि के रूप में मुंबई विश्वविद्यालय पूर्व कुलपति प्रो. संजय देशमुख ने कहा कि हमारे देश में गुरुकुल की परंपरा थी, उसे आज हम फिर से दोहराना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य मात्र रोजगार उपलब्ध कराना नहीं होना चाहिए। बल्कि विद्यार्थियों का चरित्र निर्माण भी होना चाहिए। नई शिक्षा नीति में इस तथ्य का ध्यान रखा गया है।
राज ऋषि भर्तहरी मत्स्य विश्वविद्यालय अलवर के प्रो. जेपी यादव ने कहा कि नई शिक्षा नीति में कई बड़े बदलाव किये गये है। अन्वेषण, तार्किकता, नैतिकता, चरित्र निर्माण के साथ ही भारतीय मूल्यों से जुड़ी शिक्षा, विश्व कल्याण, राष्ट्र निर्माण, डिजिटल शिक्षा पर बल सहित अन्य तथ्यों को प्राथमिकता दी गई है। टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज, मुंबई के पूर्व निदेशक प्रो. अब्दुल शाह ने कहा कि नई शिक्षा नीति दूरगामी परिणाम देने वाली नीति है। परंतु बहुत कुछ इसे लागू करने की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
उन्होंने कहा कि देश की शिक्षा पद्धति विकास को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती है और आधुनिक युग में विकास काफी हद तक उच्च शिक्षा पर निर्भर करता है। ऐसे में शिक्षा गुणवत्तापरक होनी चाहिए। वेबिनार के संयोजक प्रो. एसएन शुक्ल ने बताया कि देश की नई शिक्षा नीति को जन-जन तक पहुंचाने के लिए विश्वविद्यालय के कुलपति के मार्गदर्शन में इस तरह के आयोजन कर अधिक से अधिक लोगों का जागरूक किया जा रहा है। कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना से किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. गीतिका श्रीवास्तव ने किया।
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नई शिक्षा नीति में प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक शोध को वरीयता प्रदान की गई है। इसमें अपार संभावनाओं के साथ ही कुछ चुनौतियां भी हैं। ये बातें डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के आईक्यूएसी एवं इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी के संयुक्त संयोजन में ‘नई शिक्षा नीति: एक व्यापक विमर्श’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय वेबिनार में कुलपति प्रो. रविशंकर सिंह ने कहीं।
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वेबिनार के मुख्य अतिथि व पूर्व कुलपति राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर के प्रो. जेपी सिंघल ने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति मात्र एक दस्तावेज नहीं है बल्कि भारत की एक दृष्टि है। उन्होंने कहा कि पूर्व की तुलना में आधुनिक समाज में कई परिवर्तन आये परिणामस्वरूप पूर्व की शिक्षा नीतियां आधुनिक समाज के साथ सामंजस्य स्थापित नहीं कर पा रहीं थीं। ऐसे में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति का अस्तित्व में आना स्वाभाविक था। इस शिक्षा नीति भारतीयता की संपूर्ण झलक मिलती है।
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विशिष्ट अतिथि के रूप में मुंबई विश्वविद्यालय पूर्व कुलपति प्रो. संजय देशमुख ने कहा कि हमारे देश में गुरुकुल की परंपरा थी, उसे आज हम फिर से दोहराना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य मात्र रोजगार उपलब्ध कराना नहीं होना चाहिए। बल्कि विद्यार्थियों का चरित्र निर्माण भी होना चाहिए। नई शिक्षा नीति में इस तथ्य का ध्यान रखा गया है।
राज ऋषि भर्तहरी मत्स्य विश्वविद्यालय अलवर के प्रो. जेपी यादव ने कहा कि नई शिक्षा नीति में कई बड़े बदलाव किये गये है। अन्वेषण, तार्किकता, नैतिकता, चरित्र निर्माण के साथ ही भारतीय मूल्यों से जुड़ी शिक्षा, विश्व कल्याण, राष्ट्र निर्माण, डिजिटल शिक्षा पर बल सहित अन्य तथ्यों को प्राथमिकता दी गई है। टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज, मुंबई के पूर्व निदेशक प्रो. अब्दुल शाह ने कहा कि नई शिक्षा नीति दूरगामी परिणाम देने वाली नीति है। परंतु बहुत कुछ इसे लागू करने की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
उन्होंने कहा कि देश की शिक्षा पद्धति विकास को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती है और आधुनिक युग में विकास काफी हद तक उच्च शिक्षा पर निर्भर करता है। ऐसे में शिक्षा गुणवत्तापरक होनी चाहिए। वेबिनार के संयोजक प्रो. एसएन शुक्ल ने बताया कि देश की नई शिक्षा नीति को जन-जन तक पहुंचाने के लिए विश्वविद्यालय के कुलपति के मार्गदर्शन में इस तरह के आयोजन कर अधिक से अधिक लोगों का जागरूक किया जा रहा है। कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना से किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. गीतिका श्रीवास्तव ने किया।