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नरेंद्रदेव विश्वविद्यालय में उपकरण खरीद में घोटाला
अमर उजाला ब्यूरो/फैजाबाद
Updated Thu, 24 Mar 2016 11:42 PM IST
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- फोटो : demo pic
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नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कुमारगंज को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद से मिलने वाली केंद्रीय सहायता की आधी राशि 1.84 करोड़ रुपये वापस करनी पड़ी है। इसके पीछे विभागाध्यक्षों, वैज्ञानिकों व अधिकारियों का कॉकस जिम्मेदार ठहराया गया है।
उपकरणों की खरीद संबंधी कोटेशनों की जांच में लाखों की गड़बड़ी सामने आने के बाद संशोधित दरों पर खरीद में जानबूझकर लापरवाही पकड़ी गई है। जिस स्पेक्ट्रो फोटोमीटर की कीमत 80 लाख दर्शाई गई थी, उसकी असली कीमत जांच में 32 लाख रुपये तक ही पाई गई।
जबकि रसायनों व अन्य लैब उपकरणों में कोटेशन की दर से 46 फीसदी तक कंपनी छूट देने को तैयार थी। एनडी कृषि विवि को वर्ष 2015-16 में अनुसंधान परिषद से करीब पौने चार करोड़ की केंद्रीय सहायता दी गई थी। बजट की यह राशि अलॉट हो गई थी।
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इस रकम से राष्ट्रीय कृषि विकास परियोजना के अंतर्गत विवि के पशु चिकित्सा विज्ञान एवं पशुपालन महाविद्यालय में संचालित परियोजना में जीसीएमएस मास स्पेक्ट्रो फोटोमीटर एवं एटोमिक एक्जाक्शन स्पेक्ट्रो फोटोमीटर प्रयोगशाला के लिए क्रय किए जाने थे। खरीद के लिए विभाग द्वारा चलाई गई पत्रावली में 80 लाख रुपये की दर दिखाई गई थी।
मामले में विवि के कुलपति प्रो. अख्तर हसीब ने सीधे संबंधित कंपनी से बातचीत की तो उपकरण को जापान की सीमाट्जू कंपनी ने लगभग 60 प्रतिशत डिस्काउंट यानी करीब 32 लाख पर विवि को आपूर्ति करने की सहमति प्रदान की।
साथ ही अन्य प्रयोगशाला उपकरणों व रसायनों के क्रय पर 5 से 10 प्रतिशत डिस्काउंट देने वाली फर्मों ने 46 प्रतिशत डिस्काउंट पर आपूर्ति करने की सहमति प्रदान की। मामले में कुलपति ने डिस्काउंट घटाकर संशोधित दर पर क्रय करने की अनुमति प्रदान की तो, विवि के वैज्ञानिकों व अधिकारियों द्वारा इस तरह की क्रय प्रक्रिया में अरुचि दिखाते हुए केंद्रीय सहायता में प्राप्त बजट व्यय नहीं किया।
कुलपति प्रो. अख्तर हसीब का कहना है कि जिम्मेदारों ने खरीद में रुचि में नहीं ली, जिससे 1.84 करोड़ वापस करना पड़ रहा है।
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उपकरणों की खरीद संबंधी कोटेशनों की जांच में लाखों की गड़बड़ी सामने आने के बाद संशोधित दरों पर खरीद में जानबूझकर लापरवाही पकड़ी गई है। जिस स्पेक्ट्रो फोटोमीटर की कीमत 80 लाख दर्शाई गई थी, उसकी असली कीमत जांच में 32 लाख रुपये तक ही पाई गई।
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जबकि रसायनों व अन्य लैब उपकरणों में कोटेशन की दर से 46 फीसदी तक कंपनी छूट देने को तैयार थी। एनडी कृषि विवि को वर्ष 2015-16 में अनुसंधान परिषद से करीब पौने चार करोड़ की केंद्रीय सहायता दी गई थी। बजट की यह राशि अलॉट हो गई थी।
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इस रकम से राष्ट्रीय कृषि विकास परियोजना के अंतर्गत विवि के पशु चिकित्सा विज्ञान एवं पशुपालन महाविद्यालय में संचालित परियोजना में जीसीएमएस मास स्पेक्ट्रो फोटोमीटर एवं एटोमिक एक्जाक्शन स्पेक्ट्रो फोटोमीटर प्रयोगशाला के लिए क्रय किए जाने थे। खरीद के लिए विभाग द्वारा चलाई गई पत्रावली में 80 लाख रुपये की दर दिखाई गई थी।
मामले में विवि के कुलपति प्रो. अख्तर हसीब ने सीधे संबंधित कंपनी से बातचीत की तो उपकरण को जापान की सीमाट्जू कंपनी ने लगभग 60 प्रतिशत डिस्काउंट यानी करीब 32 लाख पर विवि को आपूर्ति करने की सहमति प्रदान की।
साथ ही अन्य प्रयोगशाला उपकरणों व रसायनों के क्रय पर 5 से 10 प्रतिशत डिस्काउंट देने वाली फर्मों ने 46 प्रतिशत डिस्काउंट पर आपूर्ति करने की सहमति प्रदान की। मामले में कुलपति ने डिस्काउंट घटाकर संशोधित दर पर क्रय करने की अनुमति प्रदान की तो, विवि के वैज्ञानिकों व अधिकारियों द्वारा इस तरह की क्रय प्रक्रिया में अरुचि दिखाते हुए केंद्रीय सहायता में प्राप्त बजट व्यय नहीं किया।
कुलपति प्रो. अख्तर हसीब का कहना है कि जिम्मेदारों ने खरीद में रुचि में नहीं ली, जिससे 1.84 करोड़ वापस करना पड़ रहा है।