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Ayodhya News: उत्सवी माहौल में समर्पित की गई शालिग्राम शिला
Fri, 03 Feb 2023 09:34 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Fri, 03 Feb 2023 09:34 AM IST
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15-रामसेवकपुरम में बहस्पतिवार को शालिग्राम शिला का पूजन करते नेपाल जानकी मंदिर के महंत व राममंद
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अयोध्या। शालिग्राम देवताभ्यं नम:.. ऊं श्री विष्णुवे नम:...पार्वती पतये नम:...जैसे वैदिक मंत्रों के बीच नेपाल की काली गंडकी नदी से आईं दो देवशिलाएं बृहस्पतिवार को राममंदिर ट्रस्ट को समर्पित की गईं।
इससे पहले सुबह 10:30 बजे रामसेवकपुरम में शिलाओं का 51 वैदिक आचार्यों ने विधि-विधान से पूजन किया। यजमान की भूमिका में नेपाल के पूर्व उपप्रधानमंत्री विमलेंद्र निधि व जनकपुर मंदिर के महंत राम तपेश्वर दास रहे। उन्होंने ट्रस्ट को शिलाओं का समर्पण पत्र भी सौंपा।
बृहस्पतिवार को पूरे रामसेवकपुरम परिसर में उत्सवी माहौल था। चहुंओर राम धुन और जयघोष गूंज रहा था। जहां शिला रखी थी उस स्थल को फूलों से सजाया गया था और भगवा ध्वज भी सुंदरता बढ़ा रहे थे।
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कार्यक्रम स्थल पर लगाए गए नेपाल व भारत के राष्ट्रीय ध्वज दोनों देशों के समृद्ध संबंधों की भी गवाही दे रहे थे। इन सबके बीच श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने नेपाल से आए अतिथियों का अभिनंदन किया।
शिला समर्पण समारोह संक्षिप्त सभा के रूप में भी बदला और वक्ताओं ने इस अवसर को नेपाल और अयोध्या के प्राचीन संबंधों को नया तेवर एवं कलेवर प्रदान करने वाला बताया। जानकी मंदिर के महंत राम तपेश्वर दास ने दूल्हा-दुल्हन सरकार की जय... के जयकारे लगाकर अयोध्या और नेपाल के त्रेता युग के संबंधों को पुनर्जीवित किया।
ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय ने शिला समर्पित करने के लिए जनकपुर मंदिर, नेपाल सरकार के प्रति आभार जताया। शिला का स्वागत करने के लिए इस दौरान बड़ी संख्या में साधु-संत और अयोध्यावासी मौजूद रहे।
इनमें महंत रामकुमार दास, महंत गिरीशपति त्रिपाठी, महंत अवध किशोर शरण, जगद्गुरु परमहंस आचार्य, गुरुद्वारा ब्रह्मकुंड के मुख्य ग्रंथी ज्ञानी गुरु जीत सिंह, पुजारी रमेश दास, राममंदिर के ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास, डॉ.अनिल मिश्र, कामेश्वर चौपाल, शिलाग्राम यात्रा लेकर आए विहिप के राजेंद्र सिंह पंकज, विधायक रामचंद्र यादव, कारसेवक पुरम के प्रभारी शिवदास सिंह समेत अन्य लोग शामिल रहे।
काेई नतमस्तक तो कोई ले रहा था सेल्फी
नेपाल से रामलला की मूर्ति के दर्शन की होड़ मची रही। कोई उसके आगे नतमस्तक हो रहा था, कोई उस पर टीका लगा रहा था, तो कोई शिलाओं के साथ सेल्फी ले रहा था। कई महिलाएं तो शिला का दर्शन कर भावविभोर थीं और उनकी आंखे छलक उठीं। राममंदिर समर्थक रहे बबलू खान भी शिला का दर्शन करने पहुंचे थे। हर तरफ शिला काे प्रणाम करके उस पर रामनाम लिखने की होड़ लगी रही।
दो साल से चल रही थी ट्रस्ट से वार्ता : विमलेंद्र
नेपाल के पूर्व उप प्रधानमंत्री विमलेंद्र निधि ने बताया कि रामजन्मभूमि ट्रस्ट से राममंदिर में एक धनुष देने की इच्छा से वार्ता शुरू हुई थी। लगभग दो साल विचार-विमर्श हुआ। दोनों देशों के बीच पत्राचार भी किया गया। इस बीच ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से मुलाकात के बाद शिला की चर्चा शुुरू हुई।
ट्रस्ट ने इच्छा जाहिर की थी कि नेेपाल की काली गंडकी की शिला यहां लाई जाऐ। ये शिला भगवान विष्णु का स्वरूप मानी जाती है और भगवान श्रीराम भी विष्णु के ही अवतार माने जाते हैं, इसलिए शिला वहीं की हो। इसी शिला से रामलला की मूर्ति बने। इस प्रस्ताव को नेपाल सरकार ने स्वीकार कर लिया।
मानस पर अंगुली उठाने वालों को श्रीराम दिखाएं सद्बुद्धि
जानकी मंदिर नेपाल के महंत रामतपेश्वर दास ने धर्मग्रंथों पर सवाल खड़ा करने वालों पर निशाना साधा। उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य को निशाने पर लेते हुए कहा कि जो लोग रामचरित मानस पर अंगुली उठा रहे हैं, ऐसे लोगों को भगवान श्रीराम व बजरंग बली सद्बुद्धि दें, हमारी यही कामना है।
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इससे पहले सुबह 10:30 बजे रामसेवकपुरम में शिलाओं का 51 वैदिक आचार्यों ने विधि-विधान से पूजन किया। यजमान की भूमिका में नेपाल के पूर्व उपप्रधानमंत्री विमलेंद्र निधि व जनकपुर मंदिर के महंत राम तपेश्वर दास रहे। उन्होंने ट्रस्ट को शिलाओं का समर्पण पत्र भी सौंपा।
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बृहस्पतिवार को पूरे रामसेवकपुरम परिसर में उत्सवी माहौल था। चहुंओर राम धुन और जयघोष गूंज रहा था। जहां शिला रखी थी उस स्थल को फूलों से सजाया गया था और भगवा ध्वज भी सुंदरता बढ़ा रहे थे।
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कार्यक्रम स्थल पर लगाए गए नेपाल व भारत के राष्ट्रीय ध्वज दोनों देशों के समृद्ध संबंधों की भी गवाही दे रहे थे। इन सबके बीच श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने नेपाल से आए अतिथियों का अभिनंदन किया।
शिला समर्पण समारोह संक्षिप्त सभा के रूप में भी बदला और वक्ताओं ने इस अवसर को नेपाल और अयोध्या के प्राचीन संबंधों को नया तेवर एवं कलेवर प्रदान करने वाला बताया। जानकी मंदिर के महंत राम तपेश्वर दास ने दूल्हा-दुल्हन सरकार की जय... के जयकारे लगाकर अयोध्या और नेपाल के त्रेता युग के संबंधों को पुनर्जीवित किया।
ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय ने शिला समर्पित करने के लिए जनकपुर मंदिर, नेपाल सरकार के प्रति आभार जताया। शिला का स्वागत करने के लिए इस दौरान बड़ी संख्या में साधु-संत और अयोध्यावासी मौजूद रहे।
इनमें महंत रामकुमार दास, महंत गिरीशपति त्रिपाठी, महंत अवध किशोर शरण, जगद्गुरु परमहंस आचार्य, गुरुद्वारा ब्रह्मकुंड के मुख्य ग्रंथी ज्ञानी गुरु जीत सिंह, पुजारी रमेश दास, राममंदिर के ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास, डॉ.अनिल मिश्र, कामेश्वर चौपाल, शिलाग्राम यात्रा लेकर आए विहिप के राजेंद्र सिंह पंकज, विधायक रामचंद्र यादव, कारसेवक पुरम के प्रभारी शिवदास सिंह समेत अन्य लोग शामिल रहे।
काेई नतमस्तक तो कोई ले रहा था सेल्फी
नेपाल से रामलला की मूर्ति के दर्शन की होड़ मची रही। कोई उसके आगे नतमस्तक हो रहा था, कोई उस पर टीका लगा रहा था, तो कोई शिलाओं के साथ सेल्फी ले रहा था। कई महिलाएं तो शिला का दर्शन कर भावविभोर थीं और उनकी आंखे छलक उठीं। राममंदिर समर्थक रहे बबलू खान भी शिला का दर्शन करने पहुंचे थे। हर तरफ शिला काे प्रणाम करके उस पर रामनाम लिखने की होड़ लगी रही।
दो साल से चल रही थी ट्रस्ट से वार्ता : विमलेंद्र
नेपाल के पूर्व उप प्रधानमंत्री विमलेंद्र निधि ने बताया कि रामजन्मभूमि ट्रस्ट से राममंदिर में एक धनुष देने की इच्छा से वार्ता शुरू हुई थी। लगभग दो साल विचार-विमर्श हुआ। दोनों देशों के बीच पत्राचार भी किया गया। इस बीच ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से मुलाकात के बाद शिला की चर्चा शुुरू हुई।
ट्रस्ट ने इच्छा जाहिर की थी कि नेेपाल की काली गंडकी की शिला यहां लाई जाऐ। ये शिला भगवान विष्णु का स्वरूप मानी जाती है और भगवान श्रीराम भी विष्णु के ही अवतार माने जाते हैं, इसलिए शिला वहीं की हो। इसी शिला से रामलला की मूर्ति बने। इस प्रस्ताव को नेपाल सरकार ने स्वीकार कर लिया।
मानस पर अंगुली उठाने वालों को श्रीराम दिखाएं सद्बुद्धि
जानकी मंदिर नेपाल के महंत रामतपेश्वर दास ने धर्मग्रंथों पर सवाल खड़ा करने वालों पर निशाना साधा। उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य को निशाने पर लेते हुए कहा कि जो लोग रामचरित मानस पर अंगुली उठा रहे हैं, ऐसे लोगों को भगवान श्रीराम व बजरंग बली सद्बुद्धि दें, हमारी यही कामना है।

15-रामसेवकपुरम में बहस्पतिवार को शालिग्राम शिला का पूजन करते नेपाल जानकी मंदिर के महंत व राममंद