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Ayodhya News: निजी को छोड़िए, सरकारी अस्पताल भी अवैध
Mon, 20 Nov 2023 11:58 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Mon, 20 Nov 2023 11:58 PM IST
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सतीश पाठक
अयोध्या। जिले के निजी अस्पतालों के अवैध या वैध होने का चक्कर छोडि़ए। यहां के तीन बड़े सरकारी अस्पताल भी अवैध रूप से चल रहे हैं। यहां आग से बचाव के इंतजाम न हो पाने से फायर एनओसी नहीं मिल सकी है। कागजी कोरम पूरा न होने पर शासन की प्राथमिकता में शामिल क्लीनिकल स्टेब्लिशमेंट पोर्टल पर इनका पंजीकरण भी आसान प्रतीत नहीं हो रहा है।
राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज में वर्ष 2019 से तीन सौ बेड का अस्पताल संचालित है। उप्र राजकीय निर्माण निगम ने इस भवन का निर्माण किया था। भवन हैंडओवर हुआ, लेकिन आग से बचाव के इंतजाम नहीं हो सके। मई में तत्कालीन प्राचार्य ने स्वयं फायर ऑडिट कराया तो तमाम खामियां सामने आई थीं। अब तक दूर नहीं किया जा सका। इस वजह से फायर एनओसी लंबित है।
212 बेड के जिला अस्पताल में भी यही हालात हैं। यहां वर्ष 2021 से ही करीब डेढ़ करोड़ की लागत से अग्निशमन व्यवस्था का इंतजाम करना था। अब तक यह कार्य पूर्ण नहीं हो सका है। मौजूदा समय में पंप हाउस के लिए महिला अस्पताल को जाने वाले मार्ग में गड्ढा खोदकर छोड़ दिया गया है। मानक पूर्ण न होने पर यहां भी फायर एनओसी नहीं मिल सकी।
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कुमारगंज में सौ बेड के चिकित्सालय की शुरुआत वर्ष 2017 से हुई है। यहां पर तत्समय अग्निशमन विभाग ने एनओसी दे दी थी, लेकिन मौजूदा समय में इसका नवीनीकरण नहीं हो सका। हालांकि, अस्पताल की ओर से अब नवीनीकरण के लिए आवेदन किया गया है, लेकिन तकनीकी खामियों की वजह से एनओसी नहीं मिल सकी है। इस तरह इन अस्पतालों में आग लगने की स्थिति में मरीज व तीमारदारों की जान तो भगवान भरोसे है ही, कागजी कोरम भी पूर्ण नहीं हो सके हैं।
50 बेड के अस्पतालों का होना है ऑनलाइन पंजीकरण
प्रदेश सरकार के क्लीनिकल स्टेब्लिशमेंट पोर्टल पर निजी अस्पतालों की तरह 50 बेड के सरकारी अस्पतालों का भी पंजीकरण व नवीनीकरण होना है। इसके लिए प्रदूषण, बायो मेडिकल वेस्ट, अग्निशमन विभाग आदि से अनापत्ति प्रमाण-पत्र प्राप्त करके पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होता है। इन्हीं कोरम के पूर्ण न होने पर निजी अस्पतालों का पंजीकरण या नवीनीकरण नहीं होता है। उन्हें अवैध अस्पतालों की श्रेणी में रखा जाता है। मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल व सौ बेड के कुमारगंज स्थित अस्पताल लंबे समय से बिना फायर एनओसी के चल रहे हैं, लेकिन इन पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
बोले जिम्मेदार
पूरी जानकारी से सीएमओ अनजान
-सीएमओ डॉ. संजय जैन ने बताया कि 50 बेड के ऊपर के अस्पतालों का ऑनलाइन पंजीकरण होना है। मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल व कुमारगंज अस्पताल का पंजीकरण नहीं है। आवेदन प्राप्त हुए हैं। कागज दिखवाकर सही जानकारी दे सकेंगे।
मेडिकल कॉलेज से मिले गोलमोल जवाब
-मेडिकल कॉलेज के मीडिया प्रभारी डॉ. डीके सिंह ने बताया कि सीएमएस, निर्माण एजेंसी व अन्य से जानकारी करके फायर एनओसी के बारे में बताएंगे। सीएमएस डॉ. अरविंद सिंह ने बताया कि प्राचार्य के स्तर से कार्यवाही हो रही है। जबकि, प्राचार्य डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार का फोन रिसीव नहीं हुआ।
जिला अस्पताल के एसआईसी भी असमंजस में
-जिला अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. बृज कुमार ने बताया कि संभवत: एनओसी हो गई होगी। अधीक्षक सही जानकारी देंगे। अधीक्षक डॉ. विपिन वर्मा ने बताया कि अस्पताल प्रबंधक से बात कर लीजिए। अस्पताल प्रबंधक राजेंद्र तिवारी ने बताया कि अभी कार्य पूर्ण ही नहीं हुआ है तो कैसे एनओसी मिलेगी।
कुमारगंज अस्पताल से हुआ है आवेदन
-कुमारगंज के सौ बेड अस्पताल के सीएमएस डॉ. रजत चौरसिया ने बताया कि पूर्व में फायर एनओसी थी, लेकिन नवीनीकरण नहीं हो सका है। इसके लिए आवेदन किया गया है। मुख्य अग्निशमन अधिकारी से वार्ता भी हुई है, कुछ अन्य मानकों को पूर्ण करके एनओसी प्राप्त की जाएगी।
सीएफओ बोले-लिखा है पत्र, करेंगे जांच
मुख्य अग्निशमन अधिकारी एमपी सिंह ने बताया कि करीब दो माह के भीतर इन अस्पतालों का निरीक्षण करके मौजूद कमियों से पत्र भेजकर उन्हें अवगत कराया गया है और दूर करने को कहा गया है। शीघ्र ही पुन: सभी अस्पतालों का भ्रमण करके जायजा लिया जाएगा।
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अयोध्या। जिले के निजी अस्पतालों के अवैध या वैध होने का चक्कर छोडि़ए। यहां के तीन बड़े सरकारी अस्पताल भी अवैध रूप से चल रहे हैं। यहां आग से बचाव के इंतजाम न हो पाने से फायर एनओसी नहीं मिल सकी है। कागजी कोरम पूरा न होने पर शासन की प्राथमिकता में शामिल क्लीनिकल स्टेब्लिशमेंट पोर्टल पर इनका पंजीकरण भी आसान प्रतीत नहीं हो रहा है।
राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज में वर्ष 2019 से तीन सौ बेड का अस्पताल संचालित है। उप्र राजकीय निर्माण निगम ने इस भवन का निर्माण किया था। भवन हैंडओवर हुआ, लेकिन आग से बचाव के इंतजाम नहीं हो सके। मई में तत्कालीन प्राचार्य ने स्वयं फायर ऑडिट कराया तो तमाम खामियां सामने आई थीं। अब तक दूर नहीं किया जा सका। इस वजह से फायर एनओसी लंबित है।
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212 बेड के जिला अस्पताल में भी यही हालात हैं। यहां वर्ष 2021 से ही करीब डेढ़ करोड़ की लागत से अग्निशमन व्यवस्था का इंतजाम करना था। अब तक यह कार्य पूर्ण नहीं हो सका है। मौजूदा समय में पंप हाउस के लिए महिला अस्पताल को जाने वाले मार्ग में गड्ढा खोदकर छोड़ दिया गया है। मानक पूर्ण न होने पर यहां भी फायर एनओसी नहीं मिल सकी।
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कुमारगंज में सौ बेड के चिकित्सालय की शुरुआत वर्ष 2017 से हुई है। यहां पर तत्समय अग्निशमन विभाग ने एनओसी दे दी थी, लेकिन मौजूदा समय में इसका नवीनीकरण नहीं हो सका। हालांकि, अस्पताल की ओर से अब नवीनीकरण के लिए आवेदन किया गया है, लेकिन तकनीकी खामियों की वजह से एनओसी नहीं मिल सकी है। इस तरह इन अस्पतालों में आग लगने की स्थिति में मरीज व तीमारदारों की जान तो भगवान भरोसे है ही, कागजी कोरम भी पूर्ण नहीं हो सके हैं।
50 बेड के अस्पतालों का होना है ऑनलाइन पंजीकरण
प्रदेश सरकार के क्लीनिकल स्टेब्लिशमेंट पोर्टल पर निजी अस्पतालों की तरह 50 बेड के सरकारी अस्पतालों का भी पंजीकरण व नवीनीकरण होना है। इसके लिए प्रदूषण, बायो मेडिकल वेस्ट, अग्निशमन विभाग आदि से अनापत्ति प्रमाण-पत्र प्राप्त करके पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होता है। इन्हीं कोरम के पूर्ण न होने पर निजी अस्पतालों का पंजीकरण या नवीनीकरण नहीं होता है। उन्हें अवैध अस्पतालों की श्रेणी में रखा जाता है। मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल व सौ बेड के कुमारगंज स्थित अस्पताल लंबे समय से बिना फायर एनओसी के चल रहे हैं, लेकिन इन पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
बोले जिम्मेदार
पूरी जानकारी से सीएमओ अनजान
-सीएमओ डॉ. संजय जैन ने बताया कि 50 बेड के ऊपर के अस्पतालों का ऑनलाइन पंजीकरण होना है। मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल व कुमारगंज अस्पताल का पंजीकरण नहीं है। आवेदन प्राप्त हुए हैं। कागज दिखवाकर सही जानकारी दे सकेंगे।
मेडिकल कॉलेज से मिले गोलमोल जवाब
-मेडिकल कॉलेज के मीडिया प्रभारी डॉ. डीके सिंह ने बताया कि सीएमएस, निर्माण एजेंसी व अन्य से जानकारी करके फायर एनओसी के बारे में बताएंगे। सीएमएस डॉ. अरविंद सिंह ने बताया कि प्राचार्य के स्तर से कार्यवाही हो रही है। जबकि, प्राचार्य डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार का फोन रिसीव नहीं हुआ।
जिला अस्पताल के एसआईसी भी असमंजस में
-जिला अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. बृज कुमार ने बताया कि संभवत: एनओसी हो गई होगी। अधीक्षक सही जानकारी देंगे। अधीक्षक डॉ. विपिन वर्मा ने बताया कि अस्पताल प्रबंधक से बात कर लीजिए। अस्पताल प्रबंधक राजेंद्र तिवारी ने बताया कि अभी कार्य पूर्ण ही नहीं हुआ है तो कैसे एनओसी मिलेगी।
कुमारगंज अस्पताल से हुआ है आवेदन
-कुमारगंज के सौ बेड अस्पताल के सीएमएस डॉ. रजत चौरसिया ने बताया कि पूर्व में फायर एनओसी थी, लेकिन नवीनीकरण नहीं हो सका है। इसके लिए आवेदन किया गया है। मुख्य अग्निशमन अधिकारी से वार्ता भी हुई है, कुछ अन्य मानकों को पूर्ण करके एनओसी प्राप्त की जाएगी।
सीएफओ बोले-लिखा है पत्र, करेंगे जांच
मुख्य अग्निशमन अधिकारी एमपी सिंह ने बताया कि करीब दो माह के भीतर इन अस्पतालों का निरीक्षण करके मौजूद कमियों से पत्र भेजकर उन्हें अवगत कराया गया है और दूर करने को कहा गया है। शीघ्र ही पुन: सभी अस्पतालों का भ्रमण करके जायजा लिया जाएगा।