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कोरियाई पार्क विस्तारीकरण योजना की भूमि पर बिदका दल
अमर उजाला ब्यूरो/फैजाबाद
Updated Thu, 28 Apr 2016 10:42 PM IST
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कोरियाई दल
- फोटो : अमर उजाला
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सरयू तट स्थित कोरियाई महारानी ‘हो’ के स्मारक के विस्तारीकरण की योजना को लेकर गुरुवार को कोरियाई आर्कीटेक्ट का आठ सदस्यीय दल रामनगरी पहुंचा। दल के सदस्यों को पर्यटन विभाग की सरयू नदी व पक्के घाट के बीच 30 बीघा भूमि को योजना के लिए दिखाए जाने पर कोरियाई दल बिदक गया।
दल के सदस्यों ने पार्क से सटे शिल्पग्राम की भूमि को देख उसे योजना के अनुरूप माना। हालांकि शिल्पग्राम योजना के तहत करोड़ों खर्च कर 90 फीसदी कार्य पूर्ण हो चुका है। दल के सदस्य शुक्रवार को निरीक्षण के बाद शाम को लखनऊ में प्रमुख सचिव पर्यटन से मुलाकात कर योजना से जुड़ा प्रस्ताव पेश करेंगे।
बता दें कि कोरियाई महारानी ‘हो’ के स्मारक का विस्तार कर कोरियन वास्तुकला से विशिष्ट मॉडल बनाए जाने की योजना है। प्रस्तावित योजना पर पिछले वर्ष भारत व कोरिया के समक्ष एमओयू पर हस्ताक्षर भी हो चुके हैं लेकिन प्रस्तावित योजना के लिए भूमि की उपलब्धता अब तक नहीं हो सकी है।
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गुुरुवार को कोरिया गणराज्य के मिनिस्ट्री ऑफ कल्चर, स्पोर्ट्स एंड टूरिज्म इंटरनेशनल कल्चर अफेयर डिवीजन के किम सुंग क्योम, होंगिक यूनिवर्सिटी डिपार्टमेंट ऑफ आर्कीटेक्चरल के लिम जिन वू, कोरियन इंस्टीट्यूट ऑफ आर्कीटेक्ट के हान चांग हो, टीजीटी कोरिया आर्कीटेक्ट कंपनी के किम हो जियोंग, एए स्टूडियो कंस्लटिंग लिमिटेड के किम चांग ह्यूम, कोरियाई एंबेसी के किम कुम प्योंग, किम कांग हुन व सुनील रावत का दल यहां पहुंचा।
दल को एडीएम सिटी आरएन शर्मा, एसपी सिटी संकल्प शर्मा, डिप्टी डायरेक्टर पर्यटन अनूप श्रीवास्तव, वाईपी सिंह निदेशक अयोध्या शोध संस्थान, क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी पीपी सिंह आदि सरयू तट स्थित महारानी हो के स्मारक लेकर पहुंचे। जिले के अफसरों ने कोरियाई दल को पर्यटन विभाग की कोरियाई पार्क से रेल पुल के बीच का घाट व नदी के बीच स्थित भूमि दिखाया तो वह बिदक गए।
दल के सदस्यों ने कहा कि पानी बढ़ने पर यह स्थल तो डूब जाएगा तो अफसरों ने समझाया कि बंधे के लेबल में जमीन को कर दिया जाए तो नहीं डूबेगा। इसके बाद दल ने शिल्पग्राम की जमीन देखी जो पसंद आई। बता दें कि शिल्पग्राम योजना के तहत लगभग ढाई करोड़ खर्च कर 90 फीसदी काम पूरा किया जा चुका है। इसके बाद दल राजसदन गया और वहां राजा अयोध्या विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र व उनके परिवार से मुलाकात की।
यहां से दल ने विवादित परिसर जाकर रामलला का दर्शन किया। इसके बाद दल तुलसी स्मारक भवन पहुंचा, जहां डीएम किंजल सिंह से मुलाकात की। बताया कि शुक्रवार को दल प्रस्तावित योजना की 10 हजार 20 वर्गमीटर भूमि पर बनने वाले निर्माण की डिजाइन आदि को लेकर निरीक्षण करेगा। शाम को यह दल प्रमुख सचिव पर्यटन से लखनऊ में मुलाकात कर बैठक करेगा और योजना से जुड़े प्रस्ताव पेश करेगा।
योजना में चाहिए दस हजार 20 वर्गमीटर भूमि
कोरियाई दल ने कोरियाई महारानी ‘हो’ के स्मारक कांप्लेक्स के विस्तारीकरण योजना के निर्माण के लिए कुल भूमि दस हजार 20 वर्ग मीटर की मांग की है। इनमें 2430 वर्ग मीटर भूमि पर वर्तमान में कोरियाई महारानी ‘हो’ के स्मारक स्थित है। शेष भूमि 7590 वर्ग मीटर भूमि की आवश्यकता है।
...तो कोरियाई दल को बदलना पड़ा मार्ग
कोरियाई दल का काफिला जब तुलसी स्मारक भवन जाने के लिए हनुमानगढ़ी चौराहे से मुड़ा तो लालकोठी के पास सीवर विस्तारीकरण के बाद बनी सड़क के गहरे गड्ढे से उन्हें रुकना पड़ा। अफसरों ने इस मार्ग पर जाना खतरा मानते हुए रूट परिवर्तित कर दल को लेकर जाने को मजबूर हुए।
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दल के सदस्यों ने पार्क से सटे शिल्पग्राम की भूमि को देख उसे योजना के अनुरूप माना। हालांकि शिल्पग्राम योजना के तहत करोड़ों खर्च कर 90 फीसदी कार्य पूर्ण हो चुका है। दल के सदस्य शुक्रवार को निरीक्षण के बाद शाम को लखनऊ में प्रमुख सचिव पर्यटन से मुलाकात कर योजना से जुड़ा प्रस्ताव पेश करेंगे।
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बता दें कि कोरियाई महारानी ‘हो’ के स्मारक का विस्तार कर कोरियन वास्तुकला से विशिष्ट मॉडल बनाए जाने की योजना है। प्रस्तावित योजना पर पिछले वर्ष भारत व कोरिया के समक्ष एमओयू पर हस्ताक्षर भी हो चुके हैं लेकिन प्रस्तावित योजना के लिए भूमि की उपलब्धता अब तक नहीं हो सकी है।
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गुुरुवार को कोरिया गणराज्य के मिनिस्ट्री ऑफ कल्चर, स्पोर्ट्स एंड टूरिज्म इंटरनेशनल कल्चर अफेयर डिवीजन के किम सुंग क्योम, होंगिक यूनिवर्सिटी डिपार्टमेंट ऑफ आर्कीटेक्चरल के लिम जिन वू, कोरियन इंस्टीट्यूट ऑफ आर्कीटेक्ट के हान चांग हो, टीजीटी कोरिया आर्कीटेक्ट कंपनी के किम हो जियोंग, एए स्टूडियो कंस्लटिंग लिमिटेड के किम चांग ह्यूम, कोरियाई एंबेसी के किम कुम प्योंग, किम कांग हुन व सुनील रावत का दल यहां पहुंचा।
दल को एडीएम सिटी आरएन शर्मा, एसपी सिटी संकल्प शर्मा, डिप्टी डायरेक्टर पर्यटन अनूप श्रीवास्तव, वाईपी सिंह निदेशक अयोध्या शोध संस्थान, क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी पीपी सिंह आदि सरयू तट स्थित महारानी हो के स्मारक लेकर पहुंचे। जिले के अफसरों ने कोरियाई दल को पर्यटन विभाग की कोरियाई पार्क से रेल पुल के बीच का घाट व नदी के बीच स्थित भूमि दिखाया तो वह बिदक गए।
दल के सदस्यों ने कहा कि पानी बढ़ने पर यह स्थल तो डूब जाएगा तो अफसरों ने समझाया कि बंधे के लेबल में जमीन को कर दिया जाए तो नहीं डूबेगा। इसके बाद दल ने शिल्पग्राम की जमीन देखी जो पसंद आई। बता दें कि शिल्पग्राम योजना के तहत लगभग ढाई करोड़ खर्च कर 90 फीसदी काम पूरा किया जा चुका है। इसके बाद दल राजसदन गया और वहां राजा अयोध्या विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र व उनके परिवार से मुलाकात की।
यहां से दल ने विवादित परिसर जाकर रामलला का दर्शन किया। इसके बाद दल तुलसी स्मारक भवन पहुंचा, जहां डीएम किंजल सिंह से मुलाकात की। बताया कि शुक्रवार को दल प्रस्तावित योजना की 10 हजार 20 वर्गमीटर भूमि पर बनने वाले निर्माण की डिजाइन आदि को लेकर निरीक्षण करेगा। शाम को यह दल प्रमुख सचिव पर्यटन से लखनऊ में मुलाकात कर बैठक करेगा और योजना से जुड़े प्रस्ताव पेश करेगा।
योजना में चाहिए दस हजार 20 वर्गमीटर भूमि
कोरियाई दल ने कोरियाई महारानी ‘हो’ के स्मारक कांप्लेक्स के विस्तारीकरण योजना के निर्माण के लिए कुल भूमि दस हजार 20 वर्ग मीटर की मांग की है। इनमें 2430 वर्ग मीटर भूमि पर वर्तमान में कोरियाई महारानी ‘हो’ के स्मारक स्थित है। शेष भूमि 7590 वर्ग मीटर भूमि की आवश्यकता है।
...तो कोरियाई दल को बदलना पड़ा मार्ग
कोरियाई दल का काफिला जब तुलसी स्मारक भवन जाने के लिए हनुमानगढ़ी चौराहे से मुड़ा तो लालकोठी के पास सीवर विस्तारीकरण के बाद बनी सड़क के गहरे गड्ढे से उन्हें रुकना पड़ा। अफसरों ने इस मार्ग पर जाना खतरा मानते हुए रूट परिवर्तित कर दल को लेकर जाने को मजबूर हुए।