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विश्व रिकॉर्ड के लिए पांच मिनट तक दीए जलना जरूरी
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अयोध्या। इस वर्ष दीपोत्सव में राम की पैड़ी पर 7.50 लाख दीप जलाकर नया विश्व रिकॉर्ड बनाने की तैयारी है। रिकॉर्ड दर्ज करने के लिए गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड की टीम मौजूद रहेगी।
विश्व रिकॉर्ड के लिए 5 मिनट तक लगातार दीपकों का जलना जरूरी है। साथ ही सभी दीपकों को 40 मिनट के भीतर जलाना होगा। इसके लिए ले आउट तैयार किया जा चुका है।
आयोजन की सफलता के लिए विभिन्न स्कूल-कॉलेजों के करीब 12 हजार स्वयंसेवक लगाए गए हैं। कई समितियां व उपसमितियां भी बनाई गई हैं। 2017 से शुरू हुए दीपोत्सव ने हर साल नए कीर्तिमान गढ़े हैं।
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गिनीज बुक की टीम हर साल बन रहे रिकॉर्ड की साक्षी रही है। इस बार एक नए रिकॉर्ड की साक्षी बनने के लिए गिनीज बुक की टीम अयोध्या पहुंच चुकी है। इस बार राम की पैड़ी के 32 घाटों पर कुल नौ लाख दीप जलाए जाने हैं।
गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड की टीम का नेतृत्व कर रहे निश्चल बरोड बताते हैं कि दीयों की गणना दो चरणों में की जाती है। पहले चरण केे ड्राई काउंटिंग कहते हैं। इस प्रक्रिया में दीपक जलाने के लिए मौजूद रहने वाले स्वयंसेवकों का सहयोग लिया जाता है।
इसके बाद वीडियोग्राफी के जरिए बिना जले दीयों की गणना की जाती है। बताया कि विश्व रिकॉर्ड के लिए कम से कम पांच मिनट तक दीपकों का जलना जरूरी है। जले दीपकों की गणना भी तभी संभव हो पाएगी जब ये पांच मिनट तक जलेंगे।
दीये जलने के बाद की गणना ड्रोन मैपिंग से की जाती है। निश्चल ने कहा कि इस बार दीयों की संख्या बढ़ गयी है इसलिए हमारी चुनौती भी बढ़ी है, पर तकनीक का इस्तेमाल इस काम को आसान बना देता है।
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विश्व रिकॉर्ड के लिए 5 मिनट तक लगातार दीपकों का जलना जरूरी है। साथ ही सभी दीपकों को 40 मिनट के भीतर जलाना होगा। इसके लिए ले आउट तैयार किया जा चुका है।
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आयोजन की सफलता के लिए विभिन्न स्कूल-कॉलेजों के करीब 12 हजार स्वयंसेवक लगाए गए हैं। कई समितियां व उपसमितियां भी बनाई गई हैं। 2017 से शुरू हुए दीपोत्सव ने हर साल नए कीर्तिमान गढ़े हैं।
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गिनीज बुक की टीम हर साल बन रहे रिकॉर्ड की साक्षी रही है। इस बार एक नए रिकॉर्ड की साक्षी बनने के लिए गिनीज बुक की टीम अयोध्या पहुंच चुकी है। इस बार राम की पैड़ी के 32 घाटों पर कुल नौ लाख दीप जलाए जाने हैं।
गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड की टीम का नेतृत्व कर रहे निश्चल बरोड बताते हैं कि दीयों की गणना दो चरणों में की जाती है। पहले चरण केे ड्राई काउंटिंग कहते हैं। इस प्रक्रिया में दीपक जलाने के लिए मौजूद रहने वाले स्वयंसेवकों का सहयोग लिया जाता है।
इसके बाद वीडियोग्राफी के जरिए बिना जले दीयों की गणना की जाती है। बताया कि विश्व रिकॉर्ड के लिए कम से कम पांच मिनट तक दीपकों का जलना जरूरी है। जले दीपकों की गणना भी तभी संभव हो पाएगी जब ये पांच मिनट तक जलेंगे।
दीये जलने के बाद की गणना ड्रोन मैपिंग से की जाती है। निश्चल ने कहा कि इस बार दीयों की संख्या बढ़ गयी है इसलिए हमारी चुनौती भी बढ़ी है, पर तकनीक का इस्तेमाल इस काम को आसान बना देता है।