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कुलाधिपति तक पहुंचा फिशरीज विद्यार्थियों के आंदोलन का मुद्दा

Tue, 24 Sep 2019 11:48 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 24 Sep 2019 11:48 PM IST
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Issues of movement of fisheries students reached Chancellor
अयोध्या। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के मत्स्यकीय महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं द्वारा विश्वविद्यालय परिसर में चल रहा आंदोलन 14वें दिन भी जारी रहा।
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इस बीच मंगलवार को कुलपति प्रो जेएस संधू ने शासन, सरकार व राजभवन तक विद्यार्थियों की आवाज पहुंचा दी है। कुलपति का कहना है कि विश्वविद्यालय के महाविद्यालयों का प्रकरण मान्यता के करीब है।
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नकारात्मक वातावरण का प्रभाव विश्वविद्यालय के नैक मूल्यांकन पर पड़ना तय है, ऐसे में छात्र बुधवार तक धरना खत्म नहीं करते हैं तो अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी। छात्र प्रदेश सरकार की नियुक्तियों में मत्स्यकीय विज्ञान को जीव विज्ञान के सापेक्ष वरीयता दिए जाने की मांग कर रहे हैं।
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कुलपति ने प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, प्रमुख सचिव कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान अमित मोहन प्रसाद तथा कुलाधिपति के प्रमुख सचिव हनुमंत राव को छात्रों की समस्या से अवगत कराया।
कुलाधिपति के प्रमुख सचिव को सोमवार को पूरे प्रकरण से अवगत कराने के बाद कुलपति ने अब उपलब्ध साक्ष्यों को शासन में एकबार फिर से कार्यवाही के लिए भेज है।
विवि के मत्स्यकीय महाविद्यालय के विद्यार्थियों को प्रदेश सरकार की विभागीय भर्तियों में अर्हता समेत प्रश्न पत्रों में पूछे जाने वाले प्रश्नों को लेकर असंतोष है। वे विश्वविद्यालय में डिग्री लेकर जा चुके पूर्व छात्रों के साथ ऐसे समय में आंदोलनरत हैं जबकि विश्वविद्यालय में नैक मूल्यांकन होने वाला है।
विश्वविद्यालय के की महाविद्यालयों का प्रकरण मान्यता के करीब है। नकारात्मक वातावरण का प्रभाव विश्वविद्यालय के नैक मूल्यांकन पर पड़ना तय है, जैसा कि पूर्व में भी देखा जा चुका है।
कुलपति प्रो. संधू ने बताया कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इन विद्यार्थियों द्वारा गैर कानूनी ढंग से किये जा रहे आंदोलन में विश्वविद्यालय प्रशासन को कोई मांग पत्र तक नहीं दिया गया, जिस आधार पर कोई बात अधिकृत रूप से आगे बढ़ाई जा सके परंतु समय-समय पर धरना स्थल पर जाकर छात्रों की जो मांग समझ में आई उसे उच्चस्तर पर शासन व प्रशासन स्तर पर पहुंचाने का प्रयास किया गया।

कुलपति ने कहा कि विद्यार्थियों का कहना है कि मत्स्य विभाग की नियुक्ति परीक्षा में जीव विज्ञान से सवाल पूछे जाते हैं। इस पर कुलपति का सुझाव था कि यदि विद्यार्थी अपने को कमजोर समझते हैं तो उन्हें कंप्टेटिव बनाने के लिए जूलॉजी की अलग से कक्षा संचालित की जा सकती है। इन प्रयासों के बावजूद कक्षा छोड़ धरना देने से विद्यार्थी अपने भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं जो उचित नहीं है।
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