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धार्मिक ट्रस्टों पर आईटी की चौकसी
फैजाबाद
Updated Fri, 18 Nov 2016 10:31 PM IST
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income tax
- फोटो : income tax
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नोटबंदी के बाद कालाधन पर नजर गड़ाए आयकर विभाग ने सभी ट्रस्टों और सोसायटी के चंदा लेने पर सख्त रुख अख्तियार किया है। सभी तरह के धार्मिक, सामाजिक व शैक्षिक ट्रस्टों और सोसायटीज को मुख्य आयकर आयुक्त (एग्जेम्प्शंस) लखनऊ कार्यालय के निर्देश पर जिला आयकर अधिकारी/ निरीक्षक स्तर से नोटिस जारी किए जा रहे हैं। इन्हें 8 नवंबर तक के चंदे की उपलब्ध रकम बताने के साथ हिदायत दी जा रही है कि नोट बंदी के फैसले के बाद हजार व पांच सौ के नोट में चंदा भी वैध नहीं होगा।
मुख्य आयकर आयुक्त (एग्जेम्प्शंस) लखनऊ कार्यालय के मुताबिक आयकर विभाग को सूचनाएं मिल रही थीं कि 8 नवंबर को प्रधानमंत्री की ओर से हजार व पांच सौ की नोट बंद करने के फैसले के बाद काला धन रखने वाले तमाम लोग ट्रस्टों व सोसायटीज में चंदा देकर काला धन सफेद करने में लगे हैं।
ऐसे में संदिग्ध चंदे की रकम की जांच शुरू की गई है। सभी धर्मों के ट्रस्टों पर खास नजर रखी जा रही है। धर्मनगरी अयोध्या, काशी, मथुरा, हरिद्वार समेत यूपी और उत्तराखंड के हजारों ऐसे मठ-मंदिरों के ट्रस्टों को नोटिस देने की स्वीकृति दी गई है। नोेटिस के दायरे में ऐसे स्कूल-कॉलेज समेत सभी स्वैच्छिक संगठन भी शामिल हैं, जो चंदा लेने के लिए आयकर विभाग से पंजीकृत है।
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मुख्य आयकर आयुक्त (एग्जेम्प्शंस) लखनऊ पीके बजाज ने बताया कि यहां से यूपी व उत्तराखंड के जिस किसी भी ट्रस्ट/संस्था को 31 अक्तूबर 2016 के बाद बीते एक साल तक मासिक चंदे की रकम के औसत से अधिक राशि की प्राप्ति दिखाई गई होगी, उसके खिलाफ जांच और कार्रवाई होगी।
पहले चरण में जिला आयकर अधिकारियों व निरीक्षकों के माध्यम से बड़े धार्मिक, सामाजिक व शैक्षिक ट्रस्टों समेत स्कूल-कॉलेज व एनजीओ चलाने वाली सोसायटीज को नोटिस जारी करने की संस्तुति दे दी गई है। नोटिस की संख्या लाखों में हो सकती है।
नोटिस के जरिए कहा गया है कि 8 नवंबर तक उपलब्ध चंदे आदि की नगदी बताएं। इसके बाद हजार व पांच सौ नोट में चंदे अवैध होंगे। कहा कि 1 से 8 नवंबर के बीच जहां भी ज्यादा नकदी की सूचना मिलेगी, उसकी जांच में दानदाताओं की कुंडली भी खंगाली जाएगी।
बैंकों से भी 31 जनवरी तक एआईआर की सूचना में चंदा लेने वाली इन संस्थाओं के सेविंग खाते में ढाई लाख व करेंट खाते में 12.50 लाख से अधिक नगदी जमा होने का ब्यौरा अलग से मांगा गया है।
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मुख्य आयकर आयुक्त (एग्जेम्प्शंस) लखनऊ कार्यालय के मुताबिक आयकर विभाग को सूचनाएं मिल रही थीं कि 8 नवंबर को प्रधानमंत्री की ओर से हजार व पांच सौ की नोट बंद करने के फैसले के बाद काला धन रखने वाले तमाम लोग ट्रस्टों व सोसायटीज में चंदा देकर काला धन सफेद करने में लगे हैं।
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ऐसे में संदिग्ध चंदे की रकम की जांच शुरू की गई है। सभी धर्मों के ट्रस्टों पर खास नजर रखी जा रही है। धर्मनगरी अयोध्या, काशी, मथुरा, हरिद्वार समेत यूपी और उत्तराखंड के हजारों ऐसे मठ-मंदिरों के ट्रस्टों को नोटिस देने की स्वीकृति दी गई है। नोेटिस के दायरे में ऐसे स्कूल-कॉलेज समेत सभी स्वैच्छिक संगठन भी शामिल हैं, जो चंदा लेने के लिए आयकर विभाग से पंजीकृत है।
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मुख्य आयकर आयुक्त (एग्जेम्प्शंस) लखनऊ पीके बजाज ने बताया कि यहां से यूपी व उत्तराखंड के जिस किसी भी ट्रस्ट/संस्था को 31 अक्तूबर 2016 के बाद बीते एक साल तक मासिक चंदे की रकम के औसत से अधिक राशि की प्राप्ति दिखाई गई होगी, उसके खिलाफ जांच और कार्रवाई होगी।
पहले चरण में जिला आयकर अधिकारियों व निरीक्षकों के माध्यम से बड़े धार्मिक, सामाजिक व शैक्षिक ट्रस्टों समेत स्कूल-कॉलेज व एनजीओ चलाने वाली सोसायटीज को नोटिस जारी करने की संस्तुति दे दी गई है। नोटिस की संख्या लाखों में हो सकती है।
नोटिस के जरिए कहा गया है कि 8 नवंबर तक उपलब्ध चंदे आदि की नगदी बताएं। इसके बाद हजार व पांच सौ नोट में चंदे अवैध होंगे। कहा कि 1 से 8 नवंबर के बीच जहां भी ज्यादा नकदी की सूचना मिलेगी, उसकी जांच में दानदाताओं की कुंडली भी खंगाली जाएगी।
बैंकों से भी 31 जनवरी तक एआईआर की सूचना में चंदा लेने वाली इन संस्थाओं के सेविंग खाते में ढाई लाख व करेंट खाते में 12.50 लाख से अधिक नगदी जमा होने का ब्यौरा अलग से मांगा गया है।