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हड़ताल से ठप रहा सरकारी दफ्तरों में कामकाज
अमर उजाला ब्यूरो/फैजाबाद
Updated Thu, 11 Aug 2016 12:00 AM IST
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विकास भवन पर प्रदर्शन करते कर्मचारी।
- फोटो : अमर उजाला
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राज्य कर्मचारियों की तीन दिनी हड़ताल के पहले दिन से बुधवार को सरकारी दफतरों में कामकाज पूरी तरह ठप दिखा। कहीं इक्का-दुक्का बैठे कर्मचारी भी संघ के नेताओं को देख कामकाज छोड़ बाहर आ गए। कर्मचारियों ने कृषि भवन में तालाबंदी कर दी।
विकास भवन, शिक्षा भवन, जिला अस्पताल, सीएमओ दफ्तर समेत कई जगह दफ्तरों के सामने प्रदर्शन और नारेबाजी की गई। प्रदेश सरकार से मांगों को पूरा न होने पर आकस्मिक सेवाएं भी ठप करने की चेतावनी दी गई। राज्य कर्मचारियों की हड़ताल के पहले दिन ज्यादातर विभागों में कामकाज ठप रहा।
यहां पहुंचे कर्मचारियों ने कार्यालयों के बाहर एकत्र होकर नारेबाजी और प्रदर्शन किया। विकास भवन में लगभग सभी विभागों में कर्मचारियों के न बैठने के कारण सन्नाटा पसरा रहा। यहां कर्मचारियों ने मांगों को लेकर प्रदर्शन और नारेबाजी की। कृषि विभाग के कर्मचारियों ने भवन में तालाबंदी करके काम ठप रखा।
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यहां भी कर्मचारी हड़ताल पर रहे। धरना-प्रदर्शन और नारेबाजी का दौर रहा। शिक्षा भवन मेें भी कामकाज ठप रहा। कर्मचारियों ने कार्यालय के सामने सभा की। यहां जिलाध्यक्ष सूर्यभान सिंह की अध्यक्षता में हुए प्रदर्शन में आलोक मिश्र, सालिकराम, रामसागर, हरिवंश वर्मा, शरीफ अंसारी, जनार्दन यादव, कृपाराम, विद्याधर शामिल थे।
लेखपालों के हड़ताल में शामिल होने के कारण तहसीलों में भी कामकाज प्रभावित रहा। उपनिबंधक कार्यालयों में भी कामकाज बाधित रहा। स्वास्थ्य विभाग में हड़ताल के कारण भी सेवाएं प्रभावित हुईं। सुबह साढ़े नौ बजे अस्पताल परिसर में प्रदेश सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी की गई।
मौके पर स्टाफ नर्स, फार्मासिस्ट, लिपिक, टेक्नीशियन सवर्ग के कर्मचारियों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। हड़ताल के चलते जिलेभर के अस्पतालों में सुबह 11 बजे तक मरीज नहीं देखे गए। इस दौरान जो भी मरीज आए उनका इलाज इमरजेंसी में किया गया और ओपीडी में कर्मचारियों की हड़ताल की वजह से 11 बजे तक ताला नहीं खुला।
इस दौरान न तो मरीजों को दवाएं दी गई और न ही एक्स-रे और न ही अल्ट्रासाउंड किया गया। हड़ताल का असर जिला अस्पताल, महिला अस्पताल, श्रीराम चिकित्सालय अयोध्या, राजकीय तुलसी महिला चिकित्सालय अयोध्या, मंडलीय चिकित्सालय दर्शननगर के अलावा पीएचसी/सीएचसी में भी दिखा।
आंदोलन में संगठन के परिषद के अध्यक्ष ओपी सिंह, मंडल अध्यक्ष डीएस वर्मा के साथ, फार्मासिस्ट एसोसियेशन संघ के मंत्री नबी मोहम्मद, ज्ञानप्रकाश दुबे, अजीत सिंह, नर्सेज संघ के सेक्रेटरी अजय सिंह, अध्यक्ष उर्मिला विश्वकर्मा, प्रभा सिद्दीकी, एलटी संदीप सिंह, धर्मेंद्र सिंह, एक्सरे टेक्नीशियन के साथ चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भी शामिल रहे।
उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद की संघर्ष समिति के आह्वान पर हड़ताल और प्रदर्शन में नेताओं ने कहा कि तयशुदा मांगों के शासनादेश व जायज मांगों पर सहमति की प्रदेश सरकार ने अनदेखी की। पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल नहीं की गई।
कैशलेस चिकित्सा सुविधा और फील्ड कर्मचारियों को मोटरसाइकिल भत्ता आदि की समस्या नहीं दूर की गई। बार-बार मांगों को रखने के बाद भी कार्रवाई न होने पर ही कर्मचारियों को मजबूरन हड़ताल करनी पड़ी।
कहा कि 10 से 12 अगस्त तक 72 घंटे की हड़ताल के बाद भी यदि कार्रवाई न की गई तो अनिश्चितकालीन हड़ताल किए जाने पर विचार होगा। सभाओं को महेश चंद्र तिवारी, अमरनाथ पांडेय, अरविंद कुमार सिंह, डीपी यादव, रामअवध, अजीत सिंह, पीएन उपाध्याय, राजेश सिंह, धर्मेंद्र मिश्र, पंकज मिश्र आदि ने संबोधित किया।
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विकास भवन, शिक्षा भवन, जिला अस्पताल, सीएमओ दफ्तर समेत कई जगह दफ्तरों के सामने प्रदर्शन और नारेबाजी की गई। प्रदेश सरकार से मांगों को पूरा न होने पर आकस्मिक सेवाएं भी ठप करने की चेतावनी दी गई। राज्य कर्मचारियों की हड़ताल के पहले दिन ज्यादातर विभागों में कामकाज ठप रहा।
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यहां पहुंचे कर्मचारियों ने कार्यालयों के बाहर एकत्र होकर नारेबाजी और प्रदर्शन किया। विकास भवन में लगभग सभी विभागों में कर्मचारियों के न बैठने के कारण सन्नाटा पसरा रहा। यहां कर्मचारियों ने मांगों को लेकर प्रदर्शन और नारेबाजी की। कृषि विभाग के कर्मचारियों ने भवन में तालाबंदी करके काम ठप रखा।
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यहां भी कर्मचारी हड़ताल पर रहे। धरना-प्रदर्शन और नारेबाजी का दौर रहा। शिक्षा भवन मेें भी कामकाज ठप रहा। कर्मचारियों ने कार्यालय के सामने सभा की। यहां जिलाध्यक्ष सूर्यभान सिंह की अध्यक्षता में हुए प्रदर्शन में आलोक मिश्र, सालिकराम, रामसागर, हरिवंश वर्मा, शरीफ अंसारी, जनार्दन यादव, कृपाराम, विद्याधर शामिल थे।
लेखपालों के हड़ताल में शामिल होने के कारण तहसीलों में भी कामकाज प्रभावित रहा। उपनिबंधक कार्यालयों में भी कामकाज बाधित रहा। स्वास्थ्य विभाग में हड़ताल के कारण भी सेवाएं प्रभावित हुईं। सुबह साढ़े नौ बजे अस्पताल परिसर में प्रदेश सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी की गई।
मौके पर स्टाफ नर्स, फार्मासिस्ट, लिपिक, टेक्नीशियन सवर्ग के कर्मचारियों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। हड़ताल के चलते जिलेभर के अस्पतालों में सुबह 11 बजे तक मरीज नहीं देखे गए। इस दौरान जो भी मरीज आए उनका इलाज इमरजेंसी में किया गया और ओपीडी में कर्मचारियों की हड़ताल की वजह से 11 बजे तक ताला नहीं खुला।
इस दौरान न तो मरीजों को दवाएं दी गई और न ही एक्स-रे और न ही अल्ट्रासाउंड किया गया। हड़ताल का असर जिला अस्पताल, महिला अस्पताल, श्रीराम चिकित्सालय अयोध्या, राजकीय तुलसी महिला चिकित्सालय अयोध्या, मंडलीय चिकित्सालय दर्शननगर के अलावा पीएचसी/सीएचसी में भी दिखा।
आंदोलन में संगठन के परिषद के अध्यक्ष ओपी सिंह, मंडल अध्यक्ष डीएस वर्मा के साथ, फार्मासिस्ट एसोसियेशन संघ के मंत्री नबी मोहम्मद, ज्ञानप्रकाश दुबे, अजीत सिंह, नर्सेज संघ के सेक्रेटरी अजय सिंह, अध्यक्ष उर्मिला विश्वकर्मा, प्रभा सिद्दीकी, एलटी संदीप सिंह, धर्मेंद्र सिंह, एक्सरे टेक्नीशियन के साथ चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भी शामिल रहे।
उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद की संघर्ष समिति के आह्वान पर हड़ताल और प्रदर्शन में नेताओं ने कहा कि तयशुदा मांगों के शासनादेश व जायज मांगों पर सहमति की प्रदेश सरकार ने अनदेखी की। पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल नहीं की गई।
कैशलेस चिकित्सा सुविधा और फील्ड कर्मचारियों को मोटरसाइकिल भत्ता आदि की समस्या नहीं दूर की गई। बार-बार मांगों को रखने के बाद भी कार्रवाई न होने पर ही कर्मचारियों को मजबूरन हड़ताल करनी पड़ी।
कहा कि 10 से 12 अगस्त तक 72 घंटे की हड़ताल के बाद भी यदि कार्रवाई न की गई तो अनिश्चितकालीन हड़ताल किए जाने पर विचार होगा। सभाओं को महेश चंद्र तिवारी, अमरनाथ पांडेय, अरविंद कुमार सिंह, डीपी यादव, रामअवध, अजीत सिंह, पीएन उपाध्याय, राजेश सिंह, धर्मेंद्र मिश्र, पंकज मिश्र आदि ने संबोधित किया।