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मेडिकल कॉलेज में अब तीन सौ बेड पर लगेगी गैस पाइप लाइन
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अयोध्या। राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज दर्शननगर में ऑक्सीजन गैस पाइप लाइन के कार्य को हरी झंडी मिल गई है। दूसरे प्रस्ताव में 300 बेड के लिए करीब पांच करोड़ की लागत से पाइप लाइन बिछाने व ऑक्सीजन भवन बनाने के लिए शासन की मुहर लग गई है। कार्यदायी संस्था नामित करते हुए शीघ्र ही निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है।
राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज दर्शननगर को 200 बेड का कोविड एल-2 अस्पताल बनाया गया है, लेकिन यहां निर्मित आईसीयू में सिर्फ 30 बेड पर सेंट्रल ऑक्सीजन सप्लाई सिस्टम के जरिए ऑक्सीजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। कोरोना की दूसरी लहर में फेफड़ों में संक्रमण फैलने पर मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत हुई तो सारी तैयारियां चरमराती नजर आईं।
सिलेंडर के जरिए मरीजों को ऑक्सीजन मुहैया कराने में मेडिकल कॉलेज प्रशासन के पसीने छूटने लगे। सीढ़ियों से सिलेंडर खींचते हुए ऊपर बने आइसोलेशन वार्डों तक पहुंचाने में सीढ़ियां भी टूट गईं, ऊपर से मरीजों को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन न मिल पाने के कारण रिकवरी में भी काफी समय लगा।
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इसी बीच अस्पताल के 400 बेड पर करीब नौ करोड़ की लागत से पाइप लाइन बिछाने व अन्य कार्यों के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया था। इसके लिए यूपीपीसीएल को कार्यदायी संस्था नामित करते हुए कार्य शुरू कराने की तैयारी भी थी, लेकिन शासन से लागत अधिक होने का हवाला देते हुए कार्य रोक दिया गया और नए सिरे से प्रस्ताव मांगा गया।
जिस क्रम में मेडिकल कॉलेज की ओर से करीब पांच करोड़ की लागत से 300 बेड पर पाइप लाइन बिछाने व मुख्य भवन के बाहर ऑक्सीजन भवन तैयार करने के लिए पिछले सप्ताह दोबारा प्रस्ताव भेजा गया, जिस पर शासन ने मुहर लगा दी है। यूपीपीसीएल को कार्यदायी संस्था नामित करते हुए शीघ्र ही कार्य पूरा करने का निर्देश दिया गया है।
हालांकि, इन दिनों अस्पताल में मरीजों की भीड़ भी कम हो रही है, जिससे ऑक्सीजन को लेकर मारामारी दूर भी हो गई। फिर भी यदि निर्धारित अवधि में निर्माण कार्य पूरा हो गया तो संभावित तीसरी लहर से निपटने में आसानी होगी।
पहले 400 बेड पर ऑक्सीजन पाइप लाइन की व्यवस्था होना था, लेकिन प्रस्ताव स्वीकृत नहीं हो सका। दोबारा 300 बेड पर करीब पांच करोड़ की लागत से प्रस्ताव भेजा गया था, जिसे इसी सप्ताह स्वीकृत कर लिया गया है। शासन की ओर से निर्माण कार्य की जिम्मेदारी यूपीपीसीएल को सौंपते हुए शीघ्र ही कार्य पूर्ण करने का निर्देश दिया गया है। -डॉ. विजय कुमार, प्रिंसिपल, राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज दर्शननगर
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राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज दर्शननगर को 200 बेड का कोविड एल-2 अस्पताल बनाया गया है, लेकिन यहां निर्मित आईसीयू में सिर्फ 30 बेड पर सेंट्रल ऑक्सीजन सप्लाई सिस्टम के जरिए ऑक्सीजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। कोरोना की दूसरी लहर में फेफड़ों में संक्रमण फैलने पर मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत हुई तो सारी तैयारियां चरमराती नजर आईं।
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सिलेंडर के जरिए मरीजों को ऑक्सीजन मुहैया कराने में मेडिकल कॉलेज प्रशासन के पसीने छूटने लगे। सीढ़ियों से सिलेंडर खींचते हुए ऊपर बने आइसोलेशन वार्डों तक पहुंचाने में सीढ़ियां भी टूट गईं, ऊपर से मरीजों को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन न मिल पाने के कारण रिकवरी में भी काफी समय लगा।
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इसी बीच अस्पताल के 400 बेड पर करीब नौ करोड़ की लागत से पाइप लाइन बिछाने व अन्य कार्यों के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया था। इसके लिए यूपीपीसीएल को कार्यदायी संस्था नामित करते हुए कार्य शुरू कराने की तैयारी भी थी, लेकिन शासन से लागत अधिक होने का हवाला देते हुए कार्य रोक दिया गया और नए सिरे से प्रस्ताव मांगा गया।
जिस क्रम में मेडिकल कॉलेज की ओर से करीब पांच करोड़ की लागत से 300 बेड पर पाइप लाइन बिछाने व मुख्य भवन के बाहर ऑक्सीजन भवन तैयार करने के लिए पिछले सप्ताह दोबारा प्रस्ताव भेजा गया, जिस पर शासन ने मुहर लगा दी है। यूपीपीसीएल को कार्यदायी संस्था नामित करते हुए शीघ्र ही कार्य पूरा करने का निर्देश दिया गया है।
हालांकि, इन दिनों अस्पताल में मरीजों की भीड़ भी कम हो रही है, जिससे ऑक्सीजन को लेकर मारामारी दूर भी हो गई। फिर भी यदि निर्धारित अवधि में निर्माण कार्य पूरा हो गया तो संभावित तीसरी लहर से निपटने में आसानी होगी।
पहले 400 बेड पर ऑक्सीजन पाइप लाइन की व्यवस्था होना था, लेकिन प्रस्ताव स्वीकृत नहीं हो सका। दोबारा 300 बेड पर करीब पांच करोड़ की लागत से प्रस्ताव भेजा गया था, जिसे इसी सप्ताह स्वीकृत कर लिया गया है। शासन की ओर से निर्माण कार्य की जिम्मेदारी यूपीपीसीएल को सौंपते हुए शीघ्र ही कार्य पूर्ण करने का निर्देश दिया गया है। -डॉ. विजय कुमार, प्रिंसिपल, राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज दर्शननगर