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प्राइमरी से लेकर उच्च शिक्षा तक दूर हो बदहाली

Tue, 24 Jan 2017 10:41 PM IST
फैजाबाद
फैजाबाद Updated Tue, 24 Jan 2017 10:41 PM IST
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From primary to higher education be far misery
फैजाबाद में मंगलवार को उसरु स्थित गुरुनानक गर्ल्स डिग्री कॉलेज में अमरउजाला के कैंपस अड्डा में मौजूद छात्राएं। - फोटो : अमर उजाला
शिक्षा क्षेत्र की बदहाली से यंगीस्तान खफा है। प्राइमरी से लेकर उच्च शिक्षा की बदतर हालत पर सवाल उठ रहे हैं। व्यवस्था की खामी उन्हें परेशान करती है। नकल माफिया पर लगाम और शिक्षण-प्रशिक्षण व्यवस्था में आमूलचूल सुधार उनकी पहली प्राथमिकता है, ताकि मेधावी पैदा हों और सभी को रोजगार मिले।
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राजनीति को देश की तरक्की की सबसे अहम सीढ़ी बताते हुए जनप्रतिनिधि के चुनाव में सबकी शत-प्रतिशत भागीदारी के साथ सोच-विचार के बाद वोट देने की जरूरत गिनाई गई।    अमर उजाला कैंपस अड्डा में मंगलवार को गुरुनानक गर्ल्स डिग्री कॉलेज की छात्राओं ने शिक्षा की बदहाल व्यवस्था पर जमकर सवाल उठाए।
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छात्राएं शासन-प्रशासन और सियासत पर तकरीबन दो घंटे तक सधे तीर चलाती रहीं। उनके निशाने पर वे हर लोग थे, जिनके कारण देश की व्यवस्था बेपटरी हो रही है। शिक्षा केंद्रों पर बढ़ रहे धन के प्रभाव को खतरनाक बताते हुए भ्रष्ट शिक्षा व्यवस्था को तत्काल ठीक करने की मांग उठी।
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आरक्षण व्यवस्था से हुए लाभ और नुकसान पर भी लड़कियों ने बेबाकी से अपनी राय रखी। स्वच्छता और सुरक्षा का मुद्दा मुख्य रूप से उठा। एक दिन झाडू उठाने से तस्वीर नहीं बदलने वाली बात भी कही गई तथा सुरक्षा का माहौल ऐसा हो कि लड़किया निडरता से रह सकें।

एक छात्रा ने करप्ट एजूकेशन सिस्टम को खत्म कर स्कूलों में शुचिता की पुनर्स्थापना की मांग की। नकलविहीन परीक्षा की मांग की गई जिससे मेधावियों का सही ढंग से निर्धारण हो सके। मेरिट के आधार पर विभिन्न नौकरियों में होने वाली चयन प्रक्रिया को रोकने की मांग की गई क्योंकि नकल की मंडी बन चुके परीक्षा केंद्रों से उत्तीर्ण हो रहे परीक्षार्थियों की मेधा का निर्धारण सिर्फ उनके अंकपत्र से नहीं की जा सकती है। एक छात्रा ने बेबाकी से कहा कि सिर्फ स्लोगन, फोटो खिंचाने और एक दिन झाड़ू उठाने से गांधी का सपना साकार नहीं होगा।       


लालच बुरी बला है, फिर भी चुनाव के पूर्व नेताओं की ओर से लाचल दी जाती हैं। मतदाताओं को लालच दे लुभाने की कोशिशों को लोकतंत्र की सेहत के लिए अशुभ बताया गया। गांव-गिरांव में खुले परिषदीय स्कूलों की बदहाली पर एक छात्रा ने कहा कि जब जड़ ही खराब हो जाएगी तो वहां के छात्र/छात्राओं का आगे का भविष्य अंधकारमय होना लाजिमी है। अवसर और विकल्प पर भी चर्चा हुई। 
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