फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ayodhya News ›   Forced to buy expensive books

महंगी किताबें खरीदने को मजबूर

Sat, 23 Apr 2016 11:01 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/फैजाबाद
अमर उजाला ब्यूरो/फैजाबाद Updated Sat, 23 Apr 2016 11:01 PM IST
विज्ञापन
Forced to buy expensive books
books, jhansi hindi news - फोटो : demo
कॉन्वेंट स्कूलों में पढ़ रहे छात्र/छात्राओं के अभिभावकों को निजी प्रकाशकों की किताबों को खरीदने के लिए मजूबर किया जा रहा है। कमीशनखोरी की ऐसी अंधेरगर्दी मची है कि किताब की आड़ में कई गुना ज्यादा रुपया अभिभावकों से वसूल उनकी जेब ढीली की जा रही है।
विज्ञापन


यह हाल तब है कि जबकि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने आदेश जारी कर रखा है कि स्कूल एनसीईआरटी की ही किताबें अपने यहां पढ़ाएं। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि जिले के तकरीबन सभी कॉन्वेंट स्कूलों में निजी प्रकाशकों की ही किताबें पढ़ाई जा रही है। माध्यमिक शिक्षा महकमा स्कूल के प्रबंधक/प्रिसंपल को सिर्फ एनसीईआरटी की ही पुस्तक पढ़ाने का निर्देश जारी कर चुप्पी साध लिया है।
विज्ञापन


जिले के कुछ स्कूलों को छोड़कर तकरीबन सभी जगहों पर निजी प्रकाशकों की किताबें दुकानों से खरीदवाई जा रही है। दअरसल इसके पीछे सबसे बड़ा तथ्य यह है कि निजी प्रकाशकों की किताबों की जिस स्कूल में जितनी खपत होगी, उसे उतना ही अप्रत्यक्ष रूप से फायदा होगा। अभिभावक यदि कक्षा सात की किताब एनसीईआरटी से खरीदता तो उसे बमुश्किल पांच सौ रुपये खर्च करना पड़ता जबकि निजी प्रकाशक के यहां से खरीदता है तो तकरीबन चार हजार रुपये व्यय हो जा रहा है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


स्कूल बताते हैं कि किस दुकान से खरीदनी है किताबें
छात्र/छात्राओं के प्रवेश के समय ही विद्यालय की ओर से अभिभावक को बता दिया जाता कि कौन सी दुकान से किताबें खरीदनी हैं। कई दुकानें ऐसी हैं जहां पर कई विद्यालयों की किताबें मिल रही हैं। रिकाबगंज चौराहा, जिला चिकित्सालय के सामने तथा चौक में कॉपी-किताबों की ऐसी दुकानें बहुतायत में हैं। बस वहां पहुंचते ही विद्यालय की ओर से दी गई स्लिप थमाइए, तुरंत किताबों का सेट मिल जा रहा है। 


मिली शिकायत तो होगी कार्रवाई
सीबीएसई/आईसीएससी बोर्ड से मान्यता प्राप्त स्कूलों के प्रबंधक/प्रिंसपल को पत्र जारी कर सख्त निर्देश दिया है कि वे अपने यहां सिर्फ एनसीईआरटी की ही किताबे पढ़ाएं जैसा कि इन बोर्डों का आदेश है। यदि कहीं से शिकायत मिलती है तो आवश्यक कार्यवाही की जाएगी। -राजेंद्र कुमार पांडेय, जिला विद्यालय निरीक्षक 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed