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राम मंदिर के निर्माणाधीन मार्ग पर उड़ रही धूल, भक्त होते परेशान
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अयोध्या। राम जन्मभूमि में राममंदिर का निर्माण कार्य जोरों पर चल रहा है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट भक्तों के लिए सुविधाएं विकसित करने पर भी काम कर रहा है। इसी क्रम में रामलला के दर्शन के लिए एक नया संपर्क मार्ग भी निर्माणाधीन है।
निर्माण की धीमी गति अब परेशानी का कारण बन गई है। इस मार्ग पर उड़ रहे धूल के गुबार से न सिर्फ भक्त परेशान होते हैं बल्कि स्थानीय लोगों के लिए भी धूल की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
इस संपर्क मार्ग पर कहीं भी न तो पेयजल और न ही बैठने के इंतजाम हैं। राममंदिर जाने वाली तीन सड़कों का चौड़ीकरण प्रस्तावित है। मुख्य मार्ग सहादतगंज से अयोध्या मार्ग का चौड़ीकरण होना है। यह रामपथ के नाम से नवनिर्मित होगा।
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इसी तरह शृंगारहाट से रामजन्मभूमि तक के दर्शन मार्ग का भी चौड़ीकरण प्रस्तावित है। इसे धर्मपथ के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके साथ ही सुग्रीव किला से श्री रामजन्मभूमि मंदिर तक करीब 900 मीटर लंबा व 30 मीटर चौड़ा जन्मभूमि पथ का निर्माण हो रहा है।
इस संपर्क मार्ग पर भक्तों के लिए आधुनिक सुविधाएं भी विकसित की जानी हैं। मार्ग निर्माण की स्वीकृति होने के बाद इसका काम भी करीब छह माह पहले शुरू हुआ।
सुग्रीव किला से रामगुलेला होकर रामजन्मभूमि संपर्क मार्ग के चौड़ीकरण में अब कोई अवरोध नहीं है, लेकिन इस मार्ग के निर्माण कार्य में कोई प्रगति नहीं हुई है।
धर्मार्थ कार्य विभाग की ओर से प्रस्तावित निर्माण के लिए भूस्वामियों से जमीन की रजिस्ट्री कराई जा चुकी है और 30 मीटर संपर्क मार्ग के लिए मिट्टी की पटाई भी हो चुकी है। इसके बाद अब संपर्क मार्ग का निर्माण नहीं हो रहा है।
अब यही मिट्टी दर्शनार्थियों के साथ-साथ स्थानीय लोगों के लिए समस्या का सबब बन गई है। लोक निर्माण विभाग के सूत्रों के मुताबिक शीघ्र ही सड़क का निर्माण कार्य शुरू होने जा रहा है।
बिड़ला धर्मशाला के पुजारी अंकुश झा ने कहा कि धूल का गुबार बड़ी समस्या बन गया है। धूल उड़कर बिड़ला धर्मशाला तक आती है। जिससे यहां की हरियाली तो प्रभावित हो ही रही है। यहां रुकने वाले भक्तों को भी समस्या का सामना करना पड़ता है।
जल्द ही इस सड़क का निर्माण कराया जाना चाहिए। स्थानीय संत गदाधर ने कहा कि संपर्क मार्ग से उड़ रहा धूल का गुबार आसपास के मठ-मंदिरों में भी पहुंच रहा है। जिससे बहुत ही परेशानी हो रही है।
सड़क निर्माण में यदि देरी है तो कम से कम इस मार्ग पर प्रतिदिन पानी का छिड़काव किया जाना चाहिए। रामलला के नियमित दर्शनार्थी संत कविराज दास कहते हैं कि छह माह से इस संपर्क मार्ग की यही स्थिति है।
इस मार्ग के अगल-बगल गाड़ियों की पार्किंग होती है। गाड़ियों के चलते से काफी मात्रा में धूल उड़ती है। जिससे भक्त भी परेशान होते हैं व आसपास के निवासियों के लिए भी यह जंजाल से कम नहीं।
स्थानीय पार्षद रमेश दास ने कहा कि राममंदिर दर्शन के लिए प्रतिदिन करीब 15 हजार भक्त आ रहे हैं। रामनगरी में भक्तों के लिए स्थायी पार्किंग की व्यवस्था नहीं है।
इसलिए सुग्रीव किला के सामने ही अस्थाई पार्किंग में भक्त अपने वाहन खड़े कर निर्माणाधीन सुग्रीव किला-रामजन्मभूमि दर्शनमार्ग से दर्शन के लिए जाते हैं। भीषण गर्मी में उन्हें करीब एक किलोमीटर जाना पड़ता है।
ऊपर से उड़ता धूल का गुबार बड़ी समस्या है। यहीं नहीं स्थानीय मठ-मंदिरों व लोगों के घरों में भी ये धूल का गुबार पहुंचता है। जिससे सभी परेशान है। टैंकर से यदि पानी का छिड़काव कराया जाए तो धूल के गुबार से राहत मिल सकती है।
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निर्माण की धीमी गति अब परेशानी का कारण बन गई है। इस मार्ग पर उड़ रहे धूल के गुबार से न सिर्फ भक्त परेशान होते हैं बल्कि स्थानीय लोगों के लिए भी धूल की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
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इस संपर्क मार्ग पर कहीं भी न तो पेयजल और न ही बैठने के इंतजाम हैं। राममंदिर जाने वाली तीन सड़कों का चौड़ीकरण प्रस्तावित है। मुख्य मार्ग सहादतगंज से अयोध्या मार्ग का चौड़ीकरण होना है। यह रामपथ के नाम से नवनिर्मित होगा।
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इसी तरह शृंगारहाट से रामजन्मभूमि तक के दर्शन मार्ग का भी चौड़ीकरण प्रस्तावित है। इसे धर्मपथ के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके साथ ही सुग्रीव किला से श्री रामजन्मभूमि मंदिर तक करीब 900 मीटर लंबा व 30 मीटर चौड़ा जन्मभूमि पथ का निर्माण हो रहा है।
इस संपर्क मार्ग पर भक्तों के लिए आधुनिक सुविधाएं भी विकसित की जानी हैं। मार्ग निर्माण की स्वीकृति होने के बाद इसका काम भी करीब छह माह पहले शुरू हुआ।
सुग्रीव किला से रामगुलेला होकर रामजन्मभूमि संपर्क मार्ग के चौड़ीकरण में अब कोई अवरोध नहीं है, लेकिन इस मार्ग के निर्माण कार्य में कोई प्रगति नहीं हुई है।
धर्मार्थ कार्य विभाग की ओर से प्रस्तावित निर्माण के लिए भूस्वामियों से जमीन की रजिस्ट्री कराई जा चुकी है और 30 मीटर संपर्क मार्ग के लिए मिट्टी की पटाई भी हो चुकी है। इसके बाद अब संपर्क मार्ग का निर्माण नहीं हो रहा है।
अब यही मिट्टी दर्शनार्थियों के साथ-साथ स्थानीय लोगों के लिए समस्या का सबब बन गई है। लोक निर्माण विभाग के सूत्रों के मुताबिक शीघ्र ही सड़क का निर्माण कार्य शुरू होने जा रहा है।
बिड़ला धर्मशाला के पुजारी अंकुश झा ने कहा कि धूल का गुबार बड़ी समस्या बन गया है। धूल उड़कर बिड़ला धर्मशाला तक आती है। जिससे यहां की हरियाली तो प्रभावित हो ही रही है। यहां रुकने वाले भक्तों को भी समस्या का सामना करना पड़ता है।
जल्द ही इस सड़क का निर्माण कराया जाना चाहिए। स्थानीय संत गदाधर ने कहा कि संपर्क मार्ग से उड़ रहा धूल का गुबार आसपास के मठ-मंदिरों में भी पहुंच रहा है। जिससे बहुत ही परेशानी हो रही है।
सड़क निर्माण में यदि देरी है तो कम से कम इस मार्ग पर प्रतिदिन पानी का छिड़काव किया जाना चाहिए। रामलला के नियमित दर्शनार्थी संत कविराज दास कहते हैं कि छह माह से इस संपर्क मार्ग की यही स्थिति है।
इस मार्ग के अगल-बगल गाड़ियों की पार्किंग होती है। गाड़ियों के चलते से काफी मात्रा में धूल उड़ती है। जिससे भक्त भी परेशान होते हैं व आसपास के निवासियों के लिए भी यह जंजाल से कम नहीं।
स्थानीय पार्षद रमेश दास ने कहा कि राममंदिर दर्शन के लिए प्रतिदिन करीब 15 हजार भक्त आ रहे हैं। रामनगरी में भक्तों के लिए स्थायी पार्किंग की व्यवस्था नहीं है।
इसलिए सुग्रीव किला के सामने ही अस्थाई पार्किंग में भक्त अपने वाहन खड़े कर निर्माणाधीन सुग्रीव किला-रामजन्मभूमि दर्शनमार्ग से दर्शन के लिए जाते हैं। भीषण गर्मी में उन्हें करीब एक किलोमीटर जाना पड़ता है।
ऊपर से उड़ता धूल का गुबार बड़ी समस्या है। यहीं नहीं स्थानीय मठ-मंदिरों व लोगों के घरों में भी ये धूल का गुबार पहुंचता है। जिससे सभी परेशान है। टैंकर से यदि पानी का छिड़काव कराया जाए तो धूल के गुबार से राहत मिल सकती है।