फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ayodhya News ›   During Jang-e-Azadi was demolished the goods train

जंग-ए-आजादी के दौरान गिराई थी मालगाड़ी

Tue, 24 Jan 2017 11:01 PM IST
फैजाबाद
फैजाबाद Updated Tue, 24 Jan 2017 11:01 PM IST
विज्ञापन
During Jang-e-Azadi was demolished the goods train
फैजाबाद में मंगलवार को जंग-ए-आजादी के दिनों को याद कर फफकते स्वतंत्रता संग्राम सेनानी माता प्रसाद गुप्ता। - फोटो : अमर उजाला
स्वतंत्रता संग्राम के नायकों में शुमार व इकलौते जीवित माताप्रसाद गुप्त जंग-ए-आजादी को याद कर कई बार रोए। आंखें बार-बार डबडबाती रहीं। उन दिनों की कहानियां सुनाते शेर की तरह रह-रहकर दहाड़ते रहे। कैमरा देखा तो पुत्र राजेंद्र और पौत्र संदीप को पुकारा। अरे भाई मेरा कुर्ता-पायजामा और टोपी तो लाओ। मेरे दांत कहां हैं? फिर कहा, कहां थे आप? बहुत दिन बाद आप आये हैं, मेरा हालचाल जानने। आजकल तो बुढ़ापे की बीमारियों से जूझ रहा हूं। जिले में इकलौता रह गया हूं। सब साथी छोड़कर चले गये। देखो, मेरा कब बुलावा आता है? कहकर रो पड़े।
विज्ञापन


करीब 92 वर्षीय गुप्त डिस्क स्लिप कर जाने से एक साल से चारपाई पर हैं। शुगर है तो भी मिठाई खाने से परहेज नहीं। याददाश्त बेहद कमजोर है। कुछ पूछने के लिए कान में जोर से बोलना पड़ता है। बिना चश्मा आज भी अखबार पढ़ लेते हैं। जज्बा आज भी जंगे आजादी के दिनों जैसा है।
विज्ञापन


बताने लगे कि गांधी जी के सत्याग्रह आंदोलन में शामिल हुआ। पकड़ा गया, एक साल की सजा फैजाबाद जेल में काटी। अकबरपुर के शहजादपुर में गोरों को नुकसान पहुंचाने के लिए रात में तीन बजे मालगाड़ी के पांच डिब्बे पलट गये। वह फैजाबाद भागकर पहुंचे और साथियों संग डाकघर फूंक दिया। कुछ लूटपाट भी की। बाद में पकड़ा गया और इसमें छह माह की सजा काटी।
विज्ञापन
विज्ञापन


गुलामी के दिनों में त्रिशूल लेकर चलने वाले केदारनाथ ने कहा कि जो घंटाघर पर तिरंगा फहराएगा, उसे 50 रुपये ईनाम देंगे। फिर क्या था, दरवाजा खोलकर सीढ़ियों से ऊपर चढ़ गया, झंडा फहराया। नीचे पहुंचा तो दो सीढ़ी पहले कूद गया। आवाज सुनकर पुलिस वाले दौड़ पड़े, तब तक वह निकल भागे।


आज के नेताओं से खासा नाराज हैं। देवकली प्रसाद-छेदाना देवी की संतान व कानपुर में जन्मे माताप्रसाद को फैजाबाद के रिश्तेदार ने गोद लिया। यहां किशोरावस्था और जवानी को आजादी के लिए होम कर दिया। पत्नी शांति देवी एक साल पहले उनका साथ छोड़कर चल बसीं। दो बेटों में से सबसे बड़े बेटे राजेंद्र कुमार गुप्त के साथ रिकाबगंज में रहते सेनानी गुप्त की सेवा में पुत्र, पुत्र वधू, पौत्र व उनकी वधुएं लगी रहीं। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed