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युवाओं को लालच की जगह दें रोजगार
फैजाबाद
Updated Sat, 11 Feb 2017 10:01 PM IST
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अयोध्या में शनिवार को परमहंस महाविद्यालय में अमर उजाला के कैंपस अड्डे में मौजूद छात्र-छात्राएं ।
- फोटो : अमर उजाला
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युवाओं को देश की रीढ़ माना जाता है। लेकिन नेता सिर्फ युवा-युवा चिल्लाते रहते हैं। उनकी परेशानियों पर ध्यान नहीं देते हैं। आईटी इंडस्ट्री की स्थापना करने की मांग उठी। स्वास्थ्य के लिए स्वच्छता को अनिवार्य बताया गया, लेकिन स्वच्छता अभियान को रस्म अदायगी भर कहा गया। युवाओं को लालच न देकर उनके हाथों को काम देने की मांग उठी। जाति, धर्म की राजनीति से ऊपर उठकर मतदान करने का संकल्प युवाओं ने लिया।
अमर उजाला ने शनिवार को अयोध्या के परमहंस शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान में युवा वर्ग के साथ संवाद किया तो युवा शक्ति ने खुल कर अपनी बात रखी। एक युवा ने लालच के बजाय हर युवा के हाथों को काम देने वाली सोच पैदा करने की मांग की।
दूसरे युवा ने कहा कि जनप्रतिनिधि चला चली की बेला में अति सक्रिय हो जाते हैं। यदि यही सक्रियता पांच वर्ष तक बनी रहे तो विधानसभा क्षेत्र से लेकर प्रदेश की हालत सुधरने में देर नहीं लगेगी। एक युवा ने प्रतिभा पलायन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि प्रतिभाओं को उनकी योग्यता के अनुसार काम नहीं मिल पा रहा है जिससे हमारे देश की युवा शक्ति विदेश चली जा रही है।
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ऐसी नीति हो कि ब्रेन ड्रेन पर विराम लगे। एक युवा ने जाति-धर्म की राजनीति बुरी बताते हुए कहा कि जब तक यह चलता रहेगा, तब तक विकास होने वाला नहीं है। ऐसे एमएलए को चुनना है जो जाति और धर्म की राजनीति न करता हो। आरक्षण का मुद्दा उठाते हुए एक युवा ने इस पर नए सिरे से समीक्षा करने का वक्त आ गया है।
युवाओं ने कहा कि जनप्रतिनिधि सरल, सहज, विनम्र और व्यापक दृष्टि वाला हो जिससे कि शिक्षा और रोजगार दोनों स्थितियों में सकारात्मक बदलाव आए। नागरिक सुविधाओं की कमी पर भी युवाओं ने अपनी बेबाक राय रखी।
बिजली, पानी, स्वास्थ्य, सड़क और शिक्षा जैसी बुनियादी चीजों को बेहतर करने की मांग जोर शोर से उठी। एक छात्र ने कहा कि कहने को तो यहां ये सब सुविधाएं दी जा रही हैं लेकिन वह सही ढंग से लोगों तक पहुंच नहीं पा रही हैं।
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अमर उजाला ने शनिवार को अयोध्या के परमहंस शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान में युवा वर्ग के साथ संवाद किया तो युवा शक्ति ने खुल कर अपनी बात रखी। एक युवा ने लालच के बजाय हर युवा के हाथों को काम देने वाली सोच पैदा करने की मांग की।
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दूसरे युवा ने कहा कि जनप्रतिनिधि चला चली की बेला में अति सक्रिय हो जाते हैं। यदि यही सक्रियता पांच वर्ष तक बनी रहे तो विधानसभा क्षेत्र से लेकर प्रदेश की हालत सुधरने में देर नहीं लगेगी। एक युवा ने प्रतिभा पलायन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि प्रतिभाओं को उनकी योग्यता के अनुसार काम नहीं मिल पा रहा है जिससे हमारे देश की युवा शक्ति विदेश चली जा रही है।
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ऐसी नीति हो कि ब्रेन ड्रेन पर विराम लगे। एक युवा ने जाति-धर्म की राजनीति बुरी बताते हुए कहा कि जब तक यह चलता रहेगा, तब तक विकास होने वाला नहीं है। ऐसे एमएलए को चुनना है जो जाति और धर्म की राजनीति न करता हो। आरक्षण का मुद्दा उठाते हुए एक युवा ने इस पर नए सिरे से समीक्षा करने का वक्त आ गया है।
युवाओं ने कहा कि जनप्रतिनिधि सरल, सहज, विनम्र और व्यापक दृष्टि वाला हो जिससे कि शिक्षा और रोजगार दोनों स्थितियों में सकारात्मक बदलाव आए। नागरिक सुविधाओं की कमी पर भी युवाओं ने अपनी बेबाक राय रखी।
बिजली, पानी, स्वास्थ्य, सड़क और शिक्षा जैसी बुनियादी चीजों को बेहतर करने की मांग जोर शोर से उठी। एक छात्र ने कहा कि कहने को तो यहां ये सब सुविधाएं दी जा रही हैं लेकिन वह सही ढंग से लोगों तक पहुंच नहीं पा रही हैं।