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संवेदनहीन बने रहे डॉक्टर, रोती रहीं प्रसूताएं
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अयोध्या। जिला महिला चिकित्सालय में शुक्रवार को महिला चिकित्सकों ने संवेदनहीनता की पराकाष्ठा पार कर दी। स्टाफ नर्सों से हुए विवाद के बाद बिना किसी सूचना के डॉक्टर हड़ताल पर चली गईं। प्रसव पीड़ितएं वार्डों में कराहती रहीं, उनके आंसू बह रहे थे। 36 घंटे से ओटी नहीं चली। ऑपरेशन नहीं हुए।
पूरे अस्पताल में हाहाकार मच गया। अस्पताल प्रशासन भी मूकदर्शक बना रहा। इसकी जानकारी डीएम को हुई तो उन्होंने सीएमओ से इस बाबत बात की और कड़ा रुख अपनाया, तब महिला चिकित्सालय में प्रसव पीड़ा से छटपटा रहीं महिलाओं को ओटी ले जाया गया और उनके ऑपरेशन शुरू हुए।
जिला महिला चिकित्सालय में गुरुवार को स्टाफ नर्सों ने एक महिला चिकित्सक पर अभद्रता का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया था, इसके जवाब में शुक्रवार को चिकित्सक भी लामबंद हुईं और सीएमएस को स्टाफ नर्सों पर अभद्रता करने का आरोप लगाते हुए शिकायती पत्र दिया। इसके बाद हड़ताल पर चली गईं। इससे दूसरे दिन भी प्रसव पीड़िताएं परेशान रहीं।
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गुरुवार को करीब 11 प्रसव पीड़िताओं को रेफर कर दिया गया था। पहले से भर्ती महिलाओं का सीजेरियन प्रसव हुआ नहीं, शुक्रवार को भी चिकित्सकों की हड़ताल से ओटी, लेबर रूम में सन्नाटा पसरा रहा। शुक्रवार को ऑपरेशन न हो पाने से हाहाकार मच गया। प्रसव पीड़ा से महिलाएं वार्डों में कराहती रहीं। तीमारदार बार-बार ओटी का चक्कर काटते रहे।
किसी तीमारदार ने मामले की शिकायत जिलाधिकारी नितीश कुमार से कर दी तो महकमा हरकत में आया। सीएमओ डॉ. अजय राजा ने सीएमएस डॉ. आरपी वर्मा को फोन करके अविलंब सेवाएं बहाल करने का निर्देश दिया। इसके बाद घंटों से चल रही वार्ता बंद हुई और सीएमएस ने स्वयं ओटी पहुंचकर गंभीर रूप से पीड़ित महिलाओं का ऑपरेशन करवाया। थोड़ी देर बाद सेवाएं बहाल हुईं और मरीजों ने राहत की सांस ली।
जिला महिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. आरपी वर्मा ने बताया कि स्टाफ नर्सों से विवाद के बाद चिकित्सकों ने शुक्रवार को सीजेरियन ऑपरेशन नहीं किया। बिना किसी सूचना के हड़ताल करने लगीं जो गलत है। पत्र भेजकर मामले से उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है। निर्देश प्राप्त होने पर संबंधित पर कार्रवाई भी की जाएगी। हालांकि, दोपहर तक आपसी बातचीत के आधार पर मामला सुलझ गया और सेवाएं बहाल हुईं।
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पूरे अस्पताल में हाहाकार मच गया। अस्पताल प्रशासन भी मूकदर्शक बना रहा। इसकी जानकारी डीएम को हुई तो उन्होंने सीएमओ से इस बाबत बात की और कड़ा रुख अपनाया, तब महिला चिकित्सालय में प्रसव पीड़ा से छटपटा रहीं महिलाओं को ओटी ले जाया गया और उनके ऑपरेशन शुरू हुए।
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जिला महिला चिकित्सालय में गुरुवार को स्टाफ नर्सों ने एक महिला चिकित्सक पर अभद्रता का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया था, इसके जवाब में शुक्रवार को चिकित्सक भी लामबंद हुईं और सीएमएस को स्टाफ नर्सों पर अभद्रता करने का आरोप लगाते हुए शिकायती पत्र दिया। इसके बाद हड़ताल पर चली गईं। इससे दूसरे दिन भी प्रसव पीड़िताएं परेशान रहीं।
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गुरुवार को करीब 11 प्रसव पीड़िताओं को रेफर कर दिया गया था। पहले से भर्ती महिलाओं का सीजेरियन प्रसव हुआ नहीं, शुक्रवार को भी चिकित्सकों की हड़ताल से ओटी, लेबर रूम में सन्नाटा पसरा रहा। शुक्रवार को ऑपरेशन न हो पाने से हाहाकार मच गया। प्रसव पीड़ा से महिलाएं वार्डों में कराहती रहीं। तीमारदार बार-बार ओटी का चक्कर काटते रहे।
किसी तीमारदार ने मामले की शिकायत जिलाधिकारी नितीश कुमार से कर दी तो महकमा हरकत में आया। सीएमओ डॉ. अजय राजा ने सीएमएस डॉ. आरपी वर्मा को फोन करके अविलंब सेवाएं बहाल करने का निर्देश दिया। इसके बाद घंटों से चल रही वार्ता बंद हुई और सीएमएस ने स्वयं ओटी पहुंचकर गंभीर रूप से पीड़ित महिलाओं का ऑपरेशन करवाया। थोड़ी देर बाद सेवाएं बहाल हुईं और मरीजों ने राहत की सांस ली।
जिला महिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. आरपी वर्मा ने बताया कि स्टाफ नर्सों से विवाद के बाद चिकित्सकों ने शुक्रवार को सीजेरियन ऑपरेशन नहीं किया। बिना किसी सूचना के हड़ताल करने लगीं जो गलत है। पत्र भेजकर मामले से उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है। निर्देश प्राप्त होने पर संबंधित पर कार्रवाई भी की जाएगी। हालांकि, दोपहर तक आपसी बातचीत के आधार पर मामला सुलझ गया और सेवाएं बहाल हुईं।