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डॉक्टर से लेकर अफसर तक सभी लेट
फैजाबाद
Updated Mon, 20 Mar 2017 10:31 PM IST
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सोमवार को जिला अस्पताल में 8.40 मिनट पर डाक्टरों के आने का इंतजार करते मरीज साथ ही एक्स रे रुम पर पसरा सन्नाटा।
- फोटो : अमर उजाला
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सूबे में नई सरकार बनने के बाद सोमवार को पहला दिन भी आवश्यक सेवाओं से लेकर प्रशासनिक कामकाज के बिगड़े ढर्रे का गवाह बना। यह तब था, जब मुख्य सचिव राहुल भटनागर ने प्रदेश में नई सरकार के गठन का हवाला देते हुए कड़ी हिदायत दी थी कि सोमवार से समय से दफ्तर आकर दायित्वों का निर्वहन करें। इसके बाद भी यहां जिला अस्पताल से लेकर अन्य दफ्तरों में खुद आला अधिकारियों ने ही नई सरकार को लेकर पहले आदेश को हवा में उड़ा दिया।
अमर उजाला ने योगी सरकार के पहले दिन यहां पड़ताल की तो कोई खास बदलाव नहीं दिखा। जिला अस्पताल के अधिकतर डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस करते हैं, ज्यादातर शनिवार को बाहर चले जाते हैं, ऐसे में सोमवार को आने में कइयों को दोपहर तक हो जाती है।
जो यहां रहते हैं, उन्हें पहले अपने अस्पताल में सुबह उठकर मरीजों को देखने से लेकर व्यवस्था सहेजने में वक्त लग जाता है। निजी प्रैक्टिस को लेकर तमाम शिकायतों पर अभी भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। हाल यह है कि जिला अस्पताल व सीएमओ के अधीन कुल 38 डॉक्टर अब लापता घोषित कर दिए गए हैं।
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मगर हकीकत में वे या तो पीजी कर रहे हैं या निजी अस्पताल चला रहे हैं। इसमें दो डॉक्टर उजैर अहमद अंसारी व सुधांशु मिश्रा जिला अस्पताल में तैनात हैं। इनकी वजह से तमाम पद खाली होने से मरीजों को झेलना पड़ता है।
जिला अस्पताल में डॉक्टरों की ओपीडी का समय सुबह 8 बजे से दो बजे तक तय है, लेकिन सोमवार को एक भी डॉक्टर 8:30 बजे तक जिला अस्पताल नहीं पहुंचा। दर्जनों मरीज पर्ची बनवाकर दिखाने के लिए इंतजार करते दिखे। यह हाल नौ बजे तक रहा, इसके बाद इक्का-दुक्का डॉक्टरों का आना शुरू हुआ, मगर ओपीडी में इलाज की कवायद शुरू होने में 10 बज गए।
विकास योजनाओं से लेकर समाज कल्याण, प्रोवेशन, कृषि आदि दर्जनों विभागों के मुखिया के दफ्तर विकास भवन में हैं, लेकिन सोमवार कोई अफसर समय से दफ्तर नहीं पहुंचा। हालांकि कर्मचारियों-लिपिकों के कक्षों में आवाजाही शुरू हो गई थी। जिला समाज कल्याण अधिकारी 11 बजे तक नहीं आए, कुर्सी खाली रही। मुख्य विकास अधिकारी अरविंद मल्लपा बंगारी को अवकाश पर बताया गया।
कलेक्ट्रेट में डीएम समेत प्रशासनिक अफसरों के दफ्तर-कोर्ट समेत राजस्व विभाग के भी दर्जनों अधिकारियों के कार्यालय हैं। मगर सोमवार को सवा दस बजे से 11 बजे तक सिर्फ इक्का-दुक्का लिपिक व अन्य कर्मी ही दिखे। डीएम विवेक सीधे आवास से ही 10 बजे अयोध्या निकल गए, रास्ते में एसएसपी अनंतदेव भी पुलिस लाइन स्थित अपने कार्यालय से साथ हो लिए।
डॉक्टर पहले भर्ती मरीजों को वार्ड में देखते हुए ओपीडी में आते हैं, इससे कभी-कभी देरी हो जाती है। - डॉ. हरिओम श्रीवास्तव, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक
मुख्य सचिव के आदेश का कड़ाई से पालन होगा, जो भी कर्मचारी या अधिकारी बेवजह लेट आएगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। - विवेक, जिलाधिकारी
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अमर उजाला ने योगी सरकार के पहले दिन यहां पड़ताल की तो कोई खास बदलाव नहीं दिखा। जिला अस्पताल के अधिकतर डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस करते हैं, ज्यादातर शनिवार को बाहर चले जाते हैं, ऐसे में सोमवार को आने में कइयों को दोपहर तक हो जाती है।
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जो यहां रहते हैं, उन्हें पहले अपने अस्पताल में सुबह उठकर मरीजों को देखने से लेकर व्यवस्था सहेजने में वक्त लग जाता है। निजी प्रैक्टिस को लेकर तमाम शिकायतों पर अभी भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। हाल यह है कि जिला अस्पताल व सीएमओ के अधीन कुल 38 डॉक्टर अब लापता घोषित कर दिए गए हैं।
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मगर हकीकत में वे या तो पीजी कर रहे हैं या निजी अस्पताल चला रहे हैं। इसमें दो डॉक्टर उजैर अहमद अंसारी व सुधांशु मिश्रा जिला अस्पताल में तैनात हैं। इनकी वजह से तमाम पद खाली होने से मरीजों को झेलना पड़ता है।
जिला अस्पताल में डॉक्टरों की ओपीडी का समय सुबह 8 बजे से दो बजे तक तय है, लेकिन सोमवार को एक भी डॉक्टर 8:30 बजे तक जिला अस्पताल नहीं पहुंचा। दर्जनों मरीज पर्ची बनवाकर दिखाने के लिए इंतजार करते दिखे। यह हाल नौ बजे तक रहा, इसके बाद इक्का-दुक्का डॉक्टरों का आना शुरू हुआ, मगर ओपीडी में इलाज की कवायद शुरू होने में 10 बज गए।
विकास योजनाओं से लेकर समाज कल्याण, प्रोवेशन, कृषि आदि दर्जनों विभागों के मुखिया के दफ्तर विकास भवन में हैं, लेकिन सोमवार कोई अफसर समय से दफ्तर नहीं पहुंचा। हालांकि कर्मचारियों-लिपिकों के कक्षों में आवाजाही शुरू हो गई थी। जिला समाज कल्याण अधिकारी 11 बजे तक नहीं आए, कुर्सी खाली रही। मुख्य विकास अधिकारी अरविंद मल्लपा बंगारी को अवकाश पर बताया गया।
कलेक्ट्रेट में डीएम समेत प्रशासनिक अफसरों के दफ्तर-कोर्ट समेत राजस्व विभाग के भी दर्जनों अधिकारियों के कार्यालय हैं। मगर सोमवार को सवा दस बजे से 11 बजे तक सिर्फ इक्का-दुक्का लिपिक व अन्य कर्मी ही दिखे। डीएम विवेक सीधे आवास से ही 10 बजे अयोध्या निकल गए, रास्ते में एसएसपी अनंतदेव भी पुलिस लाइन स्थित अपने कार्यालय से साथ हो लिए।
डॉक्टर पहले भर्ती मरीजों को वार्ड में देखते हुए ओपीडी में आते हैं, इससे कभी-कभी देरी हो जाती है। - डॉ. हरिओम श्रीवास्तव, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक
मुख्य सचिव के आदेश का कड़ाई से पालन होगा, जो भी कर्मचारी या अधिकारी बेवजह लेट आएगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। - विवेक, जिलाधिकारी