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कानपुर के मंडलायुक्त डॉ राजशेखर की डिस्चार्ज अर्जी खारिज
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अयोध्या। कानपुर के मंडलायुक्त राजशेखर को आरोप मुक्त करने की अर्जी को सीजेएम कोर्ट ने खारिज कर दिया। यह मामला वर्ष 2006 का है। राजशेखर पर आरोप है कि उन्होंने बतौर एसडीएम सदर एक अधिवक्ता की दीवार गिरवा दी थी। सीजेएम संजीव कुमार त्रिपाठी ने मामले की सुनवाई करते हुए आरोप मुक्त करने का प्रार्थना पत्र खारिज करते हुए 22 अप्रैल को सभी आरोपियों को व्यक्तिगत तौर से अदालत में उपस्थित होने का आदेश दिया है।
गोसाईगंज थाना क्षेत्र के आनापुर सरैया निवासी अधिवक्ता सुरेंद्र कुमार सिंह का आरोप था कि एसडीएम सदर के पद पर तैनाती के दौरान राजशेखर ने उनकी दीवार गिरा दी थी। इस कार्रवाई के खिलाफ कोर्ट में इस्तगासा दाखिल किया गया था। मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने वर्ष 2006 में तत्कालीन एसडीएम राजशेखर, नायब तहसीलदार गोसाईगंज संगम लाल गुप्ता, लेखपाल राम किशोर समेत अन्य लोगों को जान से मार डालने की धमकी देने, अपमानित करने सहित अन्य धाराओं में विचारण के लिए तलब किया था।
इसमें हाजिर होकर सभी अभियुक्तों ने जमानत करवाई की थी। इसके बाद अधिवक्ता का बयान हुआ तो राजशेखर ने खुद को राजपत्रित अधिकारी बताते हुए बगैर अभियोजन स्वीकृति मुकदमा न चलाए जाने के आधार पर खुद को आरोप मुक्त करने के लिए कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया था। अब मामले की अगली तिथि पर सभी आरोपियों के खिलाफ आरोप तय होंगे।
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गोसाईगंज थाना क्षेत्र के आनापुर सरैया निवासी अधिवक्ता सुरेंद्र कुमार सिंह का आरोप था कि एसडीएम सदर के पद पर तैनाती के दौरान राजशेखर ने उनकी दीवार गिरा दी थी। इस कार्रवाई के खिलाफ कोर्ट में इस्तगासा दाखिल किया गया था। मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने वर्ष 2006 में तत्कालीन एसडीएम राजशेखर, नायब तहसीलदार गोसाईगंज संगम लाल गुप्ता, लेखपाल राम किशोर समेत अन्य लोगों को जान से मार डालने की धमकी देने, अपमानित करने सहित अन्य धाराओं में विचारण के लिए तलब किया था।
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इसमें हाजिर होकर सभी अभियुक्तों ने जमानत करवाई की थी। इसके बाद अधिवक्ता का बयान हुआ तो राजशेखर ने खुद को राजपत्रित अधिकारी बताते हुए बगैर अभियोजन स्वीकृति मुकदमा न चलाए जाने के आधार पर खुद को आरोप मुक्त करने के लिए कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया था। अब मामले की अगली तिथि पर सभी आरोपियों के खिलाफ आरोप तय होंगे।
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