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रामनगरी के प्राचीन मंदिरों का इतिहास जान सकेंगे भक्त

Tue, 06 Jul 2021 12:12 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 06 Jul 2021 12:12 AM IST
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Devotees will be able to know the history of ancient temples of Ramnagari
अयोध्या। रामनगरी को वैश्विक आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी है। रामनगरी की पौराणिकता को सहेजते हुए इसे आधुनिक स्वरूप प्रदान किया जाना है।
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अयोध्या आने वाले भक्त रामनगरी की आध्यात्मिकता के साथ-साथ उसकी प्राचीनता और पौराणिकता से भी रू-ब-रू हो सकेंगे। अयोध्या के बहुआयामी विकास के लिए तैयार किए गए विजन डॉक्यूमेंट में रामनगरी के प्राचीन मंदिरों के दस्तावेजीकरण की योजना तैयार की गई है।
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रामनगरी में करीब 10 हजार मंदिर हैं। अधिकांश मंदिर दो सौ वर्ष से भी अधिक पुराने हैं। सबकी अपनी अलग-अलग मान्यताएं और पौराणिक कहानियां हैं।
सरकार की रामनगरी को वैश्विक आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विकसित करने की जो योजना है। उसके तहत पौराणिक महत्व के मंदिरों का वास्तुकला के अनुसार विकास किया जाएगा।
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साथ ही रामनगरी में आध्यात्मिक सद्भाव को बढ़ावा दिए जाने का भी प्रयास है। इसको लेकर यहां प्राचीन मंदिरों के सुंदरीकरण के साथ-साथ सिक्ख धर्म के गुरुद्वारा ब्रह्मकुंड व दिगंबर जैन मंदिर अयोध्या के भी संरक्षण व संवर्धन की योजना है।
विजन डॉक्यूमेंट में बनी योजना के अनुसार रामनगरी के ऐसे मंदिर जिनका इतिहास सैकड़ों वर्ष पुराना है उनका दस्तावेजीकरण किया जाएगा। विकास प्राधिकरण द्वारा रामनगरी के सदियों पुराने मंदिरों को चिह्नित कर उनके इतिहास की जानकारी हासिल की जाएगी।
इसमें मंदिर का इतिहास, मान्यताएं, उसकी परंपरा, पर्व, त्योहार, उत्सव, समैया, आदि की जानकारी हासिल करते हुए इसे एक पुस्तक में समाहित किया जाएगा। इसको लेकर काम शुरू हो गया है।
रामनगरी के प्राचीन मंदिरों को चिह्नित किया जा रहा है। अयोध्या में हजारों की संख्या में ऐसे मंदिर हैं जिनका इतिहास दो सौ से लेकर पांच सौ वर्ष तक पुराना है। इन मंदिरों के इतिहास की जानकारी हासिल की जा रही है।
बाद में इनका दस्तावेजीकरण किया जाएगा, ताकि अयोध्या आने वाले भक्तों को रामनगरी की प्राचीनता, पौराणिकता की जानकारी हासिल हो सके।
किसी भी इतिहास को प्रमाणित करनेे में ग्रंथ, शिलालेख और पुरातात्विक साक्ष्यों की अनिवार्यता होती है। इसमें लोक मान्यता का भी साक्ष्य अवश्य होता है। एडवर्ड के 148 माइलस्टोन आज भी रामनगरी की पौराणिकता बताते हैं।
फैजाबाद गजेटियर के अनुसार 1902 में तत्कालीन आईसीएस आरसी होबर्ट, जिलाधिकारी फैजाबाद ने इस नगरी की पौराणिकता को देखते हुए एडवर्ड अयोध्या तीर्थ विवेचनी सभा नाम की एक समिति का गठन किया था।
जिसने 148 पौराणिक स्थलों के खोजकर वहां एक-दूसरे से दूरी चिह्नित करके पत्थर लगवाए थे। यह आज भी रामनगरी की पौराणिकता बयां करते हैं।
सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर के पक्ष में फैसला के लिए यह माइल स्टोन अहम सबूत माने गए थे। विजन डॉक्यूमेंट में 148 माइल स्टोन में शामिल रामनगरी के प्राचीन कुंड जो कि पौराणिकता के गवाह हैं उनके भी संरक्षण की योजना है।
रामनगरी में बड़ी संख्या में ऐसे मंदिर हैं जिनका उल्लेख शास्त्रों, पुराणों में दर्ज है। सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी, कनकभवन, रामलला व छोटी देवकाली मंदिर न सिर्फ भक्तों की आस्था का केंद्र हैं बल्कि पौराणिकता के भी गवाह हैं।
नयाघाट स्थित नागेश्वरनाथ मंदिर की स्थापना भगवान श्रीराम के पुत्र कुश व क्षीरेश्वरनाथ की स्थापना महाराजा दशरथ द्वारा किए जाने का उल्लेख धार्मिक ग्रंथों में मिलता है।

रामचरित मानस में लिखा है कि अयोध्या के उत्तर दिशा में सरयू प्रवाहित हैं। सरयू सदियों से लाखों भक्तों की आस्था का केंद्र है। इसके अलावा शेषावतार मंदिर, कालेेराममंदिर, दशरथमहल, सीता रसोई, लाल साहब दरबार, जालपा देवी जैसे सैकड़ों की संख्या में ऐसे मंदिर हैं जो रामनगरी की पौराणिकता के गवाह हैं। रामनगरी में दर्जनों कुंड है जो त्रेतायुगीन माने जाते हैं, इनका उल्लेख भी कई जगह हैं।
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