फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ayodhya News ›   Desperate to touch the red waves of Sarayu

लाल निशान छूने को बेताब सरयू की लहरें

Sat, 16 Jul 2016 10:46 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/अयोध्या
अमर उजाला ब्यूरो/अयोध्या Updated Sat, 16 Jul 2016 10:46 PM IST
विज्ञापन
Desperate to touch the red waves of Sarayu
सरयू के पानी से घिरा पिपरी संग्राम गांव। - फोटो : अमर उजाला
पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही बारिश से सरयू का जलस्तर तेजी से लाल निशान की ओर बढ़ने लगा है। इसके चलते कछार के क्षेत्रों में बाढ़ के संभावित खतरे को लेकर हलचल मच गई है। सदर तहसील के पूरा ब्लॉक का पिपरी संग्राम गांव सरयू के पानी से घिर गया है।
विज्ञापन


लोग नाव से घरों में आ-जा रहे हैं। नदी के बढ़ते-घटते जलस्तर से तटीय इलाकों में कटान का खतरा भी बढ़ गया है। हालांकि अभी सरयू खतरे के निशान से 45 सेंटीमीटर नीचे है। सरयू नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी रुक-रुक कर जारी है।
विज्ञापन


सप्ताह भर से आधे से एक सेंटीमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से बढ़ रहा जलस्तर शुक्रवार शाम 92.340 सेंटीमीटर पर स्थिर होने के बाद मध्य रात्रि से घटने लगा लेकिन सुबह फिर से नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी दर्ज की जाने लगी है।
विज्ञापन
विज्ञापन


हालांकि सरयू अभी भी खतरे के निशान 92.730 मीटर से नीचे है, लेकिन जानकारों की मानें तो मानसूनी बारिश चारों ओर शुरू हो जाने से नदी के जलस्तर में वृद्धि तेजी से शुरू होगी। पिछले तीन दिनों से तेजी बढ़ रहा जलस्तर स्थिर होने के बाद घटने के साथ ही अब बढ़ने लगा है।

केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक, शनिवार शाम पांच बजे जलस्तर 92.280 मीटर दर्ज किया गया। नदी का जलस्तर आधे से एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। आयोग के मुताबिक, रविवार को जलस्तर 92.400 मीटर तक पहुंचने की संभावना है।

नदी में बढ़ते जलस्तर से सदर तहसील के पूरा व मया ब्लॉक के तटीय इलाकों में बाढ़ के खतरे से एक बार फिर हलचल मच गई है। पूराबाजार प्रतिनिधि के अनुसार, सरयू में गत वर्ष आई बाढ़ में जो लोग अपना सब कुछ गंवा दिए थे वे तटबंध व पिपरी संग्राम गांव के सामने नदी के दो पाटों के बीच ऊंचे स्थान पर फूस का घर बनाकर जीवनयापन कर रहे हैं।

अब यह स्थान नदी के पानी से घिर गया है। गांव के झुरई निषाद, मंगरू निषाद, हरि निषाद व राकेश निषाद ने बताया कि घर तक जाने के लिए नाव ही एक मात्र सहारा है। रोजमर्रा का सामान लेने या स्कूली बच्चों को कछार के गांवों में बनें स्कूलों में पढ़ने भेजने के लिए प्रतिदिन नाव का सहारा लेना पड़ता है।


हम लोगों ने मिलकर निजी नाव बना रखी है। उसी से बारी-बारी काम निपटाना पड़ता है। ग्राम प्रधान तेज बहादुर निषाद बताते हैं कि नदी के बीच बसे दर्जनों परिवारों की जिंदगी काफी कठिन है। रोजमर्रा का सामान पाने के लिए लोगों को कठिनाइयों का सामान करना पड़ रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed