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सियाराम की मौजूदगी में अयोध्या के रामराज्य पर चर्चा

Fri, 13 Nov 2020 11:51 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 13 Nov 2020 11:51 PM IST
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अयोध्या। अयोध्या के राजा श्रीराम की मौजूदगी में शुक्रवार को रामराज्य पर चर्चा हुई। चौथे दीपोत्सव में पीएम मोदी की कल्पना की अयोध्या का कुछ हिस्सा भी सामने आ गया। सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भविष्य की अयोध्या को लेकर जो खाका खींचा उससे इसकी झलक मिल गई। संकेत रहा कि अयोध्या विश्व का ऐसा वैदिक शहर हो, जहां से त्रेता की तरह सर्वमान्य सिद्धांत का सृजन हो सके। इसके लिए अयोध्यावासियों के सहयोग की अपेक्षा भी मुख्यमंत्री योगी कर गए।
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रामनगरी में रामराज्य पर चर्चा होना स्वाभाविक है लेकिन यह खास तब हो जाता है जब भगवान श्रीराम के लंका विजय करके अयोध्या आने पर राज्याभिषेक के बाद सियाराम की मौजूदगी में व्यवस्था तंत्र का संचालन करने वाले मुखिया इसकी चर्चा करें और अयोध्या के लोग साक्षी भाव से वहां मौजूद हों। सामान्य जीवन में भले ही विग्रह स्वरूप प्रतीकों का महत्व न हो लेकिन आध्यात्मिक और धार्मिक परंपरा में यह अति महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे हृदय के उद्गार और संकल्प के तौर पर लिया जाता है। ऐसे में अयोध्या को लेकर जो भी कहा गया वह भविष्य का संकेत ही नहीं संकल्प भी कहा जाएगा।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में जो कुछ भी कहा उसमें महत्वपूर्ण सब कुछ प्रधानमंत्री मोदी की परिकल्पना की अयोध्या के सहारे चर्चा की। उन्होेंने अयोध्या में प्रधानमंत्री के आगमन के समय साष्टांग प्रणाम को प्रभु श्रीराम और अयोध्या के प्रति नतमस्तक भाव के जरिए अयोध्या के प्रति पीएम की श्रद्धा के रूप में व्याख्यायित किया और यहीं से शुरू होता है अयोध्या की महिमा के अनुरूप पीएम मोदी की कल्पना की अयोध्या की चर्चा की।
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उन्होंने कई दर्जन बार पीएम मोदी के हवाले से अयोध्या के विकास की एक-एक करके योजनाएं गिनाई। विश्व की सबसे सुंदर वैदिक नगरी और विराट अयोध्या का नए सिरे से सृजन इसके मूल मेें रहा।
भले ही श्रीराम मंदिर पर न्यायालय से फैसला नहीं आया था लेकिन अयोध्या को वैश्विक नगरी के रूप में विकास को लेकर शुरुआत प्रधानमंत्री मोदी के पहले कार्यकाल में ही हो गया था। भले ही इसका खुलासा नहीं हुआ लेकिन अपने सांसद लल्लू सिंह के जरिए पीएम ने पूरी विराट अयोध्या की मैपिंग कराकर रिपोर्ट तैयार करा ली थी।
सूत्रों का कहना है कि यह प्रोजेक्ट रिपोर्ट लगभग चार साल पहले ही पीएमओ, पर्यटन मंत्रालय के साथ अन्य मंत्रालयों तक पहुंच गई थी। इसके बाद ही यहां 84 कोसी परिक्रमा पथ के फोर लेन, एयरपोर्ट, अयोध्या को जोड़ने वाली चारों दिशाओं से फोर लेन सड़कें, राम मंदिर मॉडल पर अयोध्या रेलवे स्टेशन आदि की घोषणा के साथ निर्माण का काम शुरू हुआ था।

मुख्यमंत्री योगी ने वैदिक नगरी अयोध्या के दूसरे पहलू की ओर भी संकेत किया। न केवल भौतिक विकास बल्कि अयोध्या की गहराइयों पर शोध और वैचारिक चिंतन पर अयोध्या के लोगों से सहयोग मांग इसकी जड़ों तक पहुंचने का संकेत दिया जहां से संस्कृति, संस्कार और अध्यात्म के बीज अंकुरित होते हैं। शोध और विचार के कई बिंदुओं श्रीराम जहां-जहां गए, भरत जी के आदर्श जैसे बिंदुओं के जरिए संकेत किया। रामराज्य की चर्चा देर तक चली। इसमें किसी के साथ अन्याय न होने देने को याद दिलाया। अतीत के 492 साल की यादों के सहारे अयोध्यावासियों की पीड़ा पर सीएम की संवेदना फूटी। कहा कि अयोध्यावासियों ने धैर्य का परिचय दिया लेकिन अब अयोध्या के वैश्विक नगरी बनने के समय आ गया है।
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