{"_id":"5ff35c758ebc3e40fb198791","slug":"death-faizabad-news-lko558178425","type":"story","status":"publish","title_hn":"रामलला की हर आरती में शामिल होने का मौका चाहते हैं रामभक्त, ट्रस्ट इसकी तैयारी में जुटा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रामलला की हर आरती में शामिल होने का मौका चाहते हैं रामभक्त, ट्रस्ट इसकी तैयारी में जुटा
Mon, 04 Jan 2021 11:50 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अयोध्या
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अयोध्या
Published by: लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 04 Jan 2021 11:50 PM IST
विज्ञापन
रामलला का सजा भव्य विग्रह
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अयोध्या में रामलला को न्याय मिले एक साल से ज्यादा वक्त हो चुका है। रामलला टेंट से निकलकर अस्थायी मंदिर में चांदी के सिंहासन पर भी विराजमान हो गए हैं। बावजूद इसके आम भक्त अब तक अपने आराध्य की आरती में शामिल होने से महरूम रहे। अब जाकर सिर्फ शाम की आरती में शामिल होने की इजाजत मंगलवार से होगी वह भी महज 30 लोगों को। इस बात का संतों व भक्तों को मलाल भी है। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट अब तक रामलला की सभी आरती में आम भक्तों को शामिल करने की व्यवस्था नहीं कर सका है।
9 नवंबर, 2019 को रामलला के हक में निर्णय आने के बाद रामभक्तों की सदियों की परिकल्पना पूरी हुई। मार्च 2020 में स्वंय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रामलला को अस्थायी मंदिर में चांदी के सिंहासन पर विराजमान किया। इसके बाद रामभक्तों की दुश्वारियों जरूर कम हुईं, लोहे के जालों से छुटकारा मिला, परन्तु आज भी रामभक्त अपने आराध्य की आरती उतारने की इच्छा पूरी नहीं कर पा रहे हैं। रामलला की आरती सुबह से लेकर रात तक कुल मिलाकर पांच बार होती है। रामलला के दर्शन का समय भी निश्चित है। सुबह-शाम चार-चार घंटे दो पालियों में भक्त रामलला का दर्शन करते हैं। वर्तमान समय में सुबह सात से 11 व दोपहर दो से 6 बजे तक दर्शन की सुविधा है। हालांकि, श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट अभी तक रामभक्तों के लिए सभी आरती में शामिल होने की व्यवस्था नहीं कर सका है।
रामनगरी के संत भी चाहते हैं कि अब अयोध्या के संतों सहित आम भक्तों को रामलला की आरती में शामिल किए जाने की व्यवस्था ट्रस्ट को करना चाहिए। संत समिति के अध्यक्ष महंत कन्हैया दास रामायणी ने कहा कि सारी व्यवस्थाएं हो रही हैं। उम्मीद है कि जल्द ही हम सभी को रामलला की सभी आरती में शामिल होने का सौभाग्य प्राप्त होगा। महंत परमहंस दास ने ट्रस्ट से मांग की है कि रामलला की सभी आरती में आम भक्तों को शामिल करने के लिए ट्रस्ट को व्यवस्था करनी चाहिए। इसके लिए यदि दर्शन का समय बढ़ाना पड़े तो बढ़ाया जाए। संत रामभूषण दास कृपालु महाराज भी कहते हैं कि भक्तों को आरती में शामिल न हो पाने का मलाल तो है ही। ट्रस्ट को व्यवस्था करनी चाहिए।
विज्ञापन
विराजमान रामलला के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास बताते हैं कि प्रशासन द्वारा तय दर्शन अवधि के मुताबिक मंदिर की आरती का समय भी तय करना पड़ा है। अयोध्या में हर मंदिर की अलग-अलग आरती की परंपरा है। रामलला की सुबह 6 बजे मंगला आरती होती है। फिर दर्शन शुरू होने से पहले सुबह पौने सात बजे शृंगार आरती होती है। इसके बाद पट खुल जाता है और भक्त दर्शन करते हैं। 11 बजे दर्शन बंद होने के बाद भोग आरती होती है। फिर शाम पांच बजे दर्शन बंद होते ही संध्या आरती की जाती है। आखिरी आरती रात सात बजे शयन आरती होती है।
रामलला की आरती में आम भक्तोंको शामिल करने की व्यवस्था जल्द: ट्रस्ट
हम भी चाहते हैं कि भक्तों को रामलला की सभी आरती का साक्षी बनने का सुअवसर प्राप्त हो। ट्रस्ट इसकी तैयारी में जुटा है। उम्मीद है कि जल्द ही भक्त रामलला की आरती उतार सकेंगे।
डॉ. अनिल मिश्र, ट्रस्टी श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट
विज्ञापन
9 नवंबर, 2019 को रामलला के हक में निर्णय आने के बाद रामभक्तों की सदियों की परिकल्पना पूरी हुई। मार्च 2020 में स्वंय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रामलला को अस्थायी मंदिर में चांदी के सिंहासन पर विराजमान किया। इसके बाद रामभक्तों की दुश्वारियों जरूर कम हुईं, लोहे के जालों से छुटकारा मिला, परन्तु आज भी रामभक्त अपने आराध्य की आरती उतारने की इच्छा पूरी नहीं कर पा रहे हैं। रामलला की आरती सुबह से लेकर रात तक कुल मिलाकर पांच बार होती है। रामलला के दर्शन का समय भी निश्चित है। सुबह-शाम चार-चार घंटे दो पालियों में भक्त रामलला का दर्शन करते हैं। वर्तमान समय में सुबह सात से 11 व दोपहर दो से 6 बजे तक दर्शन की सुविधा है। हालांकि, श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट अभी तक रामभक्तों के लिए सभी आरती में शामिल होने की व्यवस्था नहीं कर सका है।
विज्ञापन
रामनगरी के संत भी चाहते हैं कि अब अयोध्या के संतों सहित आम भक्तों को रामलला की आरती में शामिल किए जाने की व्यवस्था ट्रस्ट को करना चाहिए। संत समिति के अध्यक्ष महंत कन्हैया दास रामायणी ने कहा कि सारी व्यवस्थाएं हो रही हैं। उम्मीद है कि जल्द ही हम सभी को रामलला की सभी आरती में शामिल होने का सौभाग्य प्राप्त होगा। महंत परमहंस दास ने ट्रस्ट से मांग की है कि रामलला की सभी आरती में आम भक्तों को शामिल करने के लिए ट्रस्ट को व्यवस्था करनी चाहिए। इसके लिए यदि दर्शन का समय बढ़ाना पड़े तो बढ़ाया जाए। संत रामभूषण दास कृपालु महाराज भी कहते हैं कि भक्तों को आरती में शामिल न हो पाने का मलाल तो है ही। ट्रस्ट को व्यवस्था करनी चाहिए।
विज्ञापन
विराजमान रामलला के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास बताते हैं कि प्रशासन द्वारा तय दर्शन अवधि के मुताबिक मंदिर की आरती का समय भी तय करना पड़ा है। अयोध्या में हर मंदिर की अलग-अलग आरती की परंपरा है। रामलला की सुबह 6 बजे मंगला आरती होती है। फिर दर्शन शुरू होने से पहले सुबह पौने सात बजे शृंगार आरती होती है। इसके बाद पट खुल जाता है और भक्त दर्शन करते हैं। 11 बजे दर्शन बंद होने के बाद भोग आरती होती है। फिर शाम पांच बजे दर्शन बंद होते ही संध्या आरती की जाती है। आखिरी आरती रात सात बजे शयन आरती होती है।
रामलला की आरती में आम भक्तोंको शामिल करने की व्यवस्था जल्द: ट्रस्ट
हम भी चाहते हैं कि भक्तों को रामलला की सभी आरती का साक्षी बनने का सुअवसर प्राप्त हो। ट्रस्ट इसकी तैयारी में जुटा है। उम्मीद है कि जल्द ही भक्त रामलला की आरती उतार सकेंगे।
डॉ. अनिल मिश्र, ट्रस्टी श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट