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लोकतंत्र के कुंभ में सब कुछ शांति से निपटा
फैजाबाद
Updated Mon, 27 Feb 2017 10:42 PM IST
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सोमवार को मतदान के दौरान शहर के व्यस्ततम इलाके चौक में पसरा सन्नाटा।
- फोटो : अमर उजाला
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सोमवार को हुए मतदान के दौरान जिले में मतदान केंद्रों पर संगीनें तनी रहीं, तो सड़कों पर वाहनों से लेकर आम लोगों की आवाजाही जारी रही। लोकतंत्र के कुंभ में आम लोगों के भीतर उत्साह हिलोरें मारता नजर आया। आम व खास सबकी भागीदारी रही, मगर आयोग की हनक व आम आदमी की फितरत ने कमाल कर दिखाया।
न तो कहीं लट्ठम-लट्ठा हुई और न उपद्रव। बस केवल ईवीएम की खराबी जैसी यांत्रिक दिक्कतें ही सुनाई पड़ीं। पुलिस के डंडा फटकारे बगैर शहर से गांव तक हालात शांत रहे। नगर क्षेत्र में दुकानें,प्रतिष्ठान व कारखाने बंद रहे,आम जन-जीवन शांत रहा अलबत्ता ग्रामीण क्षेत्रों में दुकानें जरूर खुली नजर आयीं।
विधानसभा चुनाव में सोमवार को मतदान के दौरान जिन बूथों पर कभी डंडाधारी पुलिस की तैनाती होती थी, वहां पूरे समय पैरामिलेट्री फोर्स के जवान संगीनें ताने नजर आए। इसका असर रहा कि मतदान केंद्र को छोड़ उसके बाहर भी 200 मीटर तक पूर्व के चुनाव की तरह भीड़ नहीं दिखाई पड़ी।
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मतदान केंद्रों के आस-पास लगाए गए सियासी दलों के शिविरों में हलचल रही, मगर सब कुछ शांतिपूर्ण निपट गया। पूर्व के आम चुनावों में जिले के संवेदनशील व अतिसंवेदनशील बूथों पर ही पीएसी व पुलिस केरायफलधारी लगाए जाते थे। ज्यादातर बूथों पर पुलिस व होमगार्ड केजवान डंडे के साथ तैनात होते थे।
साथ में उनके सहयोग के लिए गांव के चौकीदार लगाए जाते थे, लेकिन इस बार मतदान केंद्रों का नजारा बदला हुआ था। शायद ही कोई ऐसा बूथ रहा हो, जहां संगीनधारी न दिखाई पड़ा हो। ज्यादातर बूथों पर केंद्रीय अर्धसैनिक बल के जवानों की संगीनें तनीं थी, केवल सिंगल बूथ वाले मतदान केंद्रों पर ही पुलिस बल के जवान नजर आ रहे थे।
सेक्टर मोबाइल दस्ते, सेक्टर मजिस्ट्रेट व पुलिस महकमे के राजपत्रित अधिकारी लगातार भ्रमण पर थे। वायरलेस पर ऑल इज ओके की रिपोर्ट गूंज रही थी। अमूमन बूथों के आस-पास तमाशबीनों का मजमा लगा हुआ करता था, लेकिन इस बारतमाशबीनों की संख्या कम नजर आई।
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न तो कहीं लट्ठम-लट्ठा हुई और न उपद्रव। बस केवल ईवीएम की खराबी जैसी यांत्रिक दिक्कतें ही सुनाई पड़ीं। पुलिस के डंडा फटकारे बगैर शहर से गांव तक हालात शांत रहे। नगर क्षेत्र में दुकानें,प्रतिष्ठान व कारखाने बंद रहे,आम जन-जीवन शांत रहा अलबत्ता ग्रामीण क्षेत्रों में दुकानें जरूर खुली नजर आयीं।
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विधानसभा चुनाव में सोमवार को मतदान के दौरान जिन बूथों पर कभी डंडाधारी पुलिस की तैनाती होती थी, वहां पूरे समय पैरामिलेट्री फोर्स के जवान संगीनें ताने नजर आए। इसका असर रहा कि मतदान केंद्र को छोड़ उसके बाहर भी 200 मीटर तक पूर्व के चुनाव की तरह भीड़ नहीं दिखाई पड़ी।
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मतदान केंद्रों के आस-पास लगाए गए सियासी दलों के शिविरों में हलचल रही, मगर सब कुछ शांतिपूर्ण निपट गया। पूर्व के आम चुनावों में जिले के संवेदनशील व अतिसंवेदनशील बूथों पर ही पीएसी व पुलिस केरायफलधारी लगाए जाते थे। ज्यादातर बूथों पर पुलिस व होमगार्ड केजवान डंडे के साथ तैनात होते थे।
साथ में उनके सहयोग के लिए गांव के चौकीदार लगाए जाते थे, लेकिन इस बार मतदान केंद्रों का नजारा बदला हुआ था। शायद ही कोई ऐसा बूथ रहा हो, जहां संगीनधारी न दिखाई पड़ा हो। ज्यादातर बूथों पर केंद्रीय अर्धसैनिक बल के जवानों की संगीनें तनीं थी, केवल सिंगल बूथ वाले मतदान केंद्रों पर ही पुलिस बल के जवान नजर आ रहे थे।
सेक्टर मोबाइल दस्ते, सेक्टर मजिस्ट्रेट व पुलिस महकमे के राजपत्रित अधिकारी लगातार भ्रमण पर थे। वायरलेस पर ऑल इज ओके की रिपोर्ट गूंज रही थी। अमूमन बूथों के आस-पास तमाशबीनों का मजमा लगा हुआ करता था, लेकिन इस बारतमाशबीनों की संख्या कम नजर आई।