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आठ घंटे में निपटे तीन हजार के इंटरव्यू
अमर उजाला ब्यूरो/फैजाबाद
Updated Wed, 30 Mar 2016 11:53 PM IST
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फैजाबाद। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से संविदा पर हो रही 20 डॉक्टर समेत 183 चिकित्सकीय स्टाफ के चयन की बनाई गई मेरिट सवालों में घिर गई है। इनकी नियुक्ति में 10 हजार अभ्यर्थी आए।
इसमें बुधवार को आठ घंटे में तीन हजार का इंटरव्यू निपटा दिया गया, जबकि एएनएम और स्टाफ नर्स की नियुक्ति में भी तीन दिन में सात हजार से अधिक अभ्यर्थियों का इंटरव्यू हो गया। शैक्षिक योग्यताओं के आधार पर मेरिट को तवज्जो न देकर इंटरव्यू के आधार पर नियुक्ति को अंतिम रूप देने से पूरी प्रक्रिया सवालों से घिर गई है।
मामले को लेकर सीडीओ ने एएनएम पदों की चयन संबंधी फाइलें लौटा दी हैं। चयन प्रक्रिया की सुचिता पर सवाल उठाए हैं। साथ ही मामले में शासन से हस्तक्षेप को कहा है। एनएचएम घोटाले में यहां कई खेल पहले भी उजागर हो चुके हैं।
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इसमें फर्जी भुगतान व नियुक्ति के ढेरों मामले हैं। हाल ही में पूर्व डीएम अनिल ढींगरा ने सीएमओ की इस योेजना में मनमानी पर कई सख्त कदम उठाए थे। महीनों तक कर्मियों का भुगतान रोक कर जांच कराई थी।
यहीं नहीं पूर्व सीएमओ डॉ. राधेश्याम यादव को संविदा पदों पर सेवा प्रदाता के चयन में फर्जीवाड़ा कर 60 नियुक्तियां चुपचाप करके लाखों रुपये लेने आदि की शिकायतों पर जांच के बाद हटाया गया था। बाद में अपर निदेशक की जांच के बाद सभी नियुक्तियां रद्द कर दी गई थीं।
इसके बाद से लटकी जनपद स्तरीय, विभिन्न शहरी व ग्रामीण चिकित्सा इकाइयों पर संविदा नियुक्ति के लिए पूर्व डीएम योगेश्वर राम मिश्र ने एक मार्च को इंटरव्यू करने की स्वीकृति प्रदान की।
सबसे पहले 25 व 26 मार्च को एएनएम के 47 पदों पर इंटरव्यू हुए, जिसमें तीन हजार से अधिक अभ्यर्थी आए और सबको आया राम गया राम के तर्ज पर निपटा दिया गया। इसकी फाइनल सूची में शैक्षिक योग्यता के प्रतिशत का कोई आधार नहीं है।
प्रभारी डीएम व सीडीओ अरविंद मलप्पा बंगारी ने अंतिम सूची की इन्हीं खामियों को इंगित कर लौटा दिया है। 77 स्टाफ नर्स की 28 मार्च को हुए इंटरव्यू में चार हजार से अधिक अभ्यर्थियों को 8 घंटे में निपटा दिया गया। इतने कम समय में यह इंटरव्यू कैसे हुआ? उच्चाधिकारी पचा नहीं पा रहे हैं।
29 मार्च को 20 डॉक्टरों के अलावा 39 कंसलटेंट, फार्मासिस्ट, लैब स्टाफ आदि की नियुक्ति का इंटरव्यू समाप्त हो गया, जबकि अभ्यर्थियों की संख्या तीन हजार तक थी। चार दिन से चल रही चयन प्रक्रिया को लेकर धन उगाही के आरोप भी खूब लग रहे हैं।
हालांकि सीएमओ डॉ. प्रमोद कुमार इससे इंकार करते हैं। उनका कहना है कि सब कुछ शासन की गाइड लाइन से हो रहा है। चयन प्रक्रिया की टीम में शामिल अपर सीएमओ डॉ. छैल बिहारी ने बताया कि चार दिन चले इंटरव्यू में 10 हजार से अधिक अभ्यर्थियों ने विभिन्न पदों के सापेक्ष हिस्सा लिया है।
कुछ पदों के चयन की सूची को अंतिम रूप दिया गया है। बाकी का काम जारी है। इंटरव्यू टीम में उनके अलावा सीएमओ प्रमोद कुमार, डिप्टी सीएमओ एके कन्नौजिया, अतिरिक्त मजिस्ट्रेट समेत पांच लोगों का पैनल था।
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इसमें बुधवार को आठ घंटे में तीन हजार का इंटरव्यू निपटा दिया गया, जबकि एएनएम और स्टाफ नर्स की नियुक्ति में भी तीन दिन में सात हजार से अधिक अभ्यर्थियों का इंटरव्यू हो गया। शैक्षिक योग्यताओं के आधार पर मेरिट को तवज्जो न देकर इंटरव्यू के आधार पर नियुक्ति को अंतिम रूप देने से पूरी प्रक्रिया सवालों से घिर गई है।
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मामले को लेकर सीडीओ ने एएनएम पदों की चयन संबंधी फाइलें लौटा दी हैं। चयन प्रक्रिया की सुचिता पर सवाल उठाए हैं। साथ ही मामले में शासन से हस्तक्षेप को कहा है। एनएचएम घोटाले में यहां कई खेल पहले भी उजागर हो चुके हैं।
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इसमें फर्जी भुगतान व नियुक्ति के ढेरों मामले हैं। हाल ही में पूर्व डीएम अनिल ढींगरा ने सीएमओ की इस योेजना में मनमानी पर कई सख्त कदम उठाए थे। महीनों तक कर्मियों का भुगतान रोक कर जांच कराई थी।
यहीं नहीं पूर्व सीएमओ डॉ. राधेश्याम यादव को संविदा पदों पर सेवा प्रदाता के चयन में फर्जीवाड़ा कर 60 नियुक्तियां चुपचाप करके लाखों रुपये लेने आदि की शिकायतों पर जांच के बाद हटाया गया था। बाद में अपर निदेशक की जांच के बाद सभी नियुक्तियां रद्द कर दी गई थीं।
इसके बाद से लटकी जनपद स्तरीय, विभिन्न शहरी व ग्रामीण चिकित्सा इकाइयों पर संविदा नियुक्ति के लिए पूर्व डीएम योगेश्वर राम मिश्र ने एक मार्च को इंटरव्यू करने की स्वीकृति प्रदान की।
सबसे पहले 25 व 26 मार्च को एएनएम के 47 पदों पर इंटरव्यू हुए, जिसमें तीन हजार से अधिक अभ्यर्थी आए और सबको आया राम गया राम के तर्ज पर निपटा दिया गया। इसकी फाइनल सूची में शैक्षिक योग्यता के प्रतिशत का कोई आधार नहीं है।
प्रभारी डीएम व सीडीओ अरविंद मलप्पा बंगारी ने अंतिम सूची की इन्हीं खामियों को इंगित कर लौटा दिया है। 77 स्टाफ नर्स की 28 मार्च को हुए इंटरव्यू में चार हजार से अधिक अभ्यर्थियों को 8 घंटे में निपटा दिया गया। इतने कम समय में यह इंटरव्यू कैसे हुआ? उच्चाधिकारी पचा नहीं पा रहे हैं।
29 मार्च को 20 डॉक्टरों के अलावा 39 कंसलटेंट, फार्मासिस्ट, लैब स्टाफ आदि की नियुक्ति का इंटरव्यू समाप्त हो गया, जबकि अभ्यर्थियों की संख्या तीन हजार तक थी। चार दिन से चल रही चयन प्रक्रिया को लेकर धन उगाही के आरोप भी खूब लग रहे हैं।
हालांकि सीएमओ डॉ. प्रमोद कुमार इससे इंकार करते हैं। उनका कहना है कि सब कुछ शासन की गाइड लाइन से हो रहा है। चयन प्रक्रिया की टीम में शामिल अपर सीएमओ डॉ. छैल बिहारी ने बताया कि चार दिन चले इंटरव्यू में 10 हजार से अधिक अभ्यर्थियों ने विभिन्न पदों के सापेक्ष हिस्सा लिया है।
कुछ पदों के चयन की सूची को अंतिम रूप दिया गया है। बाकी का काम जारी है। इंटरव्यू टीम में उनके अलावा सीएमओ प्रमोद कुमार, डिप्टी सीएमओ एके कन्नौजिया, अतिरिक्त मजिस्ट्रेट समेत पांच लोगों का पैनल था।