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दुनिया मानती है हमारे समरस समाज की शक्ति: डॉ.कृष्ण गोपाल

Mon, 17 Dec 2018 12:17 AM IST
Updated Mon, 17 Dec 2018 12:17 AM IST
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दुनिया मानती है हमारे समरस समाज की शक्ति: डॉ.कृष्ण गोपाल
दुनिया मानती है हमारे समरस समाज की शक्ति : डॉ. कृष्ण गोपाल
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अयोध्या। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के नवीन परिसर में आयोजित दो दिवसीय समरसता कुंभ के समापन सत्र को संबोधित करते हुए रविवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अखिल भारतीय सह-सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि समरसता कुंभ के आयोजन से जो वैचारिक अमृत निकला उसे आप सभी लेकर अपने घर और समाज के बीच जाएं।

सभ्यता के इस युग में इस प्रकार हम अपने सांस्कृतिक और वैचारिक मूल्यों को बचाकर रख पाएंगे। पूरी दुनिया हमारे समरस समाज की शक्ति को स्वीकार कर चुकी है। 15 सौ वर्ष पूर्व भारत आये विदेशी यात्री विद्वानों ने भी हमारी सांस्कृतिक, धार्मिक समृद्धता की प्रशंसा की है। उन्होंने कहा कि महर्षि दयानंद ने संदेश दिया कि यज्ञ का अधिकार सभी को है।
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भेद-भाव हमारे संत समाज की परंपरा में नहीं है। हमारे संविधान में भी सभी को समान अधिकार प्रदत्त है। सदस्य विधान परिषद बिहार के प्रो. संजय पासवान ने समरसता को केंद्रित एक प्रस्ताव भी कुंभ के मंच पर प्रस्तुत किया। जिसका सभी ने समर्थन किया। उन्होंने समरसता कुंभ के आयोजन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह हमारी बहुत प्राचीन परंपरा है।
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कहा कि हमारे यहां वाल्मीकि, रैदास, कबीर, नानक देव जैसे प्रबुद्ध संतों ने समरस समाज की नींव रखी उसी की तर्ज पर समाज विकसित हुआ। धर्म ग्रंथों में समरसता के बड़े स्तर पर उद्धरण विद्यमान है। शोध से बोध होता है भविष्य की हितकारी नीतियां इसी से तय होती है। समरसता कुंभ इसी प्रकार का आयोजन है।

अंतरराष्ट्रीय बौद्ध महासभा मुंबई के अध्यक्ष राहुल बोधी ने कहा कि मैं छत्रपति शिवाजी की धरती से हूं। जिन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए बहुत काम किया है। आज समय की मांग है कि हम देश में अमन शांति फैलाएं तभी देश आगे बढेेे़गा। उन्होंने कहा कि जापान बहुत छोटा सा देश है परंतु वहां का जीवन स्तर बहुत ऊंचा है और हमारे यहाँ पर जीवन स्तर बहुत ही निम्न है।

हमें एक दूसरे को समझकर भाईचारा बढ़ा कर समाज में फैली विषमता, कुरीतियों को समाप्त करना है। डॉ. बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय लखनऊ के डॉ. प्रकाश बरतूनिया ने समरसता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह समृद्ध परंपरा हजारों वर्षों से चली आ रही हमारी धरोहर है।

स्वामी रामानंद ने वंचित वर्ग के लोगों को अपना शिष्य बनाया, भगवान राम ने सबरी के आतिथ्य को स्वीकार कर जो संदेश दिया वह आज भी अनुकरणीय है। काशी के प्रो. कौशल किशोर ने कहा कि भारत तब तक श्रेष्ठ नही बनेगा जब तक यहां जाति के आधार पर राजनैतिक दल होंगेे। भगवान राम समरसता के बहुत बड़े प्रतीक पुरुष हैं।

भारतीय संस्कृति स्वयं समरसता का प्रतीक है। हमने तब समरसता सिखाई है जब विश्व का उदय हो रहा था। हम समरसता रूपी राम के गुलाम हैं। हम समरसता में खाते है और जीते हैं। यही तुलसीदास का मूल मंत्र है। जातियां कुछ नही है केवल पहचान है। समरसता कुंभ का संचालन प्रो. अशोक शुक्ला ने किया।


इस अवसर पर विहिप के अंतरराष्ट्रीय संगठन मंत्री दिनेश जी, बालयोगी उमेशनाथ, पूर्व एमएलसी जयप्रकाश चतुर्वेदी, मंत्री रमापति शास्त्री, सांसद लल्लू सिंह, नगर विधायक अयोध्या वेद प्रकाश गुप्ता समेत अन्य मौजूद रहे।
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