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राममंदिर में अचल विग्रह स्थापित करने पर संतों से हो रही मंत्रणा

Sat, 23 Apr 2022 11:09 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 23 Apr 2022 11:09 PM IST
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Consultation with saints on setting up immovable deity in Ram temple
अयोध्या-शनिवार को सजा रामलला का विग्रह।-संवाद - फोटो : FAIZABAD
अयोध्या। रामजन्मभूमि में निर्माणाधीन राममंदिर में रामलला की एक बड़ी मूर्ति (अचल विग्रह) स्थापित करने की तैयारी है। विगत दिनों अयोध्या में हुई श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में निर्णय लिया गया है कि वर्तमान में उत्सव मूर्ति के रूप में विराजमान वर्तमान रामलला के साथ-साथ एक अचल विग्रह की भी प्राण प्रतिष्ठा मंदिर में की जाए। इसको लेकर ट्रस्ट देशभर के संतों, धर्म-शास्त्र के जानकारों से राय ले रहा है।
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ट्रस्ट राममंदिर में रामलला की एक बड़ी मूर्ति स्थापित करना चाहता है। यह मूर्ति अचल होगी और स्थापित करने के बाद यह मूर्ति हिल नहीं सकेगी। वैसे रामनगरी के मंदिरों में चल व अचल विग्रह स्थापित करने की परंपरा पुरानी है। कई मंदिरों में भगवान के चल व अचल दोनों प्रकार के विग्रह स्थापित हैं। ऐसे मंदिरों में कनक भवन व दशरथ महल प्रमुख हैं। इन मंदिरों में उत्सव, त्योहारों पर चल मूर्ति को गर्भगृह से बाहर निकालकर भी पूजा-अर्चना, शोभा यात्रा निकाली जाती है।
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ट्रस्ट का कहना है कि राममंदिर बन जाने पर प्रतिदिन करीब एक लाख भक्त रामलला के दर्शन को पहुंचेंगे। वर्तमान में अस्थाई राममंदिर में विराजमान रामलला की प्रतिमा बहुत छोटी है, इसलिए भक्तों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए रामलला की एक बड़ी मूर्ति स्थापित की जानी चाहिए। मंदिर में वर्तमान में पूजित रामलला चल उत्सव मूर्ति के रूप में स्थापित होंगे जबकि बड़ी अचल मूर्ति स्थापित करने को लेकर ट्रस्ट रामनगरी सहित देशभर के संतों से राय ले रहा है। इसके अलावा मूर्ति कितनी बड़ी हो, किस रंग की हो इस बारे में वास्तु शास्त्रियों व धर्म-शास्त्र के जानकारों से राय मांगी जा रही है। राम मंदिर के ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र कहते हैं कि ट्रस्ट की बैठक में एक बड़ी मूर्ति स्थापित करने का विचार आया है। ट्रस्ट इसको लेकर संतों से राय ले रहा है।
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सावन में चल विग्रह को रथ पर सवार कर निकाली जाती है शोभायात्रा
अयोध्या में सावन मास में सावन मेले का आयोजन होता है। जिसमें देश के कोने-कोने से लाखों भक्त अयोध्या पहुंचते हैं। सावन मेले का शुभारंभ शुक्ल पक्ष तृतीया को मणिपर्वत के मेले के साथ होता है। इस दिन रामनगरी के दर्जनों मंदिरों से शोभायात्रा निकाली जाती है। इस शोभायात्रा में मंदिरों में विराजमान चल विग्रह को रथ पर आरूढ़ कर मणिपर्वत लाया जाता है। जहां विग्रह झूला झूलते हैं और इसी दिन से सावन झूलनोत्सव का शुभारंभ हो जाता है। दशरथ महल, कनक भवन, मणिरामदास की छावनी, रंगमहल श्रीरामवल्लभाकुुंज, विअहुति भवन, रामहर्षण कुंज सहित अन्य मंदिरों से चल विग्रह को रथ पर सवार कर मणिपर्वत तक शोभायात्रा निकालने की पंरपरा है।
छह इंच की है रामलला की मूर्ति
अस्थाई मंदिर में रामलला चारों भाइयों सहित विराजमान हैं। विराजमान रामलला की मूर्ति मात्र छह इंच की है। रामलला इस मूर्ति में एक हाथ में लड्डू लिए हुए घुटने के बल पर बैठे हैं। ऐसे में मूर्ति बहुत छोटी होने के कारण भक्तों को ठीक से भगवान के दर्शन नहीं हो पाते। भरत की मूर्ति भी छह इंच की है जबकि लक्ष्मण व शत्रुहन की मूर्ति तो मात्र तीन-तीन इंच की ही हैं। गर्भगृह में हनुमान जी की भी दो मूर्तियां हैं इनमें से एक मूर्ति पांच इंच की है जबकि एक बड़ी मूर्ति लगभग तीन फिट की है।
भक्तों की भावनाओं के अनुरूप होनी चाहिए मूर्ति
श्रीरामवल्लभाकुंज के राजकुमार दास कहते हैं कि मूर्ति विशाल, भव्य व करोड़ों रामभक्तों की भावनाओं के अनुरूप होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राममंदिर में चल व अचल दोनों विग्रह स्थापित रहेगा तो चल विग्रह को उत्सवों में गर्भगृह से बाहर निकालना भी संभव होगा।
बड़ी मूर्ति से आसानी से मिलेंगे भक्तों को दर्शन
सियाराम किला झुनकी घाट के महंत करूणानिधान शरण ने कहा कि राममंदिर ट्रस्ट का फैसला ठीक है। बड़ी मूर्ति होगी तो भक्तों को आसानी से अपने आराध्य का दर्शन प्राप्त होगा। मूर्ति की भव्यता ऐसी होनी चाहिए कि भक्त एक टक निहारते रह जाएं। शास्त्रों में रामजी के जिस स्वरूप का वर्णन है उसी तरह का दर्शन भक्तों को होना चाहिए।

रामलला ने जीता मुकदमा, उन्हीं के नाम पर बन रहा मंदिर
अयोध्या। श्रीरामजन्मभूमि के मुख्य अर्चक आचार्य सत्येंद्र दास का कहना है कि वर्तमान में राममंदिर में पूजित-प्रतिष्ठित रामलला को ही मंदिर में प्रतिष्ठापित किया जाना चाहिए। कहा कि ट्रस्ट का बड़ी मूर्ति लगाने का फैसला उचित नहीं है। 1949 से इन्हीं रामलला की पूजा-अर्चना होती आ रही है। यही रामलला 70 सालों तक मुकदमा लड़े, जीते, इनके नाम पर करोड़ों का दान आया, इन्हीं के नाम पर मंदिर भी बन रहा है। ऐसे में इन्हें ही अचल मूर्ति का दर्जा दिया जाना चाहिए। ट्रस्ट इन्हें उत्सव मूर्ति के रूप में स्थापित करने की बात कह रहा है यह उचित नहीं है।
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