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बाबर नहीं, औरंगजेब ने तुड़वाया था राममंदिर
फैजाबाद
Updated Sun, 27 Aug 2017 11:09 PM IST
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गुजरात कैडर के 1972 बैच के आईपीएस अधिकारी रहे लेखक किशोर कुणाल
- फोटो : अमर उजाला
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गुजरात कैडर के 1972 बैच के आईपीएस अधिकारी रहे लेखक किशोर कुणाल ने दावा किया है कि अयोध्या में राममंदिर बाबर के शासनकाल में नहीं, औरंगजेब के शासनकाल में तोड़ा गया था। ब्रिटिशकाल की फाइलों, प्राचीन संस्कृत सामग्री, खुदाई की समीक्षाओं व विदेशी पर्यटकों का हवाला देते हुए उनकी लिखी पुस्तक ‘अयोध्या रीविजिटेड’ में यह दावा किया गया है कि अयोध्या में रामजन्मभूमि मंदिर मौजूद था जिसे तोड़कर बाद में मस्जिद बनाई गई।
अयोध्या के अमावां मंदिर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए किशोर कुणाल ने कहा कि उनकी पुस्तक हिंदु हित की धरोहर होगी। हमने अयोध्या के इतिहास को नया आयाम दिया है। यह पुस्तक दोनों समुदायों के बीच तनाव खत्म करने में मील का पत्थर साबित होगी।
पुस्तक में कई तथ्यों को दिया गया है जो आम धारणा और कई इतिहासकारों के मतों के विपरीत है। कुणाल द्वारा लिखित पुस्तक ‘अयोध्या रीविजिटेड’ में राममंदिर को लेकर कई नई बातों का उल्लेख किया गया है। साथ ही बाबरी मस्जिद को भी सिरे से नकारा गया है।
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लेखक ने पुस्तक में कई पुख्ता प्रमाण भी दिए हैं। किताब की प्रस्तावना भारत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति जीबी पटनायक द्वारा लिखी गई है। कुणाल ने अपनी किताब का हवाला देते हुए कहा कि इसमें कई नए तथ्य हैं, जैसे आम धारणा यह है कि बाबर ने रामजन्मभूमि तुड़वाया था, जो गलत है।
बाबर के नाम से जो मस्जिद कही जाती है, वह कभी बनी ही नहीं, मंदिर को तोड़े जाने की घटना 1528 ई. बाबर के शासनकाल में नहीं हुई थी। बल्कि यह घटना 1660 ई. में हुई, जब फिदाई खान अयोध्या में औरंगजेब का गर्वनर था।
पुस्तक में वर्णित है कि बाबर कभी अयोध्या आया ही नहीं, इसलिए यह दावा अवास्तविक है कि अवध के गर्वनर मीर बाकी ने 1528 में बाबरी मस्जिद बनवाई थी। पुस्तक में यह भी कहा गया है कि बाबर से लेकर शाहजहां तक सभी मुगल शासक उदार थे उनमें कट्टरता नहीं थी।
विदेशी लेखकों ने भी रामंमदिर का किया जिक्र : संस्कृत, अंग्रेजी और फ्रांसीसी विद्वानों का अपनी पुस्तक में उल्लेख करते हुए किशोर कुणाल ने यह साबित करने की कोशिश की है कि अयोध्या में विवादित स्थल पर मंदिर मौजूद था।
पुस्तक में बताया है कि 1767 में भारत आए आस्ट्रिया के फादर जोसेफ टीफेंथेलर ने भी उल्लेख किया है कि उन्हें बताया गया है कि औरंगजेब ने मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई थी। 1801 में भारत आये अंग्रेज पर्यटक सी मेंटल ने भी औरंगजेब द्वारा मस्जिद तोड़े जाने की बात लिखी है। 1841 में बने एक गजेटियर में भी औरंगजेब द्वारा मंदिर तोड़ने जाने का जिक्र है। 1631 में आए इटली के डीलेट ने जिक्र किया है कि उन्होंने अयोध्या में रामंमदिर देखा है।
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अयोध्या के अमावां मंदिर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए किशोर कुणाल ने कहा कि उनकी पुस्तक हिंदु हित की धरोहर होगी। हमने अयोध्या के इतिहास को नया आयाम दिया है। यह पुस्तक दोनों समुदायों के बीच तनाव खत्म करने में मील का पत्थर साबित होगी।
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पुस्तक में कई तथ्यों को दिया गया है जो आम धारणा और कई इतिहासकारों के मतों के विपरीत है। कुणाल द्वारा लिखित पुस्तक ‘अयोध्या रीविजिटेड’ में राममंदिर को लेकर कई नई बातों का उल्लेख किया गया है। साथ ही बाबरी मस्जिद को भी सिरे से नकारा गया है।
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लेखक ने पुस्तक में कई पुख्ता प्रमाण भी दिए हैं। किताब की प्रस्तावना भारत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति जीबी पटनायक द्वारा लिखी गई है। कुणाल ने अपनी किताब का हवाला देते हुए कहा कि इसमें कई नए तथ्य हैं, जैसे आम धारणा यह है कि बाबर ने रामजन्मभूमि तुड़वाया था, जो गलत है।
बाबर के नाम से जो मस्जिद कही जाती है, वह कभी बनी ही नहीं, मंदिर को तोड़े जाने की घटना 1528 ई. बाबर के शासनकाल में नहीं हुई थी। बल्कि यह घटना 1660 ई. में हुई, जब फिदाई खान अयोध्या में औरंगजेब का गर्वनर था।
पुस्तक में वर्णित है कि बाबर कभी अयोध्या आया ही नहीं, इसलिए यह दावा अवास्तविक है कि अवध के गर्वनर मीर बाकी ने 1528 में बाबरी मस्जिद बनवाई थी। पुस्तक में यह भी कहा गया है कि बाबर से लेकर शाहजहां तक सभी मुगल शासक उदार थे उनमें कट्टरता नहीं थी।
विदेशी लेखकों ने भी रामंमदिर का किया जिक्र : संस्कृत, अंग्रेजी और फ्रांसीसी विद्वानों का अपनी पुस्तक में उल्लेख करते हुए किशोर कुणाल ने यह साबित करने की कोशिश की है कि अयोध्या में विवादित स्थल पर मंदिर मौजूद था।
पुस्तक में बताया है कि 1767 में भारत आए आस्ट्रिया के फादर जोसेफ टीफेंथेलर ने भी उल्लेख किया है कि उन्हें बताया गया है कि औरंगजेब ने मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई थी। 1801 में भारत आये अंग्रेज पर्यटक सी मेंटल ने भी औरंगजेब द्वारा मस्जिद तोड़े जाने की बात लिखी है। 1841 में बने एक गजेटियर में भी औरंगजेब द्वारा मंदिर तोड़ने जाने का जिक्र है। 1631 में आए इटली के डीलेट ने जिक्र किया है कि उन्होंने अयोध्या में रामंमदिर देखा है।