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पौराणिक तिलोदकी गंगा नदी के पुनरूद्धार से होंगे कई लाभ
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अयोध्या। पौराणिक नदी तिलोदकी गंगा के पुनरुद्धार से कई लाभ होंगे। पौराणिक नदी को नया जीवन मिलेगा। भू-जलस्तर में वृद्धि के साथ जिले में सिंचन क्षमता बढ़ेगी। आम लोगों ने भी इसके लिए सांसद लल्लू सिंह और डीएम अनुज कुमार झा की इस पहल की सराहना की है।
सांसद लल्लू की अध्यक्षता में आयोजित जिला समन्वय एवं निगरानी समिति की बैठक में जिलाधिकारी अनुज कुमार झा ने पीडी डीआरडीए को तमसा और बिसुही नदी के पुनरुद्धार की तर्ज पर पौराणिक तिलोदकी गंगा के पुनरुद्धार के लिए परियोजना बनवाने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही तालाबों और झीलों के कार्यो को पूरा कराने के लिए कहा। इस निर्देश के बाद तिलोदकी के पुनरुद्धार की आस बलवती हो गई है। विकास विभाग का फोकस इस पर बढ़ गया है। यह तीनों नदियां रामायणकालीन बताई जाती है। इनका वर्णन आर्ष ग्रंथों में भी है। तमसा और तिलोदकी गंगा का सीधा संबंध अयोध्या से है।
बताया गया है कि तमसा का उद्भव ऋषि मांडव्य के तप से हुआ। यह मवई ब्लाक के लखनीपुर से निकलती हैं। मर्यादा पुरुषोतम श्रीराम ने इसी के तट पर वनवास की पहली रात बिताई थी तो तिलोदकी गंगा (तिलैया) का उद्भव सोहावल ब्लॉक के ग्राम पंचायत पंडितपुर स्थित ऋषि रमणक की तपस्थली से माना जाता है। यह सुरम्य स्थल ग्राम पंचायत अरथर की सीमा से लगती है।
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तिलोदकी गंगा दो तहसीलों सोहावल और सदर के तीन ब्लाकों सोहावल, मसौधा और पूराबाजार से होकर अयोध्या हुंचती है। अतीत में तिलोदकी गंगा अयोध्या में सरयू से संगम करती थी। प्रतीक के तौर पर आज भी पंडितपुर और अयोध्या के यज्ञवेदी के पास भादौं माह में कुशोदपाटिनी अमावस्या को मेले का आयोजन होता है। पंडितपुर और आसपास के लोगों का कहना है कि अब से लगभग 15 साल पहले तक रमणक ऋषि आश्रम के पास तिलोदकी गंगा में स्नान, दान और तिलोदकी गंगा में डाली चढ़ाने का परंपरा रही है।
जानकारों का कहना है कि तिलोदकी गंगा की लंबाई पंडितपुर से अयोध्या तक लगभग 22 से 25 किमी है। लेकिन यह नदी दूसरी नदियों से कहीं अधिक लुप्तप्राय स्थिति में है। यह कई स्थानों पर अवैध कब्जे की चपेट में है। अभिलेखों में भी यह कहीं नाला तो कहीं बाहा दर्ज है। हलांकि जिलाधिकारी के निर्देश पर राजस्व विभाग के स्तर पर इसका सर्वे शुरू किया गया था। इसके बाद जिलाधिकारी ने इसके पुनरुद्धार का बीड़ा उठाया है। इससे भू-जल स्तर में सुधार होगा तो जिले में सिंचन क्षमता बढ़ेगी।
सोहावल क्षेत्र के रहने वाले सुरेंद्र कुमार का कहना है कि तिलोदकी गंगा (तिलैया) के पुनरुद्धार से नदी के पास के गांवों के लोगों को गर्मियों में जल स्तर बढ़ने से बड़ी राहत मिलेगी। दीपक सिंह कहते हैं कि प्रशासन की पहल सराहनीय है। इससे पौराणिक त्रिलोचना का अस्तित्व बचेगी। लोगों को लाभ होगा। सुशील कुमार कहते हैं कि नदी के जीर्णोद्धार से पर्यटन के लिए भी यहां पर्यटन का बढ़ावा मिल सकता है।
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सांसद लल्लू की अध्यक्षता में आयोजित जिला समन्वय एवं निगरानी समिति की बैठक में जिलाधिकारी अनुज कुमार झा ने पीडी डीआरडीए को तमसा और बिसुही नदी के पुनरुद्धार की तर्ज पर पौराणिक तिलोदकी गंगा के पुनरुद्धार के लिए परियोजना बनवाने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही तालाबों और झीलों के कार्यो को पूरा कराने के लिए कहा। इस निर्देश के बाद तिलोदकी के पुनरुद्धार की आस बलवती हो गई है। विकास विभाग का फोकस इस पर बढ़ गया है। यह तीनों नदियां रामायणकालीन बताई जाती है। इनका वर्णन आर्ष ग्रंथों में भी है। तमसा और तिलोदकी गंगा का सीधा संबंध अयोध्या से है।
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बताया गया है कि तमसा का उद्भव ऋषि मांडव्य के तप से हुआ। यह मवई ब्लाक के लखनीपुर से निकलती हैं। मर्यादा पुरुषोतम श्रीराम ने इसी के तट पर वनवास की पहली रात बिताई थी तो तिलोदकी गंगा (तिलैया) का उद्भव सोहावल ब्लॉक के ग्राम पंचायत पंडितपुर स्थित ऋषि रमणक की तपस्थली से माना जाता है। यह सुरम्य स्थल ग्राम पंचायत अरथर की सीमा से लगती है।
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तिलोदकी गंगा दो तहसीलों सोहावल और सदर के तीन ब्लाकों सोहावल, मसौधा और पूराबाजार से होकर अयोध्या हुंचती है। अतीत में तिलोदकी गंगा अयोध्या में सरयू से संगम करती थी। प्रतीक के तौर पर आज भी पंडितपुर और अयोध्या के यज्ञवेदी के पास भादौं माह में कुशोदपाटिनी अमावस्या को मेले का आयोजन होता है। पंडितपुर और आसपास के लोगों का कहना है कि अब से लगभग 15 साल पहले तक रमणक ऋषि आश्रम के पास तिलोदकी गंगा में स्नान, दान और तिलोदकी गंगा में डाली चढ़ाने का परंपरा रही है।
जानकारों का कहना है कि तिलोदकी गंगा की लंबाई पंडितपुर से अयोध्या तक लगभग 22 से 25 किमी है। लेकिन यह नदी दूसरी नदियों से कहीं अधिक लुप्तप्राय स्थिति में है। यह कई स्थानों पर अवैध कब्जे की चपेट में है। अभिलेखों में भी यह कहीं नाला तो कहीं बाहा दर्ज है। हलांकि जिलाधिकारी के निर्देश पर राजस्व विभाग के स्तर पर इसका सर्वे शुरू किया गया था। इसके बाद जिलाधिकारी ने इसके पुनरुद्धार का बीड़ा उठाया है। इससे भू-जल स्तर में सुधार होगा तो जिले में सिंचन क्षमता बढ़ेगी।
सोहावल क्षेत्र के रहने वाले सुरेंद्र कुमार का कहना है कि तिलोदकी गंगा (तिलैया) के पुनरुद्धार से नदी के पास के गांवों के लोगों को गर्मियों में जल स्तर बढ़ने से बड़ी राहत मिलेगी। दीपक सिंह कहते हैं कि प्रशासन की पहल सराहनीय है। इससे पौराणिक त्रिलोचना का अस्तित्व बचेगी। लोगों को लाभ होगा। सुशील कुमार कहते हैं कि नदी के जीर्णोद्धार से पर्यटन के लिए भी यहां पर्यटन का बढ़ावा मिल सकता है।