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रखियो हम छठ के बरतिया दीनानाथ होइहैं सहाय...
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अयोध्या। सूर्य उपासना का महापर्व छठ महोत्सव का उल्लास शहर में छाया हुआ है। चार दिवसीय छठ पर्व के दूसरे दिवस छोटी खरना मनाया गया। सरयू व गुप्तारघाट पर रखियो हम छठ के बरतिया दीनानाथ होइहैं सहाय, रोवै सुगा के सुगनिया सुगा काहे मारल जाए...। जैसे गीतों के साथ सौभाग्यवती महिलाएं शुक्रवार निर्जला व्रत रखकर अस्तचलागामी सूर्य को अर्घ्य देंगी।
छठ महोत्सव को लेकर शहर के बाजार भी गुलजार हैं। फल-फू ल से लेकर फलों की दुकानें सजी हुई है। गुरूवार को छोटी छठ या खरना के दिन महिलाएं रात को रसियाव साठी के चावल, गुड़, गाय के दूध की खीर खाने के बाद दो दिनी लंबे निर्जला व्रत की शुरूआत की। शुक्रवार को महिलाएं परिवार व बच्चों के साथ सूर्य को अर्घ्य देने के लिए पूजा सामग्रियों को लकड़ी के डाले मेें रखकर घाटों पर पहुंचेंगी और सूर्य को अर्घ्य देने के बाद घर आकर सारा सामान रख देंगी।
षष्ठी को रात छठी माता के गीत गाए जाएंगें और व्रत की कथा सुनाई जाती है। व्रत के चौथे दिन 21 अक्तूबर को सूर्य निकलने से पहले ही व्रती घाट पर पहुंच जाएंगे और उगते सूर्य को पहली किरण को अर्घ्य दिया जाएगा। इसके बाद घाट पर ही छठ माता को प्रणाम कर व संतान रक्षा का वर मांग वापस घर लौटकर प्रसाद वितरण के बाद प्रसाद खाकर व्रत खोलेंगी।
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खरना का आशय शुद्धिकरण से है
खरना छठ पर्व के दूसरे दिन का अनुष्ठान है। खरना का आशय शुद्धिकरण से है। इस दिन व्रती शुद्ध तन-मन से अपने कुल देवी-देवता एवं छठी माई की पूजा करते हैं। खरना को लोहांडा भी कहा जाता है। खरना के प्रसाद में गन्ने का जूस या गुड़ के चावल अथवा गुड़ की खीर तैयार की जाती है। यह प्रसाद छठी माई और कुल देवता को अर्पित किया जाता है। इसके बाद प्रसाद को खाने के बाद व्रती को लगभग 36 घंटों का निर्जला उपवास करना होता है।
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छठ महोत्सव को लेकर शहर के बाजार भी गुलजार हैं। फल-फू ल से लेकर फलों की दुकानें सजी हुई है। गुरूवार को छोटी छठ या खरना के दिन महिलाएं रात को रसियाव साठी के चावल, गुड़, गाय के दूध की खीर खाने के बाद दो दिनी लंबे निर्जला व्रत की शुरूआत की। शुक्रवार को महिलाएं परिवार व बच्चों के साथ सूर्य को अर्घ्य देने के लिए पूजा सामग्रियों को लकड़ी के डाले मेें रखकर घाटों पर पहुंचेंगी और सूर्य को अर्घ्य देने के बाद घर आकर सारा सामान रख देंगी।
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षष्ठी को रात छठी माता के गीत गाए जाएंगें और व्रत की कथा सुनाई जाती है। व्रत के चौथे दिन 21 अक्तूबर को सूर्य निकलने से पहले ही व्रती घाट पर पहुंच जाएंगे और उगते सूर्य को पहली किरण को अर्घ्य दिया जाएगा। इसके बाद घाट पर ही छठ माता को प्रणाम कर व संतान रक्षा का वर मांग वापस घर लौटकर प्रसाद वितरण के बाद प्रसाद खाकर व्रत खोलेंगी।
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खरना का आशय शुद्धिकरण से है
खरना छठ पर्व के दूसरे दिन का अनुष्ठान है। खरना का आशय शुद्धिकरण से है। इस दिन व्रती शुद्ध तन-मन से अपने कुल देवी-देवता एवं छठी माई की पूजा करते हैं। खरना को लोहांडा भी कहा जाता है। खरना के प्रसाद में गन्ने का जूस या गुड़ के चावल अथवा गुड़ की खीर तैयार की जाती है। यह प्रसाद छठी माई और कुल देवता को अर्पित किया जाता है। इसके बाद प्रसाद को खाने के बाद व्रती को लगभग 36 घंटों का निर्जला उपवास करना होता है।