{"_id":"5f905dcf8ebc3e9b9e6c64cd","slug":"ayodhya-faizabad-news-lko5464347102","type":"story","status":"publish","title_hn":"मुजफ्फरपुर में धन के दुरुपयोग मामले में डीएम को जांच का निर्देश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मुजफ्फरपुर में धन के दुरुपयोग मामले में डीएम को जांच का निर्देश
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भेलसर। हाईकोर्ट ने रुदौली ब्लॉक के मुजफ्फरपुर गांव में विकास के नाम पर सरकार द्वारा आवंटित सरकारी धन के दुरुपयोग पर सख्त रवैया अपनाया है। कोर्ट ने इस मामले में जिलाधिकारी को स्वत: संज्ञान में लेकर जांच कराने को कहा है।
मुजफ्फरपुर गांव के ही रमेश कुमार पांडेय की याचिका में आरोप लगाया कि प्रधान व सचिव ने सांठगांठ कर सरकार द्वारा आवंटित धन का जमकर दुरुपयोग किया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि आवंटन किए गए सरकारी धन का दुरुपयोग किए जाने की शिकायत जिले के जिम्मेदार अधिकारियों से की थी, जिस पर कोई सुनवाई ही नहीं हुई। विवश होकर उच्च न्यायालय की शरण लेना पड़ा। याचिकाकर्ता ने न्यायालय को लिखित अवगत कराया है कि ग्राम पंचायत में विकास कार्य के नाम पर एक करोड़ से अधिक धनराशि निकाली गई, लेकिन कोई कार्य नहीं कराया गया। इनमें 2016-17 में 114.14 लाख रुपये निकाले गए।
ये रकम हैंडपंप, खड़ंजा, सोलर, नाली निर्माण, शौचालय, तालाब में पानी भरवाने, हैंडपंप मरम्मत मद में निकाली गई। 2018-19 में नाली निर्माण, मिटटी पटाई व चबूतरा निर्माण, सोलिंग, खड़ंजा, हैंडपंप रिबोर, ह्यूम पाइप, हैंडपंप मरम्मत, स्ट्रीट लाइट, सोलर लाइट, तालाब में पानी भराने, कुर्सी मेज स्टेशनरी, कूप मरम्मत, प्राथमिक विद्यालय में फर्श टाइल व पत्थर लगाने, हैंड पंप सोख्ता गड्ढा निर्माण, पुलिया निर्माण, सोलिंग मरम्मत, सफाई कर्मी किट, तालाब में पानी भराना, हैंडपंपों की नाली चबूतरा उच्चीकरण, सोलर व स्ट्रीट लाइट मरम्मत, हैंडपंप रिबोर, स्टेशनरी, आदि मदों में 424.03 लाख रुपये निकाले गए।
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एएनएएम भवन मरम्मत, उच्च विद्यालय, पंचायत भवन के नाम राजकीय नलकूप गांव के नाम पर भी भारी भरकम बजट निकाला गया, मगर ये भवन गांव में नहीं। 2019-20 में स्ट्रीट लाइट 88 हजार, माइनर पटरी पटाई 2.30 लाख, नाली निर्माण 1.05 लाख, सीसी मार्ग मरम्मत 3.20 लाख, पुलिया व गेट निर्माण 2.65 लाख, इंटर लाकिंग निर्माण 3.10 लाख, इंटरलॉकिंग निर्माण 4.60 लाख, इंटरलाकिंग निर्माण 3.20 लाख, इंटरलॉकिंग 3.70 लाख, प्राथमिक विद्यालय इंटरलॉकिंग निर्माण 4.30 लाख, पटिया निर्माण 4 लाख निकाले गए, लेकिन कोई निर्माण कार्य कराया ही नहीं गया है।
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मुजफ्फरपुर गांव के ही रमेश कुमार पांडेय की याचिका में आरोप लगाया कि प्रधान व सचिव ने सांठगांठ कर सरकार द्वारा आवंटित धन का जमकर दुरुपयोग किया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि आवंटन किए गए सरकारी धन का दुरुपयोग किए जाने की शिकायत जिले के जिम्मेदार अधिकारियों से की थी, जिस पर कोई सुनवाई ही नहीं हुई। विवश होकर उच्च न्यायालय की शरण लेना पड़ा। याचिकाकर्ता ने न्यायालय को लिखित अवगत कराया है कि ग्राम पंचायत में विकास कार्य के नाम पर एक करोड़ से अधिक धनराशि निकाली गई, लेकिन कोई कार्य नहीं कराया गया। इनमें 2016-17 में 114.14 लाख रुपये निकाले गए।
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ये रकम हैंडपंप, खड़ंजा, सोलर, नाली निर्माण, शौचालय, तालाब में पानी भरवाने, हैंडपंप मरम्मत मद में निकाली गई। 2018-19 में नाली निर्माण, मिटटी पटाई व चबूतरा निर्माण, सोलिंग, खड़ंजा, हैंडपंप रिबोर, ह्यूम पाइप, हैंडपंप मरम्मत, स्ट्रीट लाइट, सोलर लाइट, तालाब में पानी भराने, कुर्सी मेज स्टेशनरी, कूप मरम्मत, प्राथमिक विद्यालय में फर्श टाइल व पत्थर लगाने, हैंड पंप सोख्ता गड्ढा निर्माण, पुलिया निर्माण, सोलिंग मरम्मत, सफाई कर्मी किट, तालाब में पानी भराना, हैंडपंपों की नाली चबूतरा उच्चीकरण, सोलर व स्ट्रीट लाइट मरम्मत, हैंडपंप रिबोर, स्टेशनरी, आदि मदों में 424.03 लाख रुपये निकाले गए।
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एएनएएम भवन मरम्मत, उच्च विद्यालय, पंचायत भवन के नाम राजकीय नलकूप गांव के नाम पर भी भारी भरकम बजट निकाला गया, मगर ये भवन गांव में नहीं। 2019-20 में स्ट्रीट लाइट 88 हजार, माइनर पटरी पटाई 2.30 लाख, नाली निर्माण 1.05 लाख, सीसी मार्ग मरम्मत 3.20 लाख, पुलिया व गेट निर्माण 2.65 लाख, इंटर लाकिंग निर्माण 3.10 लाख, इंटरलॉकिंग निर्माण 4.60 लाख, इंटरलाकिंग निर्माण 3.20 लाख, इंटरलॉकिंग 3.70 लाख, प्राथमिक विद्यालय इंटरलॉकिंग निर्माण 4.30 लाख, पटिया निर्माण 4 लाख निकाले गए, लेकिन कोई निर्माण कार्य कराया ही नहीं गया है।