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किसानों को अब नहीं मिलेगी पर्ची, मोबाइल मैसेज पर होगी गन्ने की तौल
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मसौधा। गन्ना विभाग गांव देहात के बुजुर्ग गन्ना किसानों को हाईटेक करने की तैयारी में है। किसान गन्ना बोआई से लेकर पेराई तक की आवश्यक सूचनाएं भी गन्ना विभाग के मोबाइल मैसेज से ही जान सकेंगे। इतना ही नहीं आगामी पेराई सत्र में किसानों को विभाग द्वारा गन्ना आपूर्ति की जानकारी भी अब पर्ची वितरण व्यवस्था खत्म कर सिर्फ मोबाइल फोन पर मैसेज के माध्यम से दी जायेगी।
जिसका लाभ गन्ना विकास परिषद मसौधा में पंजीकृत साढ़े 44 हजार गन्ना किसानों को मिलेगा। जिनके गन्ने की तौल चीनी मिल सहित गन्ना खरीद केन्द्रों पर अब सिर्फ मोबाइल फोन के मैसेज से होगी। ऐसे में जिन किसानों का मोबाइल नंबर विभाग में अपडेट नहीं होगा। वह किसान गन्ना आपूर्ति से वंचित होंगे। पर्ची व्यवस्था समाप्त करने के आदेश से जहां विभागीय अधिकारियों के हाथ पांव फूल गए हैं।
वहीं समिति के गन्ना कृषक कलेंडर में मोबाइल नंबर फीड कराने की किसानों में अफरातफरी मच गई, हालांकि बीते पेराई सत्र से ही मोबाइल मैसेज पर गन्ना तौल कराने की सुगबुगाहट रही है, लेकिन अमली जामा नहीं पहनाया जा सका। पूरे पेराई सत्र में विभाग ने पर्ची वितरण के माध्यम से ही किसानों के गन्ने की तौल कराई। लेकिन, आगामी पेराई सत्र के लिए पर्ची व्यवस्था समाप्त कर दी गई। इससे जहां गन्ना माफियाओं के हौसले पस्त होंगे वहीं किसानों का गन्ना भी समय से आपूर्ति होगा।
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गन्ना पेराई सीजन में गन्ना आपूर्ति पर्ची के लिए गन्ना समितियों पर होने वाली किसानों की भीड़ को इस कोरोना काल में रोकने के लिए विभाग ने मोबाइल मैसेज का रास्ता अखितयार किया है। इसके लिए शासनादेश जारी हुआ है जिसके अनुपालन में गन्ना विकास परिषद मसौधा अपने पंजीकृत साढ़े 44 हजार गन्ना किसान जो 23 गन्ना सर्किलों मे विभाजित हैं को हाईटेक बनाने मे जुट गया है।
जिसमें अधिकांश के मोबाइल नंबर तो फीड बताये जा रहे हैं। लेकिन करीब 9 हजार गन्ना किसानों के मोबाइल नंबर अपडेट नहीं हैं। विभाग के स्थानीय अधिकारी भी दबी जुबान इसकी पुष्टि करते हैं। जबकि जानकार सूत्रों की माने तो विभाग के अधिकारी इस हैरत में हैं कि किसान की खतौनी और गन्ना रकबा का सर्वेए परिवार के मुखिया के नाम होता है उसी के द्वारा की घोषणा पत्र भरवाकर, मोबाइल नंबर अटैच आधार कार्ड के साथ दफ्तर में किसान को जमा करना होता है।
समिति और परिषद के कर्मचारी उसी घोषणा पत्र के आधार पर गन्ना कलेंडर मे मोबाइल नंबर की फीडिंग करते हैं। किस किसान का मोबाइल नंबर फीड है किसका नहीं फीड है इसे चेक करने में मौजूदा समय में अधिकारियों के पसीने आ रहे हैं। ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक राम प्रताप का कहना है कि इस कोरोना काल के दौरान बिगड़ी परिस्थितियों में समितियों पर भीड़ से बचने के लिए विभाग के उच्चाधिकारियों ने बीते माह शासनादेश जारी किया है। कि पर्ची व्यवस्था समाप्त कर सिर्फ मोबाइल मैसेज व्यवस्था लागू किया जाय।
आगामी पेराई सत्र में गन्ना आपूर्ति के लिए पर्ची का वितरण नहीं होगा। किसानों को गन्ना आपूर्ति के लिए मोबाइल मैसेज के माध्यम से जानकारी दी जाएगी। मैसेज के ही आधार पर चीनी मिल समेत गन्ना खरीद केंद्रों पर गन्ने की तौल होगी।
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जिसका लाभ गन्ना विकास परिषद मसौधा में पंजीकृत साढ़े 44 हजार गन्ना किसानों को मिलेगा। जिनके गन्ने की तौल चीनी मिल सहित गन्ना खरीद केन्द्रों पर अब सिर्फ मोबाइल फोन के मैसेज से होगी। ऐसे में जिन किसानों का मोबाइल नंबर विभाग में अपडेट नहीं होगा। वह किसान गन्ना आपूर्ति से वंचित होंगे। पर्ची व्यवस्था समाप्त करने के आदेश से जहां विभागीय अधिकारियों के हाथ पांव फूल गए हैं।
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वहीं समिति के गन्ना कृषक कलेंडर में मोबाइल नंबर फीड कराने की किसानों में अफरातफरी मच गई, हालांकि बीते पेराई सत्र से ही मोबाइल मैसेज पर गन्ना तौल कराने की सुगबुगाहट रही है, लेकिन अमली जामा नहीं पहनाया जा सका। पूरे पेराई सत्र में विभाग ने पर्ची वितरण के माध्यम से ही किसानों के गन्ने की तौल कराई। लेकिन, आगामी पेराई सत्र के लिए पर्ची व्यवस्था समाप्त कर दी गई। इससे जहां गन्ना माफियाओं के हौसले पस्त होंगे वहीं किसानों का गन्ना भी समय से आपूर्ति होगा।
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गन्ना पेराई सीजन में गन्ना आपूर्ति पर्ची के लिए गन्ना समितियों पर होने वाली किसानों की भीड़ को इस कोरोना काल में रोकने के लिए विभाग ने मोबाइल मैसेज का रास्ता अखितयार किया है। इसके लिए शासनादेश जारी हुआ है जिसके अनुपालन में गन्ना विकास परिषद मसौधा अपने पंजीकृत साढ़े 44 हजार गन्ना किसान जो 23 गन्ना सर्किलों मे विभाजित हैं को हाईटेक बनाने मे जुट गया है।
जिसमें अधिकांश के मोबाइल नंबर तो फीड बताये जा रहे हैं। लेकिन करीब 9 हजार गन्ना किसानों के मोबाइल नंबर अपडेट नहीं हैं। विभाग के स्थानीय अधिकारी भी दबी जुबान इसकी पुष्टि करते हैं। जबकि जानकार सूत्रों की माने तो विभाग के अधिकारी इस हैरत में हैं कि किसान की खतौनी और गन्ना रकबा का सर्वेए परिवार के मुखिया के नाम होता है उसी के द्वारा की घोषणा पत्र भरवाकर, मोबाइल नंबर अटैच आधार कार्ड के साथ दफ्तर में किसान को जमा करना होता है।
समिति और परिषद के कर्मचारी उसी घोषणा पत्र के आधार पर गन्ना कलेंडर मे मोबाइल नंबर की फीडिंग करते हैं। किस किसान का मोबाइल नंबर फीड है किसका नहीं फीड है इसे चेक करने में मौजूदा समय में अधिकारियों के पसीने आ रहे हैं। ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक राम प्रताप का कहना है कि इस कोरोना काल के दौरान बिगड़ी परिस्थितियों में समितियों पर भीड़ से बचने के लिए विभाग के उच्चाधिकारियों ने बीते माह शासनादेश जारी किया है। कि पर्ची व्यवस्था समाप्त कर सिर्फ मोबाइल मैसेज व्यवस्था लागू किया जाय।
आगामी पेराई सत्र में गन्ना आपूर्ति के लिए पर्ची का वितरण नहीं होगा। किसानों को गन्ना आपूर्ति के लिए मोबाइल मैसेज के माध्यम से जानकारी दी जाएगी। मैसेज के ही आधार पर चीनी मिल समेत गन्ना खरीद केंद्रों पर गन्ने की तौल होगी।