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2022 तक विश्व धरोहर बन सकती अयोध्या
Wed, 06 Mar 2019 12:12 AM IST
vivek vivek
न्यूज डेस्क, अमर उजाला अयोध्या
न्यूज डेस्क, अमर उजाला अयोध्या
Published by: vivek vivek
Updated Wed, 06 Mar 2019 12:12 AM IST
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अयोध्या का कनक भवन।
- फोटो : अमर उजाला
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अहमदाबाद के बाद विश्व धरोहर (वर्ल्ड हेरिटेज सिटी) का गौरव हासिल करने वाला अयोध्या दूसरा शहर हो सकता है। कनक भवन, हनुमानगढ़ी और वाल्मीकि रामायण भवन यहां के ऐसे मंदिर है जो यूनेस्को द्वारा तय किए मानकों पर फिट बैठते हैं। विश्व धरोहर नगरी घोषित करने के लिए यूनेस्को ने जो 10 मानक निर्धारित है, उसके लिए सर्वे काम पूरा हो चुका है। इसके आधार पर बनी 400 पृष्ठ की रिपोर्ट में अयोध्या सात मानकों पर खरी उतरती है। महापौर ने शासन व यूनेस्को को इसकी रिपोर्ट भेजी है।
मुहिम के सूत्रधार अवध विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य मनोज दीक्षित बताते हैं कि 2022 तक अयोध्या वर्ल्ड हेरिटेज सिटी बन सकती है। कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित, काशी हिंदू विश्वविद्यालय में भूगोल विभागाध्यक्ष प्रो. राना पीवी सिंह व यूनेस्को की इकाई इंटरनेशनल काउंसिल ऑन मान्यूमेंटेंस एंड साइड के सदस्य प्रो. सर्वेश कुमार के प्रयास सफल रहे तो देश में अहमदाबाद के बाद अयोध्या दूसरी विश्व धरोहर नगरी बन सकता है।
बताते हैं कि यूनेस्को के सदस्य पिछले दिनों अयोध्या आए थे और सर्वे की सत्यता परखने के बाद यूनेस्को ने एक टीम भी गठित कर दी है। उम्मीद है कि अयोध्या को विश्व धरोहर घोषित करने में अब लंबा समय नहीं लगेगा। प्रोफेसर सर्वेश कुमार बताते हैं कि आधुनिकतम इतिहास की दृष्टि से देखें तो भी अयोध्या प्राचीनतम नौवीं शताब्दी ईसा पूर्व से प्रमाणित है। अयोध्या में यूनेस्को के मानक के अनुरूप कई धार्मिक स्थल विराजमान हैं।
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सरयू के जमथरातट से लेकर संत तुलसीदास घाट तक सर्वे के दौरान सैटेलाइट से अयोध्या का जो भूदृश्य प्राप्त हुआ वह बड़े नौका के स्वरूप में है। ये चित्र मनु की उस परंपरा को जीवंत करता है जिसमें पुराण के अनुसार जल प्रलय के दौरान मनु विशाल नौका के साथ अयोध्या के तट पर पहुंचे थे। प्रोफेसर सर्वेश बताते हैं कि धार्मिक एवं आध्यात्मिक दृष्टि से अयोध्या को दरकिनार करना संभव नहीं है। इतिहास में सांस्कृतिक परंपरा की गवाही से लेकर वास्तुकला और परिदृश्य का उत्कृष्ट उदाहरण रामनगरी है। प्राकृतिक सुंदरता एवं परंपराओं की निरंतरता में भी अयोध्या अमूर्त विरासत है।
वर्ल्ड हेरिटेज सिटी के 10 मानक
- मानव रचनात्मकता का उत्कृष्ट प्रतिनिधित्व
- वास्तुकला एवं स्मारकों में निहित मानव मूल्य
- सांस्कृतिक परंपरा की प्राचीनता एवं निरंतरता
- भू-दृश्य एवं वास्तु की उत्कृष्टता
- परंपरागत निवास स्थल
- सांस्कृतिक उत्तरजीविता
- जीवंत परंपरा एवं अमूर्त धरोहर
- प्राकृतिक सुंदरता
- पारिस्थितिकी
- जैव विविधता
रामनगरी इन सात मानकों पर उतरी खरी
रामनगरी अयोध्या यूनेस्को द्वारा निर्धारित 10 मानकों में से सात पर खरी उतरती हैं। अयोध्या की ये कुछ विशेषताएं हैं जो उसे वर्ल्ड हेरिटेज सिटी के रूप में प्रतिष्ठापित करने का आधार बनेंगी। उनमें कनकभवन मंदिर, हनुमानगढ़ी, चंद्रहरि, नागेश्वरनाथ और बड़ी छावनी और छोटी छावनी मठ उल्लेखनीय हैं। वाल्मीकीय रामायण भवन में संगमरमर की दीवार पर रामायण के 24 हजार श्लोक दर्शाएं गए हैं, यह भारत में केवल एकमात्र ऐसी जगह है। अयोध्या सभी धर्मों का प्रतिनिधित्व करती है। यहां हजारों हिंदू मंदिर, 100 मुस्लिम स्थल व मस्जिद, सिख गुरुद्वारा, पांच जैन मंदिर व प्राचीन बौद्ध स्थल हैं। यहां मुस्लिम संप्रदाय के सूफियों की कब्र भी हैं। अयोध्या की रामलीला पहले ही यूनेस्को में शामिल हो चुकी है। शहर सरयू नदी के साथ एक अद्वितीय प्राकृतिक आकार का प्रतिनिधित्व करता है यह आयताकार आकृति बनाता है जो पश्चिम से लेकर पूर्व तक लगभग 10 किमी तक बहती है।
मुहिम के सूत्रधार अवध विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य मनोज दीक्षित बताते हैं कि अयोध्या को वर्ल्ड हेरिटेज सिटी बनाने की कवायद चल रही है। दो वर्षों में 24 से अधिक सेमिनार कराए जा चुके हैं। यूनेस्को की टीम भी अयोध्या का दौरा कर चुकी है। यूनेस्को ने एक टीम भी गठित कर दी है जो सर्वे कर रिपोर्ट सौंपेगी जिसके आधार पर अयोध्या के वर्ल्ड हेरिटेज सिटी बनने का मार्ग प्रशस्त होगा। कहा कि परिस्थिति तंत्र व जैव विविधता के फलक पर रामनगरी की अनदेखी करना कठिन है। उम्मीद है कि 2022 तक अयोध्या वर्ल्ड हेरीटेज सिटी में शामिल हो जाएगी।
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मुहिम के सूत्रधार अवध विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य मनोज दीक्षित बताते हैं कि 2022 तक अयोध्या वर्ल्ड हेरिटेज सिटी बन सकती है। कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित, काशी हिंदू विश्वविद्यालय में भूगोल विभागाध्यक्ष प्रो. राना पीवी सिंह व यूनेस्को की इकाई इंटरनेशनल काउंसिल ऑन मान्यूमेंटेंस एंड साइड के सदस्य प्रो. सर्वेश कुमार के प्रयास सफल रहे तो देश में अहमदाबाद के बाद अयोध्या दूसरी विश्व धरोहर नगरी बन सकता है।
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बताते हैं कि यूनेस्को के सदस्य पिछले दिनों अयोध्या आए थे और सर्वे की सत्यता परखने के बाद यूनेस्को ने एक टीम भी गठित कर दी है। उम्मीद है कि अयोध्या को विश्व धरोहर घोषित करने में अब लंबा समय नहीं लगेगा। प्रोफेसर सर्वेश कुमार बताते हैं कि आधुनिकतम इतिहास की दृष्टि से देखें तो भी अयोध्या प्राचीनतम नौवीं शताब्दी ईसा पूर्व से प्रमाणित है। अयोध्या में यूनेस्को के मानक के अनुरूप कई धार्मिक स्थल विराजमान हैं।
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सरयू के जमथरातट से लेकर संत तुलसीदास घाट तक सर्वे के दौरान सैटेलाइट से अयोध्या का जो भूदृश्य प्राप्त हुआ वह बड़े नौका के स्वरूप में है। ये चित्र मनु की उस परंपरा को जीवंत करता है जिसमें पुराण के अनुसार जल प्रलय के दौरान मनु विशाल नौका के साथ अयोध्या के तट पर पहुंचे थे। प्रोफेसर सर्वेश बताते हैं कि धार्मिक एवं आध्यात्मिक दृष्टि से अयोध्या को दरकिनार करना संभव नहीं है। इतिहास में सांस्कृतिक परंपरा की गवाही से लेकर वास्तुकला और परिदृश्य का उत्कृष्ट उदाहरण रामनगरी है। प्राकृतिक सुंदरता एवं परंपराओं की निरंतरता में भी अयोध्या अमूर्त विरासत है।
वर्ल्ड हेरिटेज सिटी के 10 मानक
- मानव रचनात्मकता का उत्कृष्ट प्रतिनिधित्व
- वास्तुकला एवं स्मारकों में निहित मानव मूल्य
- सांस्कृतिक परंपरा की प्राचीनता एवं निरंतरता
- भू-दृश्य एवं वास्तु की उत्कृष्टता
- परंपरागत निवास स्थल
- सांस्कृतिक उत्तरजीविता
- जीवंत परंपरा एवं अमूर्त धरोहर
- प्राकृतिक सुंदरता
- पारिस्थितिकी
- जैव विविधता
रामनगरी इन सात मानकों पर उतरी खरी
रामनगरी अयोध्या यूनेस्को द्वारा निर्धारित 10 मानकों में से सात पर खरी उतरती हैं। अयोध्या की ये कुछ विशेषताएं हैं जो उसे वर्ल्ड हेरिटेज सिटी के रूप में प्रतिष्ठापित करने का आधार बनेंगी। उनमें कनकभवन मंदिर, हनुमानगढ़ी, चंद्रहरि, नागेश्वरनाथ और बड़ी छावनी और छोटी छावनी मठ उल्लेखनीय हैं। वाल्मीकीय रामायण भवन में संगमरमर की दीवार पर रामायण के 24 हजार श्लोक दर्शाएं गए हैं, यह भारत में केवल एकमात्र ऐसी जगह है। अयोध्या सभी धर्मों का प्रतिनिधित्व करती है। यहां हजारों हिंदू मंदिर, 100 मुस्लिम स्थल व मस्जिद, सिख गुरुद्वारा, पांच जैन मंदिर व प्राचीन बौद्ध स्थल हैं। यहां मुस्लिम संप्रदाय के सूफियों की कब्र भी हैं। अयोध्या की रामलीला पहले ही यूनेस्को में शामिल हो चुकी है। शहर सरयू नदी के साथ एक अद्वितीय प्राकृतिक आकार का प्रतिनिधित्व करता है यह आयताकार आकृति बनाता है जो पश्चिम से लेकर पूर्व तक लगभग 10 किमी तक बहती है।
मुहिम के सूत्रधार अवध विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य मनोज दीक्षित बताते हैं कि अयोध्या को वर्ल्ड हेरिटेज सिटी बनाने की कवायद चल रही है। दो वर्षों में 24 से अधिक सेमिनार कराए जा चुके हैं। यूनेस्को की टीम भी अयोध्या का दौरा कर चुकी है। यूनेस्को ने एक टीम भी गठित कर दी है जो सर्वे कर रिपोर्ट सौंपेगी जिसके आधार पर अयोध्या के वर्ल्ड हेरिटेज सिटी बनने का मार्ग प्रशस्त होगा। कहा कि परिस्थिति तंत्र व जैव विविधता के फलक पर रामनगरी की अनदेखी करना कठिन है। उम्मीद है कि 2022 तक अयोध्या वर्ल्ड हेरीटेज सिटी में शामिल हो जाएगी।