{"_id":"61c37b59926b1554c60f7611","slug":"ayodhya-became-special-for-officers-and-influential-people-faizabad-news-lko6101976161","type":"story","status":"publish","title_hn":"अफसर व रसूखदारों के लिए खास बनी अयोध्या","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अफसर व रसूखदारों के लिए खास बनी अयोध्या
विज्ञापन
अयोध्या का विहंगम दृश्य
- फोटो : FAIZABAD
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अयोध्या। राममंदिर पर सुप्रीम कोर्ट से फैसला आने के तुरंत बाद अयोध्या की जमीन भी सोना उगलने लगी। जिस जमीन को कोई पूछने वाला नहीं था उसे अयोध्या में तैनात रहे अधिकारियों और स्थानीय नेताओं ने औने-पौने खरीद लिया।
अब इसी जमीन पर नव्य अयोध्या विकसित की जानी है। स्पष्ट है कि जब यह नगरी वैश्विक पर्यटन का केंद्र बनेगी तो कौड़ियों के भाव खरीद गई यही जमीन मुंह मांगी कीमत दिलाएगी।
यह वही अयोध्या है जहां फैसला आने के पहले कोई अफसर जाना भी पसंद नहीं करता था। इस बीच कहा जा रहा है अभी कई अफसर और जमीन का सौदा करने के लिए लाइन में हैं।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट से नौ नवंबर 2019 को राममंदिर के हक में फैसला आया। इस आदेश के बाद व राममंदिर निर्माण शुरू होने के साथ ही अयोध्या की जमीनों के दाम आसमान छूने लगे।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने भी करीब 70 एकड़ जमीन रामजन्मभूमि परिसर के विस्तार के क्रम में खरीदी है। जमीन खरीदने को लेकर ट्रस्ट विवाद में भी घिरा था। इसके बाद तो जैसे जमीन खरीद के लिए होड़ सी लग गई।
जमीन खरीद में अयोध्या में तैनात अफसरों व नेताओं की प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से संलिप्तता भी सामने आने लगी है। अयोध्या में पिछले दो वर्षों में तैनात रहे भारतीय व प्रांतीय सेवा के अफसरों और नेताओं ने अपने रिश्तेदारों, परिजनों के नाम पर जमीन खरीदी है।
अपने रिश्तेदारों व परिजनों के लिए जमीन खरीदने वालों में कमिश्नर से लेकर डीआईजी व डीएम तक शामिल रहे तो कई नेताओं के नाम भी सामने आए हैं। सीओ, राजस्व विभाग के अधिकारियों सहित विधायक व महापौर का नाम भी जमीन खरीदने में आया है।
राजस्व मामलों के जानकार वरिष्ठ अधिवक्ता गणेश दत्त पांडेय कहते हैं कि यदि राजस्व के नियमों का उल्लंघन करते हुए या गैर कानूनी ढंग से जमीन खरीदी गई है तो इस पर अपराध बनता है।
यदि कानूनी रूप से नियमों का पालन करते हुए जमीन खरीदी गई है तो कोई अपराध नहीं बनता है। अफसर, नेता के जमीन खरीदने पर कहीं कोई रोक तो है नहीं, इसलिए इसको मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए।
भारतीय किसान यूनियन के नेता शिव प्रसाद पांडेय कहते हैं कि यदि बड़े-बड़े लोग नेता, अफसर, बिजनेस मैन आदि अयोध्या आकर जमीन खरीद रहे हैं तो इसमें क्या बुराई है।
यह तो विकास व तरक्की का ही संकेत है। इसमें किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। किसानों की जो जमीन कौड़ियों के भाव बिकती थी, आज वही जमीन लाखों में बिक रही है। किसान का तो लाभ ही हो रहा है।
अयोध्या में इन्होंने खरीदी जमीन
एमपी अग्रवाल अयोध्या के मंडलायुक्त हैं। इनके ससुर केशव प्रसाद अग्रवाल ने 10 दिसंबर, 2020 को बरहटा मांझा में महर्षि रामायण विद्यापीठ ट्रस्ट से 31 लाख रुपये में 2530 वर्गमीटर जमीन खरीदी। उनके बहनोई आनंद वर्धन ने उसी दिन उसी गांव में 15.50 लाख में 1260 वर्ग मीटर जमीन खरीदी।
अयोध्या के डीआईजी रहे दीपक कुमार जो अब अलीगढ़ के डीआईजी हैं। इनकी पत्नी की बहन महिमा ठाकुर ने एक सितंबर 2021 को बरहटा मांझा में 1020 वर्गमीटर जमीन 19.75 लाख में खरीदी है।
गोसाईगंज के विधायक इंद्रप्रताप तिवारी ने 18 नवंबर 2019 को बरहटा मांझा में 2593 वर्गमीटर जमीन 30 लाख में खरीदी। उनके बहनोई राजेश मिश्रा ने राघवाचार्य के साथ मिलकर 16 मार्च 2021 को बरहटा मांझा में ही 6320 वर्गमीटर जमीन 47.40 लाख रुपये में खरीदी है।
अयोध्या के मुख्य राजस्व अधिकारी रहे पुरूषोत्तम दास गुप्ता जो अब गोरखपुर में एडीएम हैं। उनके साले अतुल गुप्ता की पत्नी तृप्ति गुप्ता ने अमरजीत यादव नाम के एक व्यक्ति के साथ साझेदारी में 12 अक्तूबर 2021 को बरहटा मांझा में 1130 वर्ग मीटर जमीन 21.88 लाख में खरीदी।
अयोध्या विधायक वेदप्रकाश गुप्ता के भतीजे तरूण मित्तल ने 21 नवंबर 2019 को बरहटा मांझा में 5174 वर्ग मीटर जमीन 1.15 करोड़ रुपये में खरीदा है।
पूर्व आईएएस अधिकारी उमाधर द्विवेदी जो कि सेवानिवृत्त हो चुके हैं उन्होंने बरहटा मांझा में 23 अक्तूबर 2021 को 39.04 लाख रुपये में 1680 वर्ग मीटर जमीन खरीदी।
अयोध्या नगर निगम के महापौर ऋषिकेश उपाध्याय ने अयोध्या फैसले से दो महीने पहले 18 सितंबर 2019 को हरीश कुमार से 30 लाख रुपये में 1480 वर्गमीटर जमीन खरीदी।
अयोध्या के पूर्व एसडीएम आयुष चौधरी की चचेरी बहन शोभिता रानी ने अयोध्या के बिरौली में 5350 वर्ग मीटर जमीन को 17.66 लाख रुपये में 28 मई 2020 को खरीदी।
पूर्व जिलाधिकारी अयोध्या अनुज कुमार झा के खास रिश्तेदार भागलपुर निवासी संगम झा द्वारा 0.379 हेक्टेयर भूमि मांझा बरहटा में 11 नवंबर 2020 को खरीदी गई।
मुरादाबाद के मंडलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह के पिता महेंद्र सिंह द्वारा राजेपुर मांझा में 0.537 हेक्टेयर भूमि 28 जनवरी 2021 को खरीदी गई है।
इसको लेकर कोई जानकारी नहीं है, कोई मामला संज्ञान में नहीं आया है। यदि गैरकानूनी रूप से जमीन खरीदने की शिकायत आती है तो जांच की जाएगी, ऐसी कोई शिकायत अभी नहीं आई है। -नितीश कुमार, जिलाधिकारी, अयोध्या
विज्ञापन
अब इसी जमीन पर नव्य अयोध्या विकसित की जानी है। स्पष्ट है कि जब यह नगरी वैश्विक पर्यटन का केंद्र बनेगी तो कौड़ियों के भाव खरीद गई यही जमीन मुंह मांगी कीमत दिलाएगी।
विज्ञापन
यह वही अयोध्या है जहां फैसला आने के पहले कोई अफसर जाना भी पसंद नहीं करता था। इस बीच कहा जा रहा है अभी कई अफसर और जमीन का सौदा करने के लिए लाइन में हैं।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट से नौ नवंबर 2019 को राममंदिर के हक में फैसला आया। इस आदेश के बाद व राममंदिर निर्माण शुरू होने के साथ ही अयोध्या की जमीनों के दाम आसमान छूने लगे।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने भी करीब 70 एकड़ जमीन रामजन्मभूमि परिसर के विस्तार के क्रम में खरीदी है। जमीन खरीदने को लेकर ट्रस्ट विवाद में भी घिरा था। इसके बाद तो जैसे जमीन खरीद के लिए होड़ सी लग गई।
जमीन खरीद में अयोध्या में तैनात अफसरों व नेताओं की प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से संलिप्तता भी सामने आने लगी है। अयोध्या में पिछले दो वर्षों में तैनात रहे भारतीय व प्रांतीय सेवा के अफसरों और नेताओं ने अपने रिश्तेदारों, परिजनों के नाम पर जमीन खरीदी है।
अपने रिश्तेदारों व परिजनों के लिए जमीन खरीदने वालों में कमिश्नर से लेकर डीआईजी व डीएम तक शामिल रहे तो कई नेताओं के नाम भी सामने आए हैं। सीओ, राजस्व विभाग के अधिकारियों सहित विधायक व महापौर का नाम भी जमीन खरीदने में आया है।
राजस्व मामलों के जानकार वरिष्ठ अधिवक्ता गणेश दत्त पांडेय कहते हैं कि यदि राजस्व के नियमों का उल्लंघन करते हुए या गैर कानूनी ढंग से जमीन खरीदी गई है तो इस पर अपराध बनता है।
यदि कानूनी रूप से नियमों का पालन करते हुए जमीन खरीदी गई है तो कोई अपराध नहीं बनता है। अफसर, नेता के जमीन खरीदने पर कहीं कोई रोक तो है नहीं, इसलिए इसको मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए।
भारतीय किसान यूनियन के नेता शिव प्रसाद पांडेय कहते हैं कि यदि बड़े-बड़े लोग नेता, अफसर, बिजनेस मैन आदि अयोध्या आकर जमीन खरीद रहे हैं तो इसमें क्या बुराई है।
यह तो विकास व तरक्की का ही संकेत है। इसमें किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। किसानों की जो जमीन कौड़ियों के भाव बिकती थी, आज वही जमीन लाखों में बिक रही है। किसान का तो लाभ ही हो रहा है।
अयोध्या में इन्होंने खरीदी जमीन
एमपी अग्रवाल अयोध्या के मंडलायुक्त हैं। इनके ससुर केशव प्रसाद अग्रवाल ने 10 दिसंबर, 2020 को बरहटा मांझा में महर्षि रामायण विद्यापीठ ट्रस्ट से 31 लाख रुपये में 2530 वर्गमीटर जमीन खरीदी। उनके बहनोई आनंद वर्धन ने उसी दिन उसी गांव में 15.50 लाख में 1260 वर्ग मीटर जमीन खरीदी।
अयोध्या के डीआईजी रहे दीपक कुमार जो अब अलीगढ़ के डीआईजी हैं। इनकी पत्नी की बहन महिमा ठाकुर ने एक सितंबर 2021 को बरहटा मांझा में 1020 वर्गमीटर जमीन 19.75 लाख में खरीदी है।
गोसाईगंज के विधायक इंद्रप्रताप तिवारी ने 18 नवंबर 2019 को बरहटा मांझा में 2593 वर्गमीटर जमीन 30 लाख में खरीदी। उनके बहनोई राजेश मिश्रा ने राघवाचार्य के साथ मिलकर 16 मार्च 2021 को बरहटा मांझा में ही 6320 वर्गमीटर जमीन 47.40 लाख रुपये में खरीदी है।
अयोध्या के मुख्य राजस्व अधिकारी रहे पुरूषोत्तम दास गुप्ता जो अब गोरखपुर में एडीएम हैं। उनके साले अतुल गुप्ता की पत्नी तृप्ति गुप्ता ने अमरजीत यादव नाम के एक व्यक्ति के साथ साझेदारी में 12 अक्तूबर 2021 को बरहटा मांझा में 1130 वर्ग मीटर जमीन 21.88 लाख में खरीदी।
अयोध्या विधायक वेदप्रकाश गुप्ता के भतीजे तरूण मित्तल ने 21 नवंबर 2019 को बरहटा मांझा में 5174 वर्ग मीटर जमीन 1.15 करोड़ रुपये में खरीदा है।
पूर्व आईएएस अधिकारी उमाधर द्विवेदी जो कि सेवानिवृत्त हो चुके हैं उन्होंने बरहटा मांझा में 23 अक्तूबर 2021 को 39.04 लाख रुपये में 1680 वर्ग मीटर जमीन खरीदी।
अयोध्या नगर निगम के महापौर ऋषिकेश उपाध्याय ने अयोध्या फैसले से दो महीने पहले 18 सितंबर 2019 को हरीश कुमार से 30 लाख रुपये में 1480 वर्गमीटर जमीन खरीदी।
अयोध्या के पूर्व एसडीएम आयुष चौधरी की चचेरी बहन शोभिता रानी ने अयोध्या के बिरौली में 5350 वर्ग मीटर जमीन को 17.66 लाख रुपये में 28 मई 2020 को खरीदी।
पूर्व जिलाधिकारी अयोध्या अनुज कुमार झा के खास रिश्तेदार भागलपुर निवासी संगम झा द्वारा 0.379 हेक्टेयर भूमि मांझा बरहटा में 11 नवंबर 2020 को खरीदी गई।
मुरादाबाद के मंडलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह के पिता महेंद्र सिंह द्वारा राजेपुर मांझा में 0.537 हेक्टेयर भूमि 28 जनवरी 2021 को खरीदी गई है।
इसको लेकर कोई जानकारी नहीं है, कोई मामला संज्ञान में नहीं आया है। यदि गैरकानूनी रूप से जमीन खरीदने की शिकायत आती है तो जांच की जाएगी, ऐसी कोई शिकायत अभी नहीं आई है। -नितीश कुमार, जिलाधिकारी, अयोध्या