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विजय व खुशी का उत्सव है अन्नकूट: अनंताचार्य

Thu, 27 Oct 2022 11:33 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 27 Oct 2022 11:33 PM IST
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Annakoot is a festival of victory and happiness: Anantacharya
अयोध्या। रामनगरी में दूसरे दिन गुरुवार को भी अन्नकूट महोत्सव का उल्लास छलका। कई मंदिरों में अन्नकूट महोत्सव पर विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान हुए। भगवान को 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाकर भगवान श्रीराम के लंका विजय कर लौटने की खुशी व्यक्त की गई।
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इसी क्रम में उत्तर तोताद्रिमठ, विभीषणकुंड में अन्नकूट महोत्सव पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे तोताद्रिमठ पीठाधीश्वर जगद्गुरु अनंताचार्य ने कहा अन्नकूट महोत्सव विजय व खुशी का उत्सव है।
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भगवान श्रीराम 14 वर्ष बनवास काटकर जब लंका विजय कर लौटे तो उनके स्वागत में 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाकर पूजा-अर्चना की। इसे हम गोवर्धन पूजा के नाम से भी जानते हैं। यह परंपरा त्रेतायुग से चली आ रही है, जिसका निर्वहन आज भी जारी है।
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जगद्गुरु श्यामनारायणाचार्य ने कहा कि अन्नकूट का मतलब है अन्न का ढेर या पर्वत। 56 प्रकार के व्यंजन बनाकर ठाकुरजी को भोग लगाते हैं। बाद में वही भोग प्रसाद भक्तगणों में वितरित किया जाता है।
द्वारकाधीश मंदिर के जगद्गुरु सूर्य नारायणाचार्य ने कहा कि संतों की ही कृपा से हमें भगवत कृपा मिलती है, इससे हमारा जीवन कृतार्थ होता है। डॉ. सुनीता शास्त्री ने कहा कि प्रभु श्रीराम व श्रीकृष्ण में कोई भेद नही है।
हम मथुरा के साथ-साथ अयोध्या में अन्नकूट महोत्सव मना रहे हैं। यह महोत्सव हमारे महापुरुषों, आचार्यों और गुरुजनों की देन है। संगोष्ठी में रामहर्षण कुंज महंत अयोध्या दास, हनुमानगढ़ी के सरपंच रामकुमार दास, स्वामी बालाकृष्णाचार्य, स्वामी माधवाचार्य, अनंत पद्मनाभाचार्य, महंत जयराम दास, मंडलायुक्त नवदीप रिनवा, महापौर ऋषिकेश उपाध्याय, महंत कामता शरण, आचार्य शशिकांत दास, पार्षद रमेश दास सहित अन्य मौजूद रहे।
इससे पहले तोताद्रिमठ पीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी अनंताचार्य व मंडलायुक्त नवदीप रिनवा ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम का संचालन महंत दाशरथी दास ने किया।
इसी तरह सरयू तट स्थित लक्ष्मण किला में भगवान को 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाकर प्रसाद वितरित किया गया। इस अवसर पर जेवनार गायन की प्रस्तुति में शामिल होकर भक्त निहाल दिखे।

महंत मैथिलीरमण शरण ने पूजन-अर्चन कर भगवान को भोग अर्पित किया। हरिधाम गोपाल पीठ में भी छप्पन प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाकर अन्नकूट महोत्सव उल्लास पूर्वक मनाया गया।
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