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जर्जर मठ-मंदिरों का नहीं लौट सका प्राचीन गौरव

Sun, 13 Feb 2022 12:04 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 13 Feb 2022 12:04 AM IST
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Ancient glory could not return to dilapidated monasteries-temples
अयोध्या-जर्जर पुराना शीशमहल मंदिर।-संवाद - फोटो : FAIZABAD
अयोध्या। रामनगरी अयोध्या की ऐतिहासिकता व प्राचीनता के गवाह जर्जर मठ-मंदिरों के जीर्णोद्धार की कार्रवाई आज भी अधूरी है। ऐसे में अधिकांश प्राचीन मंदिर अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए संघर्ष करते दिखाई देते हैं। भरभरा रहे लखौरी ईंटों से बने यह मंदिर कभी देशभर में हिंदू धर्म, कला व संस्कृति के साथ-साथ नायाब स्थापत्य कला की भी पहचान थे। इनकी भव्य नक्काशी और चमचमाती सूरत अब इतिहास बन गई है। इनका प्राचीन गौरव लौटाने के लिए पिछले कुछ वर्षों में योजनाएं तो बनीं लेकिन वह अब तक मूर्त रूप नहीं ले सकी हैं।
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गरिमा के अनुरूप अयोध्या के विकास के लिए सरकार ने जो मास्टर प्लान तैयार किया है उसमें जर्जर मठ-मंदिरों का जीर्णोद्धार भी शामिल है। हालांकि इसको लेकर अभी तक कोई कवायद शुरू नहीं हो सकी है। राममंदिर निर्माण के साथ ही संपूर्ण अयोध्या को हेरिटेज लुक देने को लेकर बनी योजना कागजों से बाहर नहीं निकल पाई है। कभी रामनगरी के प्राचीन मंदिरों को बनाने से लेकर सजाने-संवारने में तमाम राजा-रजवाड़ों व धर्मप्रेमियों के साथ संत-महंतों की भगवान राम की जन्मभूमि के प्रति अनुराग और श्रद्धा थी। आज भी ये मंदिर भले ही जर्जर अवस्था में पहुंचकर अपनी सुंदरता खो चुके हैं लेकिन आस्था के चलते मंदिरों के विग्रह में विराजमान भगवान के राग-भोग का क्रम कभी नहीं थमा, आज भी जारी है। कई ऐसे मंदिर भी हैं जिनका इतिहास दो सौ से लेकर पांच सौ साल पुराना है। अयोध्या के अधिकांश मंदिर करीब एक शताब्दी प्राचीन हैं। इनकी नक्काशी, अद्भुत कलाकारी आज भी कायम हैं। संत-धर्माचार्य व स्थानीय नागरिक कहते हैं कि यदि इन मंदिरों का जीर्णोद्धार कराकर इन्हें पुन: संवार दिया जाए तो अयोध्या की प्राचीनता व भव्यता देखने को पूरी दुनिया आकर्षित हो उठेगी।
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शीशे की तरह चमकता था शीशमहल मंदिर
रामनगरी के मुख्य मार्ग पर शृंगारहाट में स्थित पुराना शीश महल मंदिर करीब दो सौ वर्ष पुराना है। यह मंदिर कभी अयोध्या की शान हुआ करता था। बताते हैं कि इस मंदिर का नाम शीश महल इसलिए पड़ा कि अपने निर्माण के प्रारंभिक काल में यह मंदिर शीशे की तरह चमकता था। मंदिर की नक्काशी इतनी भव्य थी कि जो देेखता आकर्षित हो जाता। समय के साथ यह मंदिर जर्जर हो गया है। यहां स्थापित भगवान को कौशल किशोर के रूप में पूजा जाता है। मंदिर में भगवान राम, जानकी, लक्ष्मण की मूर्ति है, यहां प्राचीन शिवालय भी है।
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धन के अभाव में नहीं हो सकी भीखू साह मंदिर की मरम्मत
नगर निगम अयोध्या जोन कार्यालय के समीप स्थित भीखू साह मंदिर का इतिहास भी लगभग दौ सौ वर्ष प्राचीन है। इस मंदिर को आजमगढ़ के सेठ शिवदास गुप्ता ने बनवाया था। बाद में सेठ भीखू साह ने इसका जीर्णोद्धार कराया। यहां वर्तमान पुजारी रमाकांत तीन पीढ़ियों से रहे हैं। मंदिर में राधाकृष्ण सहित रामसीता, लक्ष्मण व हनुमान की मूर्तियां स्थापित हैं। मंदिर की भव्य नक्काशी आकर्षित करती है। मंदिर लखौरी ईंटों से बना है, मरम्मत कराने में अधिक खर्चा आएगा, मरम्मत के अभाव में मंदिर की प्राचीनता नष्ट हो रही है।
नगर निगम ने चिह्नित किए थे 176 जर्जर भवन
नगर निगम अयोध्या की ओर से वर्ष 2017-18 में अयोध्या धाम के 176 भवनों, मठ-मंदिरों को चिह्नित करते हुए उन्हें नोटिस दिया गया था। तत्कालीन रिपोर्ट के अनुसार इनमें से करीब 70 ने अपने भवनों की मरम्मत करा ली थी। बावजूद इसके सौ भवनों के जीर्णोद्धार की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी रामनगरी के जर्जर मठ-मंदिरों का जीर्णोद्धार कराने के लिए प्लान बनाने को निर्देशित किया था। प्लान तो बना लेकिन मठ-मंदिरों के जीर्णोद्धार की कार्रवाई अब तक नहीं हो सकी है।

संत बोले- जीर्णोद्धार से सुंदरता बढ़ेगी, इतिहास संरक्षित होगा
रामनगरी के संत-धर्माचार्य भी रामनगरी की प्राचीनता के गवाह जर्जर मंदिरों के संरक्षण व सुंदरीकरण की वकालत करते हैं। प्राचीन रंगमहल मंदिर के महंत रामशरण दास कहते हैं कि जर्जर मठ-मंदिरों का जीर्णोद्धार कराए जाने से न सिर्फ इनकी सुंदरता बढ़ेगी बल्कि इतिहास भी संरक्षित होगा। अयोध्या का प्राचीन गौरव लौटेगा। वशिष्ठ पीठ तिवारी मंदिर के महंत गिरीशपति त्रिपाठी का कहना है कि लखौरी ईंटों से बने मंदिर कभी अयोध्या की सुंदरता हुआ करते थे। अधिकांश मंदिरों का इतिहास दौ साल पुराना है। इनका जीर्णोद्धार व संरक्षण आवश्यक है ये रामनगरी की प्राचीनता को बयां करते हैं।
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