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आलू भाव `30 पार पहुंचने को बेताब
Faizabad
Updated Sat, 27 Sep 2014 05:30 AM IST
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फैजाबाद। सब्जियों का राजा आलू बेकाबू हो चला है। इसे भी महंगाई की नजर लग गई है। नतीजतन कुछ दिनों पहले तक 25-26 रुपये प्रति किलो फुटकर बिकने वाला आलू अब 30 रुपये के पार पहुंचने को बेताब है। हालांकि अभी इसके दाम 26-30 रुपये प्रति किलो पर टिके हैं, मगर आपूर्ति के मुकाबले मांग अधिक बढ़ने से इसके और बेकाबू होने के आसार लग रहे हैं। इसकी वजह नवरात्र व बुआई के सीजन का नजदीक आना है।
बताया जा रहा है कि नवरात्र नजदीक होने से आलू के दाम परवान चढ़े हैं। उधर, बुआई सीजन भी लगभग चालू हो गया है। अग्रणी किसानों ने खेतों को दुरुस्त कर आलू बुआई शुरू कर दी है। इससे आलू की खपत पहले की अपेक्षा अधिक बढ़ गई है, जबकि यहां की मंडियों में आवक कमोबेश वैसी ही है। इसी कारण आलू के दामों में एकाएक काफी बढ़ोत्तरी हो गई है। जो आलू सप्ताह भर पूर्व 22-25 रुपये तक में बिक रहा था, अब उसका फुटकर में दाम 26-30 रुपये तक हो गया है। यही हाल मंडियों में भी है। आलू के थोक भाव भी बढ़े हैं। बताते हैं कि मांग अधिक बढ़ने से आलू का थोक भाव 2,000 से 2,200 रुपये प्रति कुंतल तक पहुंच गया है। जबकि आढ़तियों के यहां आलू की सप्लाई उतने ट्रक ही हो रही, जितनी पहले थी। इससे निरंतर दामों में उछाल बना है। हालांकि एक अहम वजह थोक व्यापारियों का आलू भंडारित करना भी है। जानकार बताते हैं कि व्यापारी आलू की जमाखोरी कर रहे हैं, इसीलिए दाम बढ़ते जा रहे हैं। अगर इस पर अंकुश लगा लिया जाए तो आलू का भाव कुछ गिर सकता है। ये अलग बात है कि मंडी के अधिकारी जमाखोरी से इंकार करते हैं। उनका कहना है कि व्यापारियों के यहां उतनी मात्रा में आपूर्ति ही नहीं हो रही, तो जमाखोरी कैसे होगी? वह भी आपूर्ति की अपेक्षा मांग बढ़ने को इसका जिम्मेदार बताते हैं।
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बताया जा रहा है कि नवरात्र नजदीक होने से आलू के दाम परवान चढ़े हैं। उधर, बुआई सीजन भी लगभग चालू हो गया है। अग्रणी किसानों ने खेतों को दुरुस्त कर आलू बुआई शुरू कर दी है। इससे आलू की खपत पहले की अपेक्षा अधिक बढ़ गई है, जबकि यहां की मंडियों में आवक कमोबेश वैसी ही है। इसी कारण आलू के दामों में एकाएक काफी बढ़ोत्तरी हो गई है। जो आलू सप्ताह भर पूर्व 22-25 रुपये तक में बिक रहा था, अब उसका फुटकर में दाम 26-30 रुपये तक हो गया है। यही हाल मंडियों में भी है। आलू के थोक भाव भी बढ़े हैं। बताते हैं कि मांग अधिक बढ़ने से आलू का थोक भाव 2,000 से 2,200 रुपये प्रति कुंतल तक पहुंच गया है। जबकि आढ़तियों के यहां आलू की सप्लाई उतने ट्रक ही हो रही, जितनी पहले थी। इससे निरंतर दामों में उछाल बना है। हालांकि एक अहम वजह थोक व्यापारियों का आलू भंडारित करना भी है। जानकार बताते हैं कि व्यापारी आलू की जमाखोरी कर रहे हैं, इसीलिए दाम बढ़ते जा रहे हैं। अगर इस पर अंकुश लगा लिया जाए तो आलू का भाव कुछ गिर सकता है। ये अलग बात है कि मंडी के अधिकारी जमाखोरी से इंकार करते हैं। उनका कहना है कि व्यापारियों के यहां उतनी मात्रा में आपूर्ति ही नहीं हो रही, तो जमाखोरी कैसे होगी? वह भी आपूर्ति की अपेक्षा मांग बढ़ने को इसका जिम्मेदार बताते हैं।
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